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सेमरी में चार लोगों के आशियाने घाघरा ने लीले

Tue, 07 Aug 2018 12:24 AM IST
Updated Tue, 07 Aug 2018 12:24 AM IST
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सेमरी में चार लोगों के आशियाने घाघरा ने लीले
लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा का सेमरी गांव में तांडव मचाने का क्रम लगातार जारी है। विगत 24 घंटों में घाघरा ने इस गांव के चार आशियाने अपने आगोश में लिया। हालांकि विगत दिनों की तुलना में घाघरा के जलस्तर में बढ़ाव का क्रम धीमा रहा लेकिन कटान में तेजी आ गई है। नदी डिघिया नाले पर अभी भी 22 सेमी लाल निशान से ऊपर बह रही है। जब बदरहुंआ में लाल निशान से 20 सेमी नीचे है। विगत 24 घंटों में घाघरा के जलस्तर में बदरहुंआ नाले पर दो सेमी और डिघिया नाले पर एक सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। रविवार को बदरहुंआ नाले पर नदी का जलस्तर 71.46 मीटर दर्ज किया गया था जो सोमवार को दो सेमी बढ़कर 71.48 मीटर हो गया। जबकि डिघिया नाले पर रविवार को घाघरा का जलस्तर 70.61 मीटर दर्ज हुआ था जो सोमवार को एक सेमी बढ़कर 70.62 मीटर हो गया। बदरहुंआ नाले पर नदी का खतरा बिंदु 71.68 मीटर और डिघिया नाले पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर है। नदी ने महराजगंज विकास खंड के सेमरी गांव को अपने निशाने पर ले रखा है। नदी अब तक 59 घरों को अपनी धारा में बिलीन कर चुकी है। जिसमें 24 घंटे के अंदर चार घरों को नदी ने अपने आगोश में लिया है। जिसमें सुभाष, हरदेव आदि के आशियाने शामिल हैं। सेमरी गांव के केवट बस्ती का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। अब किसानों की 150 एकड़ कृषि योग्य भूमि को घाघरा काट चुकी है। लेखपाल अंकित राय ने बताया कि 37 घर और 150 एकड़ जमीन कट चुकी है। वहीं देवारा खास राजा खास गांव के त्रिलोकी का पुरा में भी कटान हो रही है। देवारा खास राजा के त्रिलोकी का पुरवा में सजगू का घर कट रहा है। रामप्रकाश, बहादुर आदि निशाने पर हैं। देवारा खास राजा गांव के प्रधान पल्टन यादव ने सभी 18 परिवारों को गांव में आरक्षित जमीन पर आवास बनाने के लिए जमीन आवंटित कर दिया है।
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विस्थापितों को है राहत सामग्री का इंतजार
लाटघाट। एक जुलाई को सरकार द्वारा सेमरी गांव में विस्थापितों को राहत सामग्री बांटी गई है। जिसमें उन्हें ढ़ाई किग्रा आलू, एक किग्रा दाल, पांच-पांच किग्रा आटा चावल, 500 ग्राम तेल, हल्दी, नमक, माचिस, मोमबत्ती का एक-एक पैकेट दिया गया। इसके बाद से कोई भी राहत सामग्री इन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनकी सुधि लेने के लिए कोई भी अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव में नहीं पहुंचा है।
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