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कौन बोल रहा सही, डाक्टरों की रिपोर्ट या पुलिस
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:56 AM IST
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आजमगढ़। देवगांव कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली आशा कार्यकत्री की हत्या का मामला और उलझता जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि कहने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं की गई। पीएम रिपोर्ट में गला दबाने से कार्यकत्री की मौत की बात कही गई थी। रेप का मामला स्पष्ट नहीं होने से आवश्यक वस्तुओं को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। पुलिस के अनुसार वहां पीएम रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। वहीं, घटना के 13वें दिन शुक्रवार को ग्राम प्रधान का चालान कर दिया गया। अब पुलिस का कहना है कि मामले का अदालत में ही निर्णय होगा। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में आशा कार्यकत्री की देर रात खेत में अस्त-व्यस्त हालत में लाश मिली थी। उसके कपड़े और मोबाइल एक ट्यूबवेल के पास रखा हुआ था। रेप के बाद हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर लाश को पीएम को भेजा गया था। हत्या के बाद से कई दिनों तक आशा कार्यकत्रियों के संगठन ने आंदोलन भी किया था। सीओ लालगंज सच्चिदानंद ने बताया कि पुलिस ने गुत्थी सुलझाने के लिए महिला के घरवालों की तरफ से बताए गए हर पहलुओं की गहनता से जांच पड़ताल की, लेकिन कोई स्पष्ट परिणाम नहीं निकल सका। ऐसे में घरवालों की निशानदेही पर ग्राम प्रधान अतीक को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि अतीक ने पुरानी रंजिश के चलते महिला की हत्याकर उसकी लाश फेंक दी थी। अतीक का चालान कर दिया गया है। अब उसका अदालत इसका फैसला करेगी। वहीं एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने को कहा था। इसके बावजूद डाक्टरों ने पीएम करते समय वीडियोग्राफी नहीं कराई। रिपोर्ट में चिकित्सकों ने गला दबाकर हत्या करने की पुष्टी की थी। रेप की पुष्टी नहीं होने पर कई सामानों और पीएम रिपोर्ट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। वहां पीएम रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। वीडियोग्राफी की रिकार्डिंग मांगी जा रही है। इसके न होने से मामला उलझता जा रहा है। कहने का बाद भी वीडियोग्राफी नहीं करना संदेह के दायरे में है। मामले की जांच की जा रही है।
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