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पुलिस वीरता पदक से डीआईजी हुए सम्मानित
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:12 AM IST
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आजमगढ़। पुलिस में अदम्य साहस एवं उच्चकोटि की वीरता प्रदर्शित करने वाले डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र विजय भूषण को वीरता पुलिस पदक से सम्मानित किए गए। गुरुवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रामनाईक ने यह पुरस्कार प्रदान किया। 12 वर्ष पूर्व एक लाख के इनामी अमित उर्फ सचिन पहाड़ी से हुई मुठभेड़ के लिए इनका चयन किया गया था। चौथी बार वीरता का पुलिस पदक मिलने से लोगों में हर्ष है।
गुरुवार को राज्यपाल के हाथों वीरता पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डीआईजी विजय भूषण ने जिस घटना के लिए उन्हें यह पुलिस का सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हुआ। उस घटना को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में वे एसटीएफ में अपर पुलिस अधीक्षक का पद पर थे। इस दौर में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश अमित उर्फ सचिन पहाड़ी का आतंक था। 20 मई 2006 को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि सचिन पहाड़ी अपने तीन साथियों के साथ दो बाइक पर सवार होकर त्रिवेणीनगर से सीतापुर जिले की ओर किसी घटना को अंजाम देने जा रहा है। सचिन को पकडने के लिए पुलिस की अलग-अलग दो टीमों का गठन किया गया। एक टीम का नेतृत्व तात्कालीन एसटीएफ प्रभारी एसके भगत और दूसरी टीम का नेतृत्व अपर पुलिस अधीक्षक विजय भूषण करते हुए उसे पकडने के लिए निकल पड़े। भिठौली तिराहे पर मोहिबुल्लापुर की ओर से दो बाइकों पर सवार चार लोग आते हुए दिखे। इन्हें रोका गया तो नहीं रुके और फायर कर भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए मुठभेड़ में सचिन पहाड़ी और उसके साथी विकास कन्नौजिया को ढेर कर दिया। इस मुठभेड़ के लिए अदम्य साहन एवं सूझबूझ और उच्चकोटि की वीरता प्रदर्शित करने के लिए विजय भूषण का चयन पुलिस के सबसे बड़े पुरस्कार वीरता पुलिस पदक के लिए चयन किया गया। जो गुरुवार को लखनऊ में राज्यपाल रामनाईक के हाथों दिया गया। डीआईजी विजय भूषण को कुल चार बार पुलिस वीरता पदक मिल चुका है।
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गुरुवार को राज्यपाल के हाथों वीरता पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डीआईजी विजय भूषण ने जिस घटना के लिए उन्हें यह पुलिस का सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हुआ। उस घटना को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में वे एसटीएफ में अपर पुलिस अधीक्षक का पद पर थे। इस दौर में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश अमित उर्फ सचिन पहाड़ी का आतंक था। 20 मई 2006 को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि सचिन पहाड़ी अपने तीन साथियों के साथ दो बाइक पर सवार होकर त्रिवेणीनगर से सीतापुर जिले की ओर किसी घटना को अंजाम देने जा रहा है। सचिन को पकडने के लिए पुलिस की अलग-अलग दो टीमों का गठन किया गया। एक टीम का नेतृत्व तात्कालीन एसटीएफ प्रभारी एसके भगत और दूसरी टीम का नेतृत्व अपर पुलिस अधीक्षक विजय भूषण करते हुए उसे पकडने के लिए निकल पड़े। भिठौली तिराहे पर मोहिबुल्लापुर की ओर से दो बाइकों पर सवार चार लोग आते हुए दिखे। इन्हें रोका गया तो नहीं रुके और फायर कर भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए मुठभेड़ में सचिन पहाड़ी और उसके साथी विकास कन्नौजिया को ढेर कर दिया। इस मुठभेड़ के लिए अदम्य साहन एवं सूझबूझ और उच्चकोटि की वीरता प्रदर्शित करने के लिए विजय भूषण का चयन पुलिस के सबसे बड़े पुरस्कार वीरता पुलिस पदक के लिए चयन किया गया। जो गुरुवार को लखनऊ में राज्यपाल रामनाईक के हाथों दिया गया। डीआईजी विजय भूषण को कुल चार बार पुलिस वीरता पदक मिल चुका है।
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