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ग्रीन बेल्ट में हो रहा निर्माण, एडीए ने साधा मौन
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नरौली के प्रतिबंधत क्षेत्र में अवैध रुप से चल रहा निर्माण कार्य।-प्लान खबर की फोटो
- फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कराने वालों पर एडीए सख्त है लेकिन ग्रीन बेल्ट जो प्रतिबंधित क्षेत्र है में हो रहे निर्माण पर मौन साधे बैठा है। जिसका परिणाम है कि नगर से सटे ग्रीन बेल्ट एरिया में तेजी से अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं।
एडीए की कार्यशैली हमेशा सवालों के घेरे में रहती है। एडीए के कर्मचारियों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो ग्रीन बेल्ट एरिया में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन नहीं होता। जबकि उक्त प्रतिष्ठानों को निर्माण शुरू होने के साथ ही एडीए ने रोका लेकिन विभाग के कर्मचारियों ने इसे रोका नहीं और निर्माण पूरा हो गया। ऐसे कई भवन है जिनका निर्माण पूरा होने के बाद उनमें व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरु हो गई हैं। एनजीटी की रोक के कारण एडीए सिधारी में अफोर्डेबल आवास का निर्माण नहीं कर सका। लेकिन इन क्षेत्रों में धड़ल्ले से निर्माण कराया जा रहा है और विभाग मौन साधे बैठा है। विभाग द्वारा आवासीय क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए हो रहे निर्माण को सील करने की कार्रवाई कर रहा है लेकिन ग्रीन बेल्ट में हो रहे निर्माण को रोकने में एडीए खुद को लाचार पा रहा है। विभाग द्वारा ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली जा रही है।
नदी के किनारे तक सटाकर बने हैं मकान
आजमगढ़। एडीए की सुस्ती का परिणाम है कि नगर क्षेत्र में नदी के किनारे तक सटाकर लोगों ने अपने मकान बना लिए हैं। कुछ लोगों ने नदी के किनारे तक बाउंड्रीवाल तक करा लिया है। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब तमसा सफाई अभियान चल रहा था। तत्कालीन डीएम ने नदी के किनारे तक सटाकर हुए इन निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था लेकिन अब तक सिर्फ कृष्णा कालेज को छोड़कर अब तक कहीं से ग्रीन बेल्ट में हुए अवैध निर्माणों को हटाया नहीं गया है।
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हमारे द्वारा नियमित अवैध रूप से हो रहे निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है। आज ही कुछ निर्माणों को चिन्हित किया गया है। जो भी मकान मिल रहे उन्हें नोटिस जारी करने के साथ ही उन्हें सील करने की कार्रवाई की जा रही है। अगर ग्रीन बेल्ट में कोई निर्माण हो रहा है उसे तत्काल रोका जाएगा। अगर नहीं मानता है तो उसे भी सील किया जाएगा।
बैजनाथ, एडीए सचिव
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एडीए की कार्यशैली हमेशा सवालों के घेरे में रहती है। एडीए के कर्मचारियों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो ग्रीन बेल्ट एरिया में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन नहीं होता। जबकि उक्त प्रतिष्ठानों को निर्माण शुरू होने के साथ ही एडीए ने रोका लेकिन विभाग के कर्मचारियों ने इसे रोका नहीं और निर्माण पूरा हो गया। ऐसे कई भवन है जिनका निर्माण पूरा होने के बाद उनमें व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरु हो गई हैं। एनजीटी की रोक के कारण एडीए सिधारी में अफोर्डेबल आवास का निर्माण नहीं कर सका। लेकिन इन क्षेत्रों में धड़ल्ले से निर्माण कराया जा रहा है और विभाग मौन साधे बैठा है। विभाग द्वारा आवासीय क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए हो रहे निर्माण को सील करने की कार्रवाई कर रहा है लेकिन ग्रीन बेल्ट में हो रहे निर्माण को रोकने में एडीए खुद को लाचार पा रहा है। विभाग द्वारा ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली जा रही है।
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नदी के किनारे तक सटाकर बने हैं मकान
आजमगढ़। एडीए की सुस्ती का परिणाम है कि नगर क्षेत्र में नदी के किनारे तक सटाकर लोगों ने अपने मकान बना लिए हैं। कुछ लोगों ने नदी के किनारे तक बाउंड्रीवाल तक करा लिया है। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब तमसा सफाई अभियान चल रहा था। तत्कालीन डीएम ने नदी के किनारे तक सटाकर हुए इन निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था लेकिन अब तक सिर्फ कृष्णा कालेज को छोड़कर अब तक कहीं से ग्रीन बेल्ट में हुए अवैध निर्माणों को हटाया नहीं गया है।
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हमारे द्वारा नियमित अवैध रूप से हो रहे निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है। आज ही कुछ निर्माणों को चिन्हित किया गया है। जो भी मकान मिल रहे उन्हें नोटिस जारी करने के साथ ही उन्हें सील करने की कार्रवाई की जा रही है। अगर ग्रीन बेल्ट में कोई निर्माण हो रहा है उसे तत्काल रोका जाएगा। अगर नहीं मानता है तो उसे भी सील किया जाएगा।
बैजनाथ, एडीए सचिव