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Azamgarh News: राजकीय मेडिकल कॉलेज में निर्धारित रेट से कम मूल्य पर निविदा खोलने की शिकायत, शुरू हुई जांच
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राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं सुपर फैसिलिटी हॉस्पिटल, चक्रपानपुर में मरीजों एवं उनके तीमारदारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जारी निविदा को लेकर शिकायत सामने आई है।
शिकायतकर्ता महेश सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जेम पोर्टल पर प्रकाशित रोगी आहार सेवा की निविदा में नियमों एवं शर्तों में बदलाव कर एक पसंदीदा फर्म को लाभ पहुंचाया गया है।
महेश सिंह ने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों की अनदेखी की गई और मैसर्स रॉयल स्वीट हाउस एंड रेस्टोरेंट को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि निविदा में विभिन्न प्रकार की डाइट की दरों से संबंधित शर्तों में विरोधाभास था और कम दर पर निविदा स्वीकार कर संबंधित फर्म को लाभ पहुंचाया गया। इस शिकायत पर मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त प्रशासन को जांच के निर्देश दिए। अपर आयुक्त प्रशासन ने इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से आख्या मांगी।
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अभी कार्यादेश जारी नहीं
मेडिकल कॉलेज ने अपनी आख्या में बताया कि निविदा का मूल्य निर्धारित वित्तीय सीमा से अधिक होने के कारण पूरी पत्रावली अंतिम निर्णय एवं अनुमोदन के लिए महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को भेजी गई है। आख्या में कहा गया है कि संबंधित प्रतिष्ठान को अभी कोई कार्य संचालन आदेश/कार्यादेश जारी नहीं किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शिकायतकर्ता के तथ्यों को छिपाने के आरोप को भी खारिज किया है।
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यह है आदेश
डायरेक्टर, नेशनल हेल्थ मिशन, उत्तर प्रदेश ने 25 मई 2025 को आदेश जारी कर 135 रुपये प्रति डाइट की दर निर्धारित की थी। इसके बावजूद 134.20 रुपये की निविदा को एल-1 अवार्ड किया गया। यह निविदा तीन वर्ष के लिए है और इसका मूल्य 103328580 रुपये है। इस पूरे प्रकरण में अब शासन स्तर से निर्णय और निविदा प्रक्रिया की जांच पर नजर बनी हुई है।
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एक व्यक्ति द्वारा शिकायत की गई थी। इस शिकायत की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इसमें कुछ कहा जा सकता है। -प्रमोद कुमार पांडेय, अपर आयुक्त प्रशासन।
00 वर्जन
जो बिड खोली गई थी, उसमें शासन ने 135 रुपये रेट तो फिक्स कर दिया, लेकिन फ्लोटिंग रेट की जगह को खाली छोड़ दिया। निविदा जब पड़ी, तो उसने उसे कम दर पर उठा लिया है। इसकी फाइनेंशियल टीम ने उसे ओके किया, तो हमने आगे बढ़ाया। हमने कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई और अपनी रिपोर्ट सौंप दी। अब शासन स्तर से डीडी के पास फिर इसकी जांच आई है। वहीं चल रही है। यह कुछ नहीं, बल्कि कुछ लोगों की ओर से हमें बदनाम करने की साजिश है। -डॉ. बीडी सिंह, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, चक्रपानपुर।
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शिकायतकर्ता महेश सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जेम पोर्टल पर प्रकाशित रोगी आहार सेवा की निविदा में नियमों एवं शर्तों में बदलाव कर एक पसंदीदा फर्म को लाभ पहुंचाया गया है।
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महेश सिंह ने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों की अनदेखी की गई और मैसर्स रॉयल स्वीट हाउस एंड रेस्टोरेंट को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि निविदा में विभिन्न प्रकार की डाइट की दरों से संबंधित शर्तों में विरोधाभास था और कम दर पर निविदा स्वीकार कर संबंधित फर्म को लाभ पहुंचाया गया। इस शिकायत पर मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त प्रशासन को जांच के निर्देश दिए। अपर आयुक्त प्रशासन ने इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से आख्या मांगी।
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अभी कार्यादेश जारी नहीं
मेडिकल कॉलेज ने अपनी आख्या में बताया कि निविदा का मूल्य निर्धारित वित्तीय सीमा से अधिक होने के कारण पूरी पत्रावली अंतिम निर्णय एवं अनुमोदन के लिए महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को भेजी गई है। आख्या में कहा गया है कि संबंधित प्रतिष्ठान को अभी कोई कार्य संचालन आदेश/कार्यादेश जारी नहीं किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शिकायतकर्ता के तथ्यों को छिपाने के आरोप को भी खारिज किया है।
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यह है आदेश
डायरेक्टर, नेशनल हेल्थ मिशन, उत्तर प्रदेश ने 25 मई 2025 को आदेश जारी कर 135 रुपये प्रति डाइट की दर निर्धारित की थी। इसके बावजूद 134.20 रुपये की निविदा को एल-1 अवार्ड किया गया। यह निविदा तीन वर्ष के लिए है और इसका मूल्य 103328580 रुपये है। इस पूरे प्रकरण में अब शासन स्तर से निर्णय और निविदा प्रक्रिया की जांच पर नजर बनी हुई है।
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एक व्यक्ति द्वारा शिकायत की गई थी। इस शिकायत की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इसमें कुछ कहा जा सकता है। -प्रमोद कुमार पांडेय, अपर आयुक्त प्रशासन।
00 वर्जन
जो बिड खोली गई थी, उसमें शासन ने 135 रुपये रेट तो फिक्स कर दिया, लेकिन फ्लोटिंग रेट की जगह को खाली छोड़ दिया। निविदा जब पड़ी, तो उसने उसे कम दर पर उठा लिया है। इसकी फाइनेंशियल टीम ने उसे ओके किया, तो हमने आगे बढ़ाया। हमने कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई और अपनी रिपोर्ट सौंप दी। अब शासन स्तर से डीडी के पास फिर इसकी जांच आई है। वहीं चल रही है। यह कुछ नहीं, बल्कि कुछ लोगों की ओर से हमें बदनाम करने की साजिश है। -डॉ. बीडी सिंह, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, चक्रपानपुर।