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सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए बसपा से गठबंधन
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 11 Feb 2017 11:03 PM IST
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सिधारी स्थित एक होटल में प्रेस वार्ता को संबोधित करते ओलमा कौंउसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ताहीर मदनी।
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आजमगढ़। सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए बसपा के साथ राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल का गठबंधन हुआ है। उलेमा काउंसिल बसपा को बाहर से समर्थन देगी। ये बातें शनिवार को सिधारी स्थित एक होटल में पत्रकारों से राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के महासचिव मौलाना ताहिर मदनी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को पनपने न देने को लेकर उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी और बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के बीच सहमति बनी है। इसी को लेकर बसपा से उलेमा काउंसिल का गठबंधन हुआ है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार बनने पर मायावती अपने वादे को जरूर निभाएंगी। इस दौरान बसपा के पूर्व सांसद डा. बलिराम ने कहा कि देश के हालात बहुत ही खराब हैं।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को सफल नहीं होने देना हमारा मकसद है। भाजपा का राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बाद भी वह आरक्षण को समाप्त करने की बात कर रही है, अगर बहुमत मिल गया तो स्थिति खराब हो सकती है। सांप्रदायिकता और गुंडागर्दी को रोकना हमारा लक्ष्य है। इस मौके पर बलिहारी बाबू, जिलाध्यक्ष सुनील कुमार, उलेमा काउंसिल के जिलाध्यक्ष हाजी शकील अहमद आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को पनपने न देने को लेकर उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी और बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के बीच सहमति बनी है। इसी को लेकर बसपा से उलेमा काउंसिल का गठबंधन हुआ है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार बनने पर मायावती अपने वादे को जरूर निभाएंगी। इस दौरान बसपा के पूर्व सांसद डा. बलिराम ने कहा कि देश के हालात बहुत ही खराब हैं।
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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को सफल नहीं होने देना हमारा मकसद है। भाजपा का राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बाद भी वह आरक्षण को समाप्त करने की बात कर रही है, अगर बहुमत मिल गया तो स्थिति खराब हो सकती है। सांप्रदायिकता और गुंडागर्दी को रोकना हमारा लक्ष्य है। इस मौके पर बलिहारी बाबू, जिलाध्यक्ष सुनील कुमार, उलेमा काउंसिल के जिलाध्यक्ष हाजी शकील अहमद आदि उपस्थित रहे।
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