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आईटी हब के रूप में विकसित हो आजमगढ़
भारतेंदु मिश्र, आजमगढ़
Updated Sat, 31 Jan 2015 12:01 AM IST
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मैं अपने गृह जनपद आजमगढ़ को आईटी हब के रूप में विकसित करना चाहता हूं ताकि शिक्षा के बाद बेरोजगारों को नौकरी मिल सके। इस संबंध में शीघ्र केंद्र और राज्य सरकार से बातचीत करूंगा।
सरकार का साथ मिला तो मैं निवेश के लिए तैयार हूं। ये बातें शुक्रवार को अमेरिकी उद्योगपति, एफआई इन्वेस्टमेंट ग्रुप के सीईओ और मार्टिन लूथर किंग जूनियर पुरस्कार से सम्मानित फ्रैंक इस्लाम ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहीं।
जिले के सरायमीर क्षेत्र के कौरा गहनी गांव के मूल निवासी फ्रैंक इस्लाम ने बताया कि आजमगढ़ में टेक्निकल कालेज की स्थापना की जाएगी, जहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले नौजवानों को रोजगार मिल सकेगा।
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आने वाले दिनों में सूचना प्रौद्योगिकी ही विकास की बुनियाद होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आज के दौर में बिना संघर्ष कुछ भी पाना संभव नहीं है। आज मैं सफल हूं, लेकिन मेरे संघर्षों को चंद दोस्त ही जानते हैं। जब मैं अमेरिका गया तब मेरे दोस्तों ने एकत्र करके मुझे पांच हजार रुपये दिए थे।
मैंने अपने संघर्षों की दास्तां स्वरचित पुस्तक ‘अमेरिकन ड्रीम’ में लिखी है। फ्रैं क ने कहा कि मुझे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि मैं एक उद्यमी हूं। उन्होंने अपनी उम्र का भी हवाला दिया।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में फ्रैंक इस्लाम ने कहा कि ओबामा और मोदी के आपसी तालमेल से लग रहा है कि ओबामा भारत में कुछ बेहतर करने वाले हैं, लेकिन यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर अभी ऐसा नहीं है, जिस पर बाहर की कंपनियां यहां आकर कुछ कर सकें । प्रधानमंत्री और ओबामा के बीच बातचीत में तय हुआ है कि नरेंद्र मोदी प्लेटफार्म देंगे और अमेरिकन कंपनियां यहां इन्वेस्टमेंट करेंगी।
फ्रैंक ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में सरकार नहीं बल्कि कंपनियां इन्वेस्टमेंट करती हैं। हां, अगर भारत में बेहतर प्लेटफार्म मिलता है तो अमेरिकी उद्यमियों को यहां इन्वेस्टमेंट के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘धर्म के नाम पर भारत न बंटे’ वाले बयान की बाबत फ्रैंक ने कहा कि ओबामा के आने से पूर्व उनकी सुरक्षा के लिए काम करने वाली एजेंसियां भारत आ गई थीं।
ये लोग ओबामा को एक-एक पल की सूचना दे रहे थे। इसी क्रम मेें उन्हें कोई ऐसी सूचना मिली होगी या कुछ लगा होगा, इस कारण उन्होंने यह बात कही।
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सरकार का साथ मिला तो मैं निवेश के लिए तैयार हूं। ये बातें शुक्रवार को अमेरिकी उद्योगपति, एफआई इन्वेस्टमेंट ग्रुप के सीईओ और मार्टिन लूथर किंग जूनियर पुरस्कार से सम्मानित फ्रैंक इस्लाम ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहीं।
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जिले के सरायमीर क्षेत्र के कौरा गहनी गांव के मूल निवासी फ्रैंक इस्लाम ने बताया कि आजमगढ़ में टेक्निकल कालेज की स्थापना की जाएगी, जहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले नौजवानों को रोजगार मिल सकेगा।
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आने वाले दिनों में सूचना प्रौद्योगिकी ही विकास की बुनियाद होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आज के दौर में बिना संघर्ष कुछ भी पाना संभव नहीं है। आज मैं सफल हूं, लेकिन मेरे संघर्षों को चंद दोस्त ही जानते हैं। जब मैं अमेरिका गया तब मेरे दोस्तों ने एकत्र करके मुझे पांच हजार रुपये दिए थे।
मैंने अपने संघर्षों की दास्तां स्वरचित पुस्तक ‘अमेरिकन ड्रीम’ में लिखी है। फ्रैं क ने कहा कि मुझे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि मैं एक उद्यमी हूं। उन्होंने अपनी उम्र का भी हवाला दिया।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में फ्रैंक इस्लाम ने कहा कि ओबामा और मोदी के आपसी तालमेल से लग रहा है कि ओबामा भारत में कुछ बेहतर करने वाले हैं, लेकिन यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर अभी ऐसा नहीं है, जिस पर बाहर की कंपनियां यहां आकर कुछ कर सकें । प्रधानमंत्री और ओबामा के बीच बातचीत में तय हुआ है कि नरेंद्र मोदी प्लेटफार्म देंगे और अमेरिकन कंपनियां यहां इन्वेस्टमेंट करेंगी।
फ्रैंक ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में सरकार नहीं बल्कि कंपनियां इन्वेस्टमेंट करती हैं। हां, अगर भारत में बेहतर प्लेटफार्म मिलता है तो अमेरिकी उद्यमियों को यहां इन्वेस्टमेंट के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘धर्म के नाम पर भारत न बंटे’ वाले बयान की बाबत फ्रैंक ने कहा कि ओबामा के आने से पूर्व उनकी सुरक्षा के लिए काम करने वाली एजेंसियां भारत आ गई थीं।
ये लोग ओबामा को एक-एक पल की सूचना दे रहे थे। इसी क्रम मेें उन्हें कोई ऐसी सूचना मिली होगी या कुछ लगा होगा, इस कारण उन्होंने यह बात कही।