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फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेन्टर को स्वीकृति
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शहर के सिधारी स्थित कृषि भवन परिसर में आयोजित कृषि मेले को संबोधित करते डीएम एनपी सिंह।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। डीएम एनपी सिंह ने सिधारी स्थित कृषि भवन में बुधवार को आयोजित प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेन्ट ऑफ क्राप रेजीड्यू योजनान्तर्गत एक दिवसीय जनपदीय फसल अवशेष प्रबन्धन कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस दौरान डीएम ने फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना की स्वीकृति भी दी। फार्म मशीनरी बैंक के अंतर्गत चार ट्रैक्टर एफपीओ (फूड प्रोड्यूजर आर्गेनाइजेशन) को और 25 ट्रैक्टर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत ग्राम संगठन को दिया गया। कस्टम हायरिंग सेंटर के अन्तर्गत 29 ट्रैक्टर किसानों को दिए गए।
डीएम ने प्रतीकात्मक रूप से फार्म मशीनरी बैंक के अन्तर्गत आदर्श प्रेरणा महिला संगठन बिलरियागंज की अध्यक्ष ललिमा, उजाला प्रेरणा महिला संगठन बिलरियागंज की अध्यक्ष ममता, आंचल प्रेरणा महिला संगठन ठेकमा की अध्यक्ष संजू, एकता प्रेरणा महिला संगठन मार्टीनगंज की अध्यक्ष पूनम को ट्रैक्टर की चाभी और प्रमाण-पत्र प्रदान किया। डीएम ने बताया कि ट्रैक्टर की परियोजना लागत 15 लाख है। इसमें अनुदान की धनराशि 12 लाख और ग्राम संगठन का अंश तीन लाख है। उक्त महिला संगठन ट्रैक्टर का उपयोग खेती के लिए अपने संगठनों के सदस्यों को न्यूनतम किराए पर देगा। सदस्यों के अलावा भी अन्य किसानों पर किराए पर दिया जाएगा। जो किराए की धनराशि प्राप्त होगी उस धनराशि को संगठन के खाते में जमा किया जाएगा। कृषि यंत्रों को दिए जाने का उद्देश्य आजीविका मिशन के अन्तर्गत संचालित संगठनों स्वावलंबी करना है।
रासायनिक खादों से बनाएं दूरी, जैविक का करें प्रयोग
आजमगढ़। डीएम नेेकहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो गई है। हमें खेती के साथ-साथ जानवरों को भी रखने की जरूरत है। मवेशियों से हमें दूध मिलेगा तथा साथ ही गोबर भी प्राप्त होगा। गोबर से जीवामृत और गाय के गोमूत्र से बीजामृत बनाकर बीजों का शोधन कर सकते हैं। ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ठोस तथा तरल अपशिष्ट से भी खाद बनाया जा सकता है। नाडेप तथा वर्मी कम्पोस्ट भी बनाने की आवश्यकता है, इससे हमारी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी तथा ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती को बढ़ावा दें। पराली न जलाएं उससे खाद बनाएं। इस मौके पर संयुक्त कृषि निदेशक सुरेश कजुमार सिंह, डीडी कृषि आरके मौर्य, एसडीएम सदर प्रशान्त कुमार नायक, जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केन्द्र डॉ. आरके सिंह उपस्थित रहे।
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डीएम ने प्रतीकात्मक रूप से फार्म मशीनरी बैंक के अन्तर्गत आदर्श प्रेरणा महिला संगठन बिलरियागंज की अध्यक्ष ललिमा, उजाला प्रेरणा महिला संगठन बिलरियागंज की अध्यक्ष ममता, आंचल प्रेरणा महिला संगठन ठेकमा की अध्यक्ष संजू, एकता प्रेरणा महिला संगठन मार्टीनगंज की अध्यक्ष पूनम को ट्रैक्टर की चाभी और प्रमाण-पत्र प्रदान किया। डीएम ने बताया कि ट्रैक्टर की परियोजना लागत 15 लाख है। इसमें अनुदान की धनराशि 12 लाख और ग्राम संगठन का अंश तीन लाख है। उक्त महिला संगठन ट्रैक्टर का उपयोग खेती के लिए अपने संगठनों के सदस्यों को न्यूनतम किराए पर देगा। सदस्यों के अलावा भी अन्य किसानों पर किराए पर दिया जाएगा। जो किराए की धनराशि प्राप्त होगी उस धनराशि को संगठन के खाते में जमा किया जाएगा। कृषि यंत्रों को दिए जाने का उद्देश्य आजीविका मिशन के अन्तर्गत संचालित संगठनों स्वावलंबी करना है।
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रासायनिक खादों से बनाएं दूरी, जैविक का करें प्रयोग
आजमगढ़। डीएम नेेकहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो गई है। हमें खेती के साथ-साथ जानवरों को भी रखने की जरूरत है। मवेशियों से हमें दूध मिलेगा तथा साथ ही गोबर भी प्राप्त होगा। गोबर से जीवामृत और गाय के गोमूत्र से बीजामृत बनाकर बीजों का शोधन कर सकते हैं। ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ठोस तथा तरल अपशिष्ट से भी खाद बनाया जा सकता है। नाडेप तथा वर्मी कम्पोस्ट भी बनाने की आवश्यकता है, इससे हमारी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी तथा ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती को बढ़ावा दें। पराली न जलाएं उससे खाद बनाएं। इस मौके पर संयुक्त कृषि निदेशक सुरेश कजुमार सिंह, डीडी कृषि आरके मौर्य, एसडीएम सदर प्रशान्त कुमार नायक, जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केन्द्र डॉ. आरके सिंह उपस्थित रहे।
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