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ऐ दिल आ कहीं और चले...
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 13 Feb 2016 11:44 PM IST
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सूत्रधार संस्थान द्वारा आयोजित 11वें आजमगढ़ रंग महोत्सव 'आरंगम् 2015-16 के दूसरे चरण नुक्कड़ नुक्कड़ पर का शुभारंभ शनिवार को हुआ। पहले दिन कलाकारों ने रैदोपुर में कालीचौरा और रैदोपुर चौराहा पर नटखट नाट्य टोली की प्रस्तुति 'ऐ दिल आ कहीं और चले से किया।
कलाकारों ने नाटक के माध्यम से आज के सामाजिक ढांचे पर प्रहार किया। जितनी ही तेजी से हमारा देश आधुनिकीकरण द्वारा प्रगति कर रहा है, उतनी ही तेजी से हम अपनी लोक कला और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं।
नाटक के माध्यम से युवाओं की सोच को प्रदर्शित किया कि कैसे आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और टेलीविजन के बढ़ते क्रेज के दलदल में फंसकर वास्तविक दुनिया से दूर होती जा रही है। ना तो उसके पास अपने सोच बची है और ना किसी चीज को समझने की शक्ति। वह केवल फेसबुक ट्वीटर, वाट्सअप इत्यादि पर निर्भर होकर रही गई है। नाटक में रंगमंच के पहलुओं को बताया भी गया कि कैसे रंगमंच जीवन से आता है और जीवन को जोड़ता हैं और जीवन को सार्थक करने का संदेश देता है।
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रंगमंच सवाल भी पैदा करता हैं। साथ ही समाधान भी पेश करता है। नाटक के माध्यम से भोजपुरी भाषा अवनमन पर भी सवाल उठाया गया। साथ ही ये भी बताया गया कि कैसे मनोरंजन के नाम पर हमारी संस्कृति हमारी बोली को गंदा किया जा रहा है। नाटक का निर्देशन नवीन कुमार तथा लेखन सुजीत अस्थाना ने किया।
नाटक के कलाकारों में नवीन कुमार, सुजीत अस्थाना, हरिकेश मौर्य, विवेक सिंह, रितेश अस्थाना, रामजनम चतुर्वेदी, विरेंद्र ने बढिय़ा अभिनय किया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सीके त्यागी, अभिषेक पंडित आदि मौजूद रहे। आरंगम् की संयोजक ममता पंडित ने 14 फरवरी को मातबरगंज और नगरपालिका पर नाटक की प्रस्तुति होगी।
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कलाकारों ने नाटक के माध्यम से आज के सामाजिक ढांचे पर प्रहार किया। जितनी ही तेजी से हमारा देश आधुनिकीकरण द्वारा प्रगति कर रहा है, उतनी ही तेजी से हम अपनी लोक कला और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं।
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नाटक के माध्यम से युवाओं की सोच को प्रदर्शित किया कि कैसे आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और टेलीविजन के बढ़ते क्रेज के दलदल में फंसकर वास्तविक दुनिया से दूर होती जा रही है। ना तो उसके पास अपने सोच बची है और ना किसी चीज को समझने की शक्ति। वह केवल फेसबुक ट्वीटर, वाट्सअप इत्यादि पर निर्भर होकर रही गई है। नाटक में रंगमंच के पहलुओं को बताया भी गया कि कैसे रंगमंच जीवन से आता है और जीवन को जोड़ता हैं और जीवन को सार्थक करने का संदेश देता है।
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रंगमंच सवाल भी पैदा करता हैं। साथ ही समाधान भी पेश करता है। नाटक के माध्यम से भोजपुरी भाषा अवनमन पर भी सवाल उठाया गया। साथ ही ये भी बताया गया कि कैसे मनोरंजन के नाम पर हमारी संस्कृति हमारी बोली को गंदा किया जा रहा है। नाटक का निर्देशन नवीन कुमार तथा लेखन सुजीत अस्थाना ने किया।
नाटक के कलाकारों में नवीन कुमार, सुजीत अस्थाना, हरिकेश मौर्य, विवेक सिंह, रितेश अस्थाना, रामजनम चतुर्वेदी, विरेंद्र ने बढिय़ा अभिनय किया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सीके त्यागी, अभिषेक पंडित आदि मौजूद रहे। आरंगम् की संयोजक ममता पंडित ने 14 फरवरी को मातबरगंज और नगरपालिका पर नाटक की प्रस्तुति होगी।