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नदी में प्रदूषण के चलते पानी में रहने वाले जीवों पर भी मंड़राया खतरा
Updated Sun, 25 Feb 2018 12:08 AM IST
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आजमगढ़। विगत कई वर्षों से मौसम में बदलाव के कारण जनपद में भी बारिश बहुत ही कम हुई है। जिसके कारण नगर की जीवनदायिनी तमसा के अस्तित्व पर भी संकट उत्पन्न हो गया है। नदी में पानी की कमी के कारण इसका प्रवाह कम हुआ है और प्रदूषण काफी बढ़ गया है। जिसके कारण इसमें रहने वाले जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा बन गया है।
केंद्र सरकार की ओर से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। लेकिन जनपद से होकर बहने वाली एक मात्र नदी तमसा की सफाई के लिए आज तक किसी सरकार में बजट जारी नहीं हुआ। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो तमसा के अलावा जिले में छोटी बड़ी मिलाकर लगभग 15 नदियां बहती हैं। लेकिन आज तक इन नदियों की साफ-सफाई के लिए किसी सरकार में कोई बजट नहीं आया। सरकारों की उदासीनता के कारण तमसा आज अंतिम सांसे गिन रही है। मौसम में बदलाव के कारण इसके जलस्तर में काफी कमी हुई। नदी अपने पुराने अस्तित्व को छोड़कर नाले के रूप में गंदगी को ढ़ो रही है। बाराबंकी के तमसा ताल से निकलकर जनपद तक पहुंचने में नदी में कई फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी इसमें बहता है। इतना नहीं इसके किनारे बसी बड़ी बाजारों और नगरों से निकलने वाला लाखों लीटर पानी इसमें प्रवाहित होकर इसके जल को प्रदूषित कर रहा है। जिसके कारण नदी में रहने वाले जल जीवों की प्रजनन क्षमता कम हुई है। क्योंकि केमिकल से होने वाले बदलाव में इन जीवों को अपनी पूरी सामर्थ्य लगानी पड़ती है। लोगों की मानें तो इसके लिए सबसे पहले आम लोगों को जागरूक करना होगा। ताकि लोग नदी में खुद द्वारा फेंके जाने वाली गंदगी को न फेंके।
लोगों में जागरूकता की कमी है जिसके कारण पूजा करने के बाद लोग पालीथिन को नदी में ही फेंक देते हैं। हम इसके लिए सिर्फ सरकार को ही दोष नहीं दे सकते। नदी में जाने वाले केमिकल युक्त पानी से सबसे बड़ा बदलाव जलीय जीवों के हार्मोन पर पड़ता है। जिसके कारण इनकी प्रजनन क्षमता कम होती है। कई प्रजातियां विलुप्त भी हो जाती हैं। इसलिए नगरों से निकलने वाले पानी को रिफलिंग करके ही नदी में छोड़ा जाना चाहिए।
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डा. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, प्रवक्ता डीएवीपीजी कालेज।
नदी में गिरने वाले नाले और फैक्ट्रियों से गिरने वाले केमिकल युक्त पानी से नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। जिसके कारण नदी के जीवों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही है। इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से अच्छा है कि सबसे पहले हम जागरूक हों और नदियों में खुद द्वारा फेंके जा रहे कूड़े पर लगाम लगाएं। जब सब लोग इसके प्रति जागरूक होंगे तो नदियों का प्रदूषण काफी हद तक कम हो जाएगा।
डा. अखिलेश सिंह, पर्यावरणविद।
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केंद्र सरकार की ओर से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। लेकिन जनपद से होकर बहने वाली एक मात्र नदी तमसा की सफाई के लिए आज तक किसी सरकार में बजट जारी नहीं हुआ। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो तमसा के अलावा जिले में छोटी बड़ी मिलाकर लगभग 15 नदियां बहती हैं। लेकिन आज तक इन नदियों की साफ-सफाई के लिए किसी सरकार में कोई बजट नहीं आया। सरकारों की उदासीनता के कारण तमसा आज अंतिम सांसे गिन रही है। मौसम में बदलाव के कारण इसके जलस्तर में काफी कमी हुई। नदी अपने पुराने अस्तित्व को छोड़कर नाले के रूप में गंदगी को ढ़ो रही है। बाराबंकी के तमसा ताल से निकलकर जनपद तक पहुंचने में नदी में कई फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी इसमें बहता है। इतना नहीं इसके किनारे बसी बड़ी बाजारों और नगरों से निकलने वाला लाखों लीटर पानी इसमें प्रवाहित होकर इसके जल को प्रदूषित कर रहा है। जिसके कारण नदी में रहने वाले जल जीवों की प्रजनन क्षमता कम हुई है। क्योंकि केमिकल से होने वाले बदलाव में इन जीवों को अपनी पूरी सामर्थ्य लगानी पड़ती है। लोगों की मानें तो इसके लिए सबसे पहले आम लोगों को जागरूक करना होगा। ताकि लोग नदी में खुद द्वारा फेंके जाने वाली गंदगी को न फेंके।
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लोगों में जागरूकता की कमी है जिसके कारण पूजा करने के बाद लोग पालीथिन को नदी में ही फेंक देते हैं। हम इसके लिए सिर्फ सरकार को ही दोष नहीं दे सकते। नदी में जाने वाले केमिकल युक्त पानी से सबसे बड़ा बदलाव जलीय जीवों के हार्मोन पर पड़ता है। जिसके कारण इनकी प्रजनन क्षमता कम होती है। कई प्रजातियां विलुप्त भी हो जाती हैं। इसलिए नगरों से निकलने वाले पानी को रिफलिंग करके ही नदी में छोड़ा जाना चाहिए।
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डा. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, प्रवक्ता डीएवीपीजी कालेज।
नदी में गिरने वाले नाले और फैक्ट्रियों से गिरने वाले केमिकल युक्त पानी से नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। जिसके कारण नदी के जीवों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही है। इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से अच्छा है कि सबसे पहले हम जागरूक हों और नदियों में खुद द्वारा फेंके जा रहे कूड़े पर लगाम लगाएं। जब सब लोग इसके प्रति जागरूक होंगे तो नदियों का प्रदूषण काफी हद तक कम हो जाएगा।
डा. अखिलेश सिंह, पर्यावरणविद।