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संगोष्ठी के रुप में मनाई गई मिश्र की जयंती
Updated Fri, 22 Dec 2017 11:45 PM IST
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आजमगढ़। लोक मनीषा परिषद के तत्वाधान में गुरुवार को पंड़ित लक्ष्मीनारायण मिश्र की जंयती अमरनाथ तिवारी की अध्यक्षता में मडय़ा ङ्क्षस्थत उनके आवास पर संगोष्ठी के रुप में मनाई गई।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए डीएवी पीजी कालेज की प्रोफेसर एवं हिन्दी के विभागाध्यक्ष डा. गीता सिंह ने उनके साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्होंने साहित्य के गद्य और पद्य दोनों ही विद्याओं का सृजन किया। उन पर प्राश्चात्य नाटक कार इंसन, शा, मैटर लिंक आदि का प्रभाव था। इसके बावजूद भी उनकी लेखनी में भारत की आत्मा बसती थी। वशिष्ट अतिथि डा.अखिलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित लक्ष्मीनारायण मिश्र ने 18 वर्ष की अवस्था से ही साहित्य सृजन करना प्रारंभ कर दिये थे। उनकी पहली काव्य रचना अन्तर्जगत है। इसके बाद उन्होंने नाटक लिखा। अशोक उनका पहला नाटक है। मिश्र के ऐतिहासिक एवं पौराणिक नाटक मुख्यत: हिन्दू संस्कृति विचारधारा पर आधारित हैं। हिन्दी नाटककारों में उनका प्रमुख स्थान है। संगोष्ठी में पंडित अमरनाथ तिवारी, पंडित जनमेजय पाठक ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर मुकुन्द दुबे, मनोहर अष्ठाना, रविन्द्र त्रिपाठी, सुधांशु त्रिपाठी, श्यामबिहारी राय, निथिश रंजन तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए डीएवी पीजी कालेज की प्रोफेसर एवं हिन्दी के विभागाध्यक्ष डा. गीता सिंह ने उनके साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्होंने साहित्य के गद्य और पद्य दोनों ही विद्याओं का सृजन किया। उन पर प्राश्चात्य नाटक कार इंसन, शा, मैटर लिंक आदि का प्रभाव था। इसके बावजूद भी उनकी लेखनी में भारत की आत्मा बसती थी। वशिष्ट अतिथि डा.अखिलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित लक्ष्मीनारायण मिश्र ने 18 वर्ष की अवस्था से ही साहित्य सृजन करना प्रारंभ कर दिये थे। उनकी पहली काव्य रचना अन्तर्जगत है। इसके बाद उन्होंने नाटक लिखा। अशोक उनका पहला नाटक है। मिश्र के ऐतिहासिक एवं पौराणिक नाटक मुख्यत: हिन्दू संस्कृति विचारधारा पर आधारित हैं। हिन्दी नाटककारों में उनका प्रमुख स्थान है। संगोष्ठी में पंडित अमरनाथ तिवारी, पंडित जनमेजय पाठक ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर मुकुन्द दुबे, मनोहर अष्ठाना, रविन्द्र त्रिपाठी, सुधांशु त्रिपाठी, श्यामबिहारी राय, निथिश रंजन तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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