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नियुक्ति को लेकर जांच के घेरे में पंचायती राज विभाग, डीपीआरओ को खिलाफ वारंट
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:20 AM IST
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वर्ष 2008-09 में हुई नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जिला पंचायती राज विभाग इन दिनों जांच के घेरे में है। मामले में हाईकोर्ट ने जहां डीपीआरओ के खिलाफ वारंट जारी किया है। वहीं डीपीआरओ ने संबंधित पटल सहायाक के निलंबन की संस्तुति कर दी है। वहीं, प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग की ओर से भी डीएम से मामले में जानकारी तलब की गई है। नियुक्ति संबंधी दस्तावेज विभाग से गायब हैं। मामले में तत्कालीन डीपीआरओ पर फंदा कसता दिखाई दे रहा है।
पंचायती राज विभाग में वर्ष 2008-09 में सफाईकर्मियों की नियुक्ति हुई थी। इस दौरान अमरजीत नाम से दो लोगों ने आवेदन किया था। दोनों को एक ही अनुक्रमांक जारी कर दिया गया। मामला सही करने के लिए विभाग ने बाद में इसे ए और बी में डिफाइन कर दिया। विभाग की ओर से अमरजीत बी तो तैनाती दे दी गई। इस बीच अमरजीत-ए ये कहते हुए हाईकोर्ट में वाद दाखिल कर दिया कि परीक्षा को उसने ही पास किया था। इसके बाद भी तैनाती किसी और को दे दी गई। पूर्व में विभाग की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखा गया था कि अमरजीत-ए ने परीक्षा ही नहीं दी थी। विभाग के पास उससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। उधर अमरजीत-ए ने संबंधित दस्तावेज कोर्ट में पेश कर दिए। दो जुलाई को हाईकोर्ट में डीपीआरओ की पेशी थी। पेश नहीं होने पर डीपीआरओ के खिलाफ अदालत ने वारंट जारी कर दिया।
पेशी का जानकारी और संबंधित फाइल समय पर पेश नहीं करने के आरोप में वर्तमान डीपीआरओ आनंद प्रकाश ने संबंधित बाबू के निलंबन की संतुति डीडीओ से करप दी है। हालांकि संबंधित बाबू का कहना है कि उसने उक्त मामले की मौखिक जानकारी के साथ ही पत्र की फोटोकापी कराकर भी डीपीआरओ को सौंप दी थी। उधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है। उस समय की फाइलें तलाशी जा रही हैं तो अमरजीत से संबंधित रिकार्ड गायब हैं। प्रकरण में तत्कालीन डीपीआरओ परवेज आलम खां पर शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है। फिलहाल हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को लगी है। विभाग की ओर से अफना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है।
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डीपीआरओ का कहना है कि बाबू ने उन्हें मुकदमे के बारे में जानकारी नहीं दी। इसके कारण वह नीयत तिथि पर हाईकोर्ट में उपलब्ध नहीं हो सके। उनके नाम से वारंट जारी हो गया। बाबू का कहना है कि उसने सूचना दी थी। फिलहाल निलंबन पर विचार किया जा रहा है।
अनिल कुमार उपाध्याय, सीडीओ।
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संबंिधित लिपिक की ओर से समय पर जानकारी नहीं देने पर उनके निलंबन की संतुति डीडीओ से की गई है। अगली पेशी 27 जुलाई को है। प्रकरण पुराना है। संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा।
आनंद प्रकाश, डीपीआरओ
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पंचायती राज विभाग में वर्ष 2008-09 में सफाईकर्मियों की नियुक्ति हुई थी। इस दौरान अमरजीत नाम से दो लोगों ने आवेदन किया था। दोनों को एक ही अनुक्रमांक जारी कर दिया गया। मामला सही करने के लिए विभाग ने बाद में इसे ए और बी में डिफाइन कर दिया। विभाग की ओर से अमरजीत बी तो तैनाती दे दी गई। इस बीच अमरजीत-ए ये कहते हुए हाईकोर्ट में वाद दाखिल कर दिया कि परीक्षा को उसने ही पास किया था। इसके बाद भी तैनाती किसी और को दे दी गई। पूर्व में विभाग की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखा गया था कि अमरजीत-ए ने परीक्षा ही नहीं दी थी। विभाग के पास उससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। उधर अमरजीत-ए ने संबंधित दस्तावेज कोर्ट में पेश कर दिए। दो जुलाई को हाईकोर्ट में डीपीआरओ की पेशी थी। पेश नहीं होने पर डीपीआरओ के खिलाफ अदालत ने वारंट जारी कर दिया।
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पेशी का जानकारी और संबंधित फाइल समय पर पेश नहीं करने के आरोप में वर्तमान डीपीआरओ आनंद प्रकाश ने संबंधित बाबू के निलंबन की संतुति डीडीओ से करप दी है। हालांकि संबंधित बाबू का कहना है कि उसने उक्त मामले की मौखिक जानकारी के साथ ही पत्र की फोटोकापी कराकर भी डीपीआरओ को सौंप दी थी। उधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है। उस समय की फाइलें तलाशी जा रही हैं तो अमरजीत से संबंधित रिकार्ड गायब हैं। प्रकरण में तत्कालीन डीपीआरओ परवेज आलम खां पर शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है। फिलहाल हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को लगी है। विभाग की ओर से अफना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है।
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डीपीआरओ का कहना है कि बाबू ने उन्हें मुकदमे के बारे में जानकारी नहीं दी। इसके कारण वह नीयत तिथि पर हाईकोर्ट में उपलब्ध नहीं हो सके। उनके नाम से वारंट जारी हो गया। बाबू का कहना है कि उसने सूचना दी थी। फिलहाल निलंबन पर विचार किया जा रहा है।
अनिल कुमार उपाध्याय, सीडीओ।
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संबंिधित लिपिक की ओर से समय पर जानकारी नहीं देने पर उनके निलंबन की संतुति डीडीओ से की गई है। अगली पेशी 27 जुलाई को है। प्रकरण पुराना है। संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा।
आनंद प्रकाश, डीपीआरओ