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मानवतावाद प्रेमचंद के सृजन की मूल प्रेरणा थी
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:18 PM IST
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सगड़ी। मुंशी प्रेमचंद की जयंती सोमवार को श्री गांधी पीजी कॉलेज मालटारी में प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वावधान में मनाई गई। इस दौरान प्रेमचंद और आज का समय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रेमचंद कथा साहित्य एवं आज के समय पर अपने विचार रखे।
संगोष्ठी की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। साहित्यकार पंकज गौतम ने कहा कि प्रेमचंद सांप्रदायिकता विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी, चेतना के रचनाकार थे। मानवतावाद उनके सृजन की मूल प्रेरणा थी। उन्होंने सौंदर्य की कसौटी बदलने की बात की, साहित्य को उपयोगिता की कसौटी पर कसने की बात की। वे पहले की अपेक्षा अधिक प्रासंगिक है। विद्यालय के प्राचार्य डा. राम अवध सिंह यादव ने गोदान, सेवासदन, प्रेमाश्रम जैसे उपन्यासों में समाजवाद को उद्धृत किया। मुंशी प्रेमचंद जी ने जो उपन्यास लिखा है वह सच्चाई से भरा हुआ है। डा. रविंद्रनाथ राय ने प्रेमचंद और वर्तमान को जोड़कर सामाजिक कृतियों और आडंबरों पर विचार व्यक्त किया। डा. राजा रामसिंह ने कहा साहित्य भूषण ने प्रेमचंद के साहित्य में समाजवाद, किसान समस्या, नारी समस्या, मजदूरों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला। प्रबंधक दिनेश कुमार राय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की लिखी हुई कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। प्रियंका यादव ने कहां मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि मुश्किल और कठिनाइयों में मुस्कुराते रहना चाहिए। संगोष्ठी को डा. बीसी यादव, मदन मोहन पांडे, प्रगति श्रीवास्तव, डा. प्रेमचंद यादव, डा. पीसी गुप्त, कन्हैया यादव, डा. अखिलेश चंद्र सिंह कुशवाहा, डा. कौशलेंद्र विक्रम मिश्रा, बालचंद प्रसाद, सुरेश, प्रियंका यादव, तेज बहादुर तेज, सुबेदार यादव आदि ने संबोधित किया। संचालन डा. हसीन खान किया। इस मौके पर दिनेश कुमार राय, डा. रामअवध यादव, डा. शैलेश पाठक, दीनानाथ मिश्र, उमाकांत मिश्र, मनोज राय, रविंदर यादव आदि मौजूद थे।
मुंशी प्रेमचंद की मनाई जयंती
आजमगढ़। राहुल मेमोरियल जूनियर एकेडमी रैदोपुर के सभागार में सोमवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यालय की प्रधानाचार्या मीनू राय ने प्रेमचंद को हिंदी साहित्य जगत का योद्धा बताते हुए कहा कि इस प्रगतिशील साहित्यकार का कृतित्व अमर है। बच्चों ने प्रेमचंद की रचित कहानियों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं में अर्पिता, अमन, वर्षा, अंजलि, शरद, आदित्य शामिल रहे। इस अवसर पर बृजेश यादव, सरिता तिवारी, राकेश श्रीवास्तव, अरविंद विश्वकर्मा, कंचन राय, रजनी सिंह आदि उपस्थित रहे।- ब्यूरो
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प्रेमचंद को किया याद
आजमगढ़। प्रीमियर पब्लिक स्कूल एलवल में सोमवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाते हुए उन्हें याद किया। वक्ताओं ने उनके साहित्यिक रचनाओं पर चर्चा किया।
संयोजक अब्दुल हबीब ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट कहे जाते है। इन्होंने लगभग तीन सौ हिंदी और दर्जनों उर्दू कहानियां लिखी। मधु केशरवानी ने प्रेमचंद के नारी पात्रों के विषय में बताया। अनिल श्रीवास्तव ने प्रेमचंद की सवा सेर गेहूं और पंच परमेश्वर कहानी को विस्तार से बताया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
- शाहनेवाज
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संगोष्ठी की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। साहित्यकार पंकज गौतम ने कहा कि प्रेमचंद सांप्रदायिकता विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी, चेतना के रचनाकार थे। मानवतावाद उनके सृजन की मूल प्रेरणा थी। उन्होंने सौंदर्य की कसौटी बदलने की बात की, साहित्य को उपयोगिता की कसौटी पर कसने की बात की। वे पहले की अपेक्षा अधिक प्रासंगिक है। विद्यालय के प्राचार्य डा. राम अवध सिंह यादव ने गोदान, सेवासदन, प्रेमाश्रम जैसे उपन्यासों में समाजवाद को उद्धृत किया। मुंशी प्रेमचंद जी ने जो उपन्यास लिखा है वह सच्चाई से भरा हुआ है। डा. रविंद्रनाथ राय ने प्रेमचंद और वर्तमान को जोड़कर सामाजिक कृतियों और आडंबरों पर विचार व्यक्त किया। डा. राजा रामसिंह ने कहा साहित्य भूषण ने प्रेमचंद के साहित्य में समाजवाद, किसान समस्या, नारी समस्या, मजदूरों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला। प्रबंधक दिनेश कुमार राय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की लिखी हुई कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। प्रियंका यादव ने कहां मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि मुश्किल और कठिनाइयों में मुस्कुराते रहना चाहिए। संगोष्ठी को डा. बीसी यादव, मदन मोहन पांडे, प्रगति श्रीवास्तव, डा. प्रेमचंद यादव, डा. पीसी गुप्त, कन्हैया यादव, डा. अखिलेश चंद्र सिंह कुशवाहा, डा. कौशलेंद्र विक्रम मिश्रा, बालचंद प्रसाद, सुरेश, प्रियंका यादव, तेज बहादुर तेज, सुबेदार यादव आदि ने संबोधित किया। संचालन डा. हसीन खान किया। इस मौके पर दिनेश कुमार राय, डा. रामअवध यादव, डा. शैलेश पाठक, दीनानाथ मिश्र, उमाकांत मिश्र, मनोज राय, रविंदर यादव आदि मौजूद थे।
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मुंशी प्रेमचंद की मनाई जयंती
आजमगढ़। राहुल मेमोरियल जूनियर एकेडमी रैदोपुर के सभागार में सोमवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यालय की प्रधानाचार्या मीनू राय ने प्रेमचंद को हिंदी साहित्य जगत का योद्धा बताते हुए कहा कि इस प्रगतिशील साहित्यकार का कृतित्व अमर है। बच्चों ने प्रेमचंद की रचित कहानियों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं में अर्पिता, अमन, वर्षा, अंजलि, शरद, आदित्य शामिल रहे। इस अवसर पर बृजेश यादव, सरिता तिवारी, राकेश श्रीवास्तव, अरविंद विश्वकर्मा, कंचन राय, रजनी सिंह आदि उपस्थित रहे।- ब्यूरो
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प्रेमचंद को किया याद
आजमगढ़। प्रीमियर पब्लिक स्कूल एलवल में सोमवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाते हुए उन्हें याद किया। वक्ताओं ने उनके साहित्यिक रचनाओं पर चर्चा किया।
संयोजक अब्दुल हबीब ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट कहे जाते है। इन्होंने लगभग तीन सौ हिंदी और दर्जनों उर्दू कहानियां लिखी। मधु केशरवानी ने प्रेमचंद के नारी पात्रों के विषय में बताया। अनिल श्रीवास्तव ने प्रेमचंद की सवा सेर गेहूं और पंच परमेश्वर कहानी को विस्तार से बताया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
- शाहनेवाज