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सात की बजाए तीन चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:32 PM IST
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बूढ़नपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपुर में मानक के अनुरूप पदों पर तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में सात चिकित्सकों का पद सृजित है लेकिन उसके सापेक्ष मात्र तीन चिकित्सकों की ही तैनाती है। यहां आने वाले मरीजों को महंगी जांचे बाहर से करानी पड़ती हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपुर में सात चिकित्सकों के स्थान पर मात्र तीन चिकित्सकों की नियुक्ति है। चिकित्साधिकारी डा. आलेंद्र के अनुसार 30 बेड का अस्पताल है। वैसे तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक बालरोग विशेषज्ञ, महिला रोग विषेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन, एक्सरे, रेडियोलाजिस्ट सहित आर्थोरेडियो सर्जन का होना अति आवश्यक है। लेकिन शासन की उदासीनता के चलते चिकित्सकों के साथ-साथ उपकरणों की भी अनदेखी की जा रही है। एनआरएचएम की बात करें तो जननी सुरक्षा की योजना के तहत सरकार की पहल बेकार साबित हो रही है क्योंकि हर गर्भवती महिला का कम से कम तीन बार अल्ट्रासाउंड होना चाहिए लेकिन सरकार द्वारा किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अल्ट्रा साउंड की मशीन नहीं है। जिससे यहां की गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। नहीं तो 600 रुपये खर्च करके बाहर से कराना पड़ता है। जहां 102 योजना के तहत घर से महिलाओं को चिकित्सालय पहुंचाने के लिए सरकार कटिबद्ध है। वहीं चिकित्सक व उपकरण के अभाव के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बूढ़नपुर निवासी मंगरू ने बताया कि सीने में दर्द और घबराहट के कारण सुबह सात बजे से अस्पताल आ गया था लेकिन अस्पताल में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं दी गयी। 10 बजे के बाद चिकित्सक के आने के बाद दवा मिली लेकिन कुछ दवाएं बाहर से लेनी पड़ी। जिसके लिए पैसा नहीं है।
शुभम उपाध्याय ने कहा कि सीने में कफ जमने से सांस लेने में परेशानी होती है जिसके लिए मुझे एक्स रे के लिए चिकित्सक ने सुझाव दिया। लाइट न होने के कारण मुझे बाहर से एक्सरे कराना पड़ा।
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भीखू कुंहार ने कहा कि मुझे दमा की शिकायत है कहने के लिए सरकारी अस्पताल है लेकिन यहां पर इलाज प्राइवेट से मंहगा पड़ रहा है। दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही है।
रामजीत यादव ने बताया कि मैं एक महीने से इस अस्पताल से दवा करा रहा हूं रोग विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से आराम नहीं मिल पा रहा है।
डा. आलेंद्र ने बताया कि अस्पताल में किसी तरह की दुर्व्यवस्था नहीं है। शासन द्वारा जो दवाएं मुहैया कराई जाती है उसे गर्भवती महिलाओं समेत सभी रोगियों को रोग के अनुरूप दी जाती है।
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बूढ़नपुर निवासी मंगरू ने बताया कि सीने में दर्द और घबराहट के कारण सुबह सात बजे से अस्पताल आ गया था लेकिन अस्पताल में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं दी गयी। 10 बजे के बाद चिकित्सक के आने के बाद दवा मिली लेकिन कुछ दवाएं बाहर से लेनी पड़ी। जिसके लिए पैसा नहीं है।
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शुभम उपाध्याय ने कहा कि सीने में कफ जमने से सांस लेने में परेशानी होती है जिसके लिए मुझे एक्स रे के लिए चिकित्सक ने सुझाव दिया। लाइट न होने के कारण मुझे बाहर से एक्सरे कराना पड़ा।
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भीखू कुंहार ने कहा कि मुझे दमा की शिकायत है कहने के लिए सरकारी अस्पताल है लेकिन यहां पर इलाज प्राइवेट से मंहगा पड़ रहा है। दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही है।
रामजीत यादव ने बताया कि मैं एक महीने से इस अस्पताल से दवा करा रहा हूं रोग विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से आराम नहीं मिल पा रहा है।
डा. आलेंद्र ने बताया कि अस्पताल में किसी तरह की दुर्व्यवस्था नहीं है। शासन द्वारा जो दवाएं मुहैया कराई जाती है उसे गर्भवती महिलाओं समेत सभी रोगियों को रोग के अनुरूप दी जाती है।