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विमुक्ता से दिखाया मानवीय रिश्तों का महत्व
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आजमगढ़। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और जिला प्रशासन की ओर से चार दिवसीय संभागीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन गुरुवार को रूपांतरण गोरखपुर की टीम ने ‘विमुक्ता’ नाटक का भावपूर्ण मंचन किया। तेलुगू उपन्यास पर आधारित इस नाटक के जरिये कलाकारों ने मानवीय रिश्तों के महत्व को दर्शाया।
नाटक का कथानक एक साहसिक अभिव्यक्ति पर आधारित था जिसने नारी के प्रति हो रहे अन्याय को रेखांकित किया। नाटक में सीता जो सूपर्णखा, अहिल्या, रेणुका और उर्मिला के अनुभवों से सीखते हुए परिपक्व होती है, के माध्यम से चरित्रों के बीच बनते आत्मीय संबंधों को बहुत ही बेहतरीन ढंग से दिखाया गया। पात्र न केवल अपने अनुभव से परिपूर्ण होती है बल्कि अपनी पहचान भी बनाती है। नाटक में सीता की भूमिका में प्रियंका गौतम रहीं जबकि सूपर्णखा की भूमिका सुरभि अग्रवाल, उर्मिला की विनीता राय, रेणुका की प्राची दुबे, अहिल्या की भूमिका प्रतिमा सिंह ने निभाई। अर्पणेश मिश्र निर्देशन के साथ साथ मुख्य सूत्रधार भी रहे। ललित कुमारी का आलेख रहा, प्रकाश परिकल्पना रवि प्रताप सिंह की रही। इस अवसर अकादमी के ओर से शैलजाकांत, अखिलेश आदि मौजूद रहे। संचालन अभिषेक पंडित ने किया। शुक्रवार को प्रयास रंगमंडल लखनऊ की ओर से संक्रमण का मंचन होगा।
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नाटक का कथानक एक साहसिक अभिव्यक्ति पर आधारित था जिसने नारी के प्रति हो रहे अन्याय को रेखांकित किया। नाटक में सीता जो सूपर्णखा, अहिल्या, रेणुका और उर्मिला के अनुभवों से सीखते हुए परिपक्व होती है, के माध्यम से चरित्रों के बीच बनते आत्मीय संबंधों को बहुत ही बेहतरीन ढंग से दिखाया गया। पात्र न केवल अपने अनुभव से परिपूर्ण होती है बल्कि अपनी पहचान भी बनाती है। नाटक में सीता की भूमिका में प्रियंका गौतम रहीं जबकि सूपर्णखा की भूमिका सुरभि अग्रवाल, उर्मिला की विनीता राय, रेणुका की प्राची दुबे, अहिल्या की भूमिका प्रतिमा सिंह ने निभाई। अर्पणेश मिश्र निर्देशन के साथ साथ मुख्य सूत्रधार भी रहे। ललित कुमारी का आलेख रहा, प्रकाश परिकल्पना रवि प्रताप सिंह की रही। इस अवसर अकादमी के ओर से शैलजाकांत, अखिलेश आदि मौजूद रहे। संचालन अभिषेक पंडित ने किया। शुक्रवार को प्रयास रंगमंडल लखनऊ की ओर से संक्रमण का मंचन होगा।
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