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अब मध्याह्न भोजन खाने वाले विद्यार्थियों के होंगे हस्ताक्षर
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आजमगढ़। मध्याह्न भोजन योजना में लगातार मिलने वाली फर्जीवाड़े की शिकायतों से परेशान बेसिक शिक्षा विभाग ने डीएम बांदा के फार्मूले को पूरे प्रदेश में लागू करने का फैसला लिया है। बांदा में एक निश्चित प्रारूप पर प्रतिदिन मिड-डे मील खाने वाले विद्यार्थियों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। अब सूबे में इसी प्रारूप का प्रयोग किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने आदेश दिए हैं कि कक्षा-एक और दो के बच्चों को हस्ताक्षर करना सिखाया जाएगा। जो बच्चे अनुपस्थित होंगे उसी समय उनके नाम के आगे लाल पेन से अपसेंट लिखा जाएगा। मध्याह्न भोजन योजना में फर्जीवाड़े की शिकायतें लगातार मिल रही थी। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान विद्यालय में बच्चों की संख्या काफी कम मिलती है, लेकिन मिड-डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा होती है। विभाग इस पर कार्रवाई करता है तो शिक्षकों का कहना होता है कि बच्चे मध्याह्न भोजन के बाद घर भाग जाते हैं। इससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। इस बीच जिलाधिकारी बांदा ने मामले में नया प्रयोग किया। अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने इशकी सराहना करते हुए सभी जिलों में लागू करने का फैसला लिया है। निर्देशित किया है कि कक्षा-1 अथवा कक्षा-2 के बच्चे जो हस्ताक्षर करने में असमर्थ हैं, उन्हें हस्ताक्षर करना सिखाया जाए। या किसी वर्णमाला के अक्षर को सिखाकर उसी वर्णमाला के अक्षर को हस्ताक्षर माना जाए। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने इसे सभी विद्यालयों में लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने आदेश दिए हैं कि कक्षा-एक और दो के बच्चों को हस्ताक्षर करना सिखाया जाएगा। जो बच्चे अनुपस्थित होंगे उसी समय उनके नाम के आगे लाल पेन से अपसेंट लिखा जाएगा। मध्याह्न भोजन योजना में फर्जीवाड़े की शिकायतें लगातार मिल रही थी। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान विद्यालय में बच्चों की संख्या काफी कम मिलती है, लेकिन मिड-डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा होती है। विभाग इस पर कार्रवाई करता है तो शिक्षकों का कहना होता है कि बच्चे मध्याह्न भोजन के बाद घर भाग जाते हैं। इससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। इस बीच जिलाधिकारी बांदा ने मामले में नया प्रयोग किया। अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात कुमार ने इशकी सराहना करते हुए सभी जिलों में लागू करने का फैसला लिया है। निर्देशित किया है कि कक्षा-1 अथवा कक्षा-2 के बच्चे जो हस्ताक्षर करने में असमर्थ हैं, उन्हें हस्ताक्षर करना सिखाया जाए। या किसी वर्णमाला के अक्षर को सिखाकर उसी वर्णमाला के अक्षर को हस्ताक्षर माना जाए। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने इसे सभी विद्यालयों में लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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