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यमुना को गिर रहे सीवर नाले के पानी,89 करोड़ का भेजा प्रस्वताव
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औरैया। यमुना नदी में गिर रहे नाले के पानी के कारण इसका जल आचमन लायक भी नहीं रह गया है। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए शासन को जल निगम विभाग की ओर से दोबारा दो माह पूर्व 89 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन इसकी स्वीकृति के इंतजार में यमुना मैली होती जा रही है। शहर में गंदे पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था न होने से सीवर लाइन का पानी नाले के माध्यम से लंबे समय से यमुना में गिर रहा है। इसके कारण नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। एक तरफ केंद्र व प्रदेश सरकार गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च रही है तो दूसरी तरफ जिले में यमुना नदी का पानी मैला होता जा रहा है।
ये हाल तब है जब शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी में गिर रहे नाले के बारे में दो साल से समाजसेवी संगठन शासन तक बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच जल निगम के माध्यम से लखनऊ से आई एक टीम की ओर से यमुना नदी में गिर रहे नाले का सर्वे भी किया गया। जल निगम की ओर से लगभग लगभग आठ माह पहले प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। जिसमें कुछ खामियों के कारण प्रस्ताव को दुरुस्त कर दोबारा भेजने के निर्देश के साथ वापस भेज दिया गया था। दो माह पहले जल निगम की ओर से दोबारा 89 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया। अब उस पर शासन की मुहर लगने का इंतजार है। लेकिन कब तक इंतजार करना होगा, ये बड़ा सवाल है।
वर्जन
पूर्व में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन उसमें कुछ कमियां होने के कारण प्रस्ताव को वापस भेज दिया गया था। इसे संशोधित कर दो माह पहले फिर से विभाग को भेजा गया है। विभाग के माध्यम से शासन को भेजे जाने की प्रक्रिया है। जैसे ही प्रस्ताव पर स्वीकृति मिल जाएगी, यमुना नदी में गिरने वाले नाले को रोकने के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा।
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मर रहीं मछलियां
फोटो07एयूआरपी 17- प्रदूषित पानी में मरी पड़ी मछली। संवाद
गंदगी और दूषित पानी के कारण जहां आम लोग यमुना नदी के पानी से परहेज कर रहे हैं, वहीं इसका सीधा असर मछलियों पर दिख रहा है। पानी में मरी पड़ी मछलियों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण कितना बढ़ गया है।
स्नानागार क्षतिग्रस्त
फोटो07एयूआरपी 18- शेरगढ़ घाट का क्षतिग्रस्त स्नानागार। संवाद
यमुना नदी स्थित शेरगढ़ घाट पर बना स्नानागार राजा जयचंद्र के कार्यकाल में बनाया गया था। जो प्रशासन की अनदेखी के कारण क्षतिग्रस्त होता जा रहा है।
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ये हाल तब है जब शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी में गिर रहे नाले के बारे में दो साल से समाजसेवी संगठन शासन तक बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच जल निगम के माध्यम से लखनऊ से आई एक टीम की ओर से यमुना नदी में गिर रहे नाले का सर्वे भी किया गया। जल निगम की ओर से लगभग लगभग आठ माह पहले प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। जिसमें कुछ खामियों के कारण प्रस्ताव को दुरुस्त कर दोबारा भेजने के निर्देश के साथ वापस भेज दिया गया था। दो माह पहले जल निगम की ओर से दोबारा 89 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया। अब उस पर शासन की मुहर लगने का इंतजार है। लेकिन कब तक इंतजार करना होगा, ये बड़ा सवाल है।
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पूर्व में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन उसमें कुछ कमियां होने के कारण प्रस्ताव को वापस भेज दिया गया था। इसे संशोधित कर दो माह पहले फिर से विभाग को भेजा गया है। विभाग के माध्यम से शासन को भेजे जाने की प्रक्रिया है। जैसे ही प्रस्ताव पर स्वीकृति मिल जाएगी, यमुना नदी में गिरने वाले नाले को रोकने के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा।
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मर रहीं मछलियां
फोटो07एयूआरपी 17- प्रदूषित पानी में मरी पड़ी मछली। संवाद
गंदगी और दूषित पानी के कारण जहां आम लोग यमुना नदी के पानी से परहेज कर रहे हैं, वहीं इसका सीधा असर मछलियों पर दिख रहा है। पानी में मरी पड़ी मछलियों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण कितना बढ़ गया है।
स्नानागार क्षतिग्रस्त
फोटो07एयूआरपी 18- शेरगढ़ घाट का क्षतिग्रस्त स्नानागार। संवाद
यमुना नदी स्थित शेरगढ़ घाट पर बना स्नानागार राजा जयचंद्र के कार्यकाल में बनाया गया था। जो प्रशासन की अनदेखी के कारण क्षतिग्रस्त होता जा रहा है।