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स्कूली बच्चों को साइबर दुनिया के खतरों से आगाह किया

Thu, 15 Nov 2018 12:12 AM IST
auraiya
auraiya Updated Thu, 15 Nov 2018 12:12 AM IST
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Warns school children about the dangers of the cyber world
विद्यालय के बच्चों से साइबर क्राइम पर बातचीत करते साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन - फोटो : amarujala
कुछ वर्षों के भीतर इंटरनेट की दुनिया का जिस तेजी से विस्तार हुआ है, उसी तेजी से नेट के दुरुपयोग और साइबर क्राइम के आंकड़े बढ़ रहे हैं। ऐसे में इंटरनेट के इस्तेमाल में हर कदम सावधानी और सतर्कता की जरूरत है। यह लब्बोलुआब था बुधवार को साइबर अपराध विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में मौजूद विशेषज्ञों और अफसरों के उद्बोधन का। गेल गांव स्थित ऑडिटोरियम में मौजूद असंख्य छात्र-छात्राओं को जरूरी टिप्स देते हुए साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने कहा कि सामान्य तौर पर नेट सर्फिंग में सोशल मीडिया और गेमिंग का प्रयोग ज्यादा होता है। बॉबजी नामक वायलेंट गेम से दूर रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में आंखों व सिर दर्द की समस्या बढ़ती है। अकाउंट हैकिंग से बचने के लिए उन्होंने ऐप की सेटिंग में जाकर ट्रू फैक्टर ऑटोमेटिक ऑप्शन को ऑन करने की सलाह दी। कहा कि इसके बाद जब कोई अकाउंट ऑपरेट करने की कोशिश करेगा तो आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी नंबर आएगा और छेड़छाड़ की कोशिश का पता चल जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता एवं साइबर लॉ एक्सपर्ट खुशबू जैन ने ऐसी गड़बड़ियों पर दंड की जानकारी देते हुए बताया कि दूसरे के फोन के मिसयूज पर दो से सात साल की सजा हो सकती है। दो से पांच लाख जुर्माना भी हो सकता है। गलत फोटो फेसबुक या वाट्सएप पर भेजने में भी सजा का प्रावधान है। साइबर क्राइम से बचने के लिए अपनी प्राइवेसी का विशेष ख्याल रखें। यूनीसेफ के मोहम्मद आफताब ने भी नेट के उपयोग के समय अतिरिक्त सावधानी पर जोर दिया।
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कार्यक्रम में शामिल हुए डीएम श्रीकांत मिश्रा ने इंट्रीगेटिड चाइल्ड स्कीम के बारे में जानकारी दी। आईजी पुलिस आलोक कुमार ने 20 सालों में इंटरनेट के विस्तार के सफर पर चर्चा करते हुए कहा कि आज देश के 13 करोड़ बच्चों के हाथों में इंटरनेट से जुड़े कोई न कोई डिवाइस हैं। लिहाजा बच्चों के साथ अभिभावकों को भी सतर्क रहना जरूरी है। देश के साइबर क्रॉप में शुमार पुलिस अधीक्षक प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने ऑनलाइन वर्किंग के बीच संभावित धोखों के प्रति सतर्क किया।
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नई पीढ़ी को साइबर सेक्टर के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे आयोजन के फैसले पर एसपी की सभी ने सराहना की। अंत में अमित दुबे ने सभी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ रक्षित टंडन अब तक देश में 27 लाख बच्चों को साइबर क्राइम से बचने की ट्रेनिंग दे चुके हैं।

 ऑनलाइन टेस्ट के विजेताओं को आईजी ने दिया सम्मान
एसपी प्रो.त्रिवेणी सिंह ने बच्चों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए जरूरी जानकारियों पर आधारित ऑनलाइन टेस्ट का आयोजन भी कराया था। इसमें जिले के 75 विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया। सफल पांच विद्यार्थियों को आईजी आलोक कुमार ने सम्मानित किया। पुरस्कार और सम्मान पाने वालों में अक्षांश चंदेल गेल डीएवी दिबियापुर, आयुष अग्निहोत्री सेंट फ्रांसिस अकेदमी दिबियापुर, कुशाग्र कंचन गेल डीएवी पब्लिक स्कूल दिबियापुर, आशीष दुबे गेल डीएवी पब्लिक स्कूल दिबियापुर, अक्षय चतुर्वेदी चौधरी विशंभर सिंह भारतीय बालिका विद्यालय औरैया शामिल रहे।


बच्चों के लौटने से लौटी मुस्कान
औरैया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग की ओर से शुरू की गई मुस्कान हेल्पलाइन के तहत किसी कारण से परिजनों से अलग हुए चार बच्चों को परिजनों के सुपुर्द कराया गया। आईजी ने उपहार देकर ऐसे बच्चों की हौसला अफजाई की।
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