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खर्च का ग्राम पंचायतों से लिया जाएगा लेखा-जोखा

Thu, 26 Sep 2019 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2019 12:15 AM IST
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village
औरैया। वर्ष 2009 से 16-17 तक के वित्तीय वर्ष के आडिट में 38 प्रधानों ने अभी तक अपने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। करीब 16 करोड़ रुपये का हिसाब न दे पाने पर इन ग्राम पंचायतों से हिसाब मांगा गया है। इससे प्रधानों में हड़कंप मचा है। अभी वित्तीय वर्ष 2017-18 के ऑडिट में 278 ग्राम पंचायतों ने ऑडिट के लिए अभिलेख उपलब्ध करा दिए हैं। जबकि 199 ग्राम पंचायतों ने अभी तक ऑडिट के लिए अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं।
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गांव के विकास कार्यों में घोटाले हुए हैं। जिले में 477 ग्राम पंचायतों में 38 ग्राम पंचायतें विकास के नाम पर खर्च होने वाले 16 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे सकें हैं। अभी कुछ और ग्राम पंचायतों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। टीम ने 2017-18 वित्तीय वर्ष में 278 ग्राम पंचायतों ने ऑडिट के लिए अपने अभिलेख डीपीआरओ कार्यालय में उपलब्ध करा दिए हैं, जिन्हें ऑडिट के लिए भेज दिया गया है। जबकि 199 ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव ने अभी तक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं।
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जिन ग्राम पंचायतों द्वारा ऑडिट उपलब्ध नहीं कराए हैं, इनमें बड़े स्तर की गड़बड़ी निकलने की आशंका है। इसको लेकर जिला पंचायत राज विभाग इस वित्तीय वर्ष में बारीकी से ऑडिट करने की तैयारी में जुट गया है। प्रधान भी अपने दस्तावेजों को समेटने में जुटे हैं। ऑडिट में सबसे अधिक बिधूना ब्लाक की सबसे अधिक एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें फंसी हैं। इसके बाद सदर ब्लाक की ग्राम पंचायतें शामिल हैं। जिले की 477 ग्राम पंचायतों ने 38 ग्राम पंचायतें खर्च होने वाले करीब 16 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे सकी हैं। यह धनराशि शासन राज्य वित्त व अन्य योजनाओं के माध्यम से दी थीं।
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ऑडिट टीम ने वर्ष 2009-10 से 2017-18 तक का ऑडिट किया था। डीपीआरओ राजेश चौरसिया ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायतों को नोटिस भेज दी गई हैं। ग्राम पंचायतों से स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित पंचायतों के प्रधानों और सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

उधर, डीपीआरओ के जिला समन्वयवक का कहना कि जिन 38 ग्राम पंचायतों ने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। वहां सिर्फ प्रधान ही नहीं इनके सचिव भी फंसेंगे। इन पंचायतों को नोटिस भेजकर कर स्पष्ट कर दिया गया है कि गांव में पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी है कि विकास कार्यों में लगने वाली निर्माण सामग्री की खरीद का बिल, बाउचर लें। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो गड़बड़ी में सचिवों पर भी कार्रवाई होगी।
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