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नाकाम गांव की सरकार, गंदगी से बुरा हाल

Mon, 29 Jun 2015 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया Updated Mon, 29 Jun 2015 12:37 AM IST
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The government failed the village , worse than dirt

सदर तहसील के ग्राम तुर्कीपुर चित्तर सिंह में ग्राम प्रधान की अनदेखी से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं  को परेशान हैं। चारों तरफ गंदगी, जर्जर सड़क, बिजली व पानी की समस्याओं का अंबार लगा है।

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समस्याओं से दो-चार हो रहे ग्रामीण गांव की सरकार को नाकाम बताकर विकास के प्रति ग्राम प्रधान की नजरंदाजी मान रहे हैं, इससे लोगों में खासा आक्रोश है।


 
21वीं सदी के दौर में आज प्रत्येक गांव व मजरे में मूलभूत सुविधाओं को पूरा कराने को केंद्र व प्रदेश सरकार तक एड़ीचोटी का जोर लगाए हैं। खास बात यह है कि सरकारों द्वारा क्षेत्रों के विकास को भेजा जा रहे बजट का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। इसको देखने वाला कोई नहीं है। प्रशासन भी इस ओर कोई खासा तवज्जो नहीं दे पा रहा है।
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ग्राम प्रधान से सचिव तक सभी बजट उपलब्ध होने के बावजूद कागजों में विकास कार्य दिखाकर ग्रामीणों के हकों पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। विकास की इसी कड़ी में अमर उजाला टीम ने सदर तहसील के ग्राम तुर्कीपुर चित्तर सिंह का जायजा लिया तो ग्रामीणों ने समस्याओं की झड़ी लगाते हुए ग्राम प्रधान के प्रति नाराजगी जताई।
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बुजुर्ग अवध सिंह से जब ग्राम के विकास की बात पूछी तो उनका आक्रोश बरबस फूट पड़ा। कहते हैं कि ग्राम प्रधान सुभाष की मनमानी के चलते गांव की टूटी-फूटी सड़कें व खरंजे बनवाना तो दूर आज तक ठीक नहीं कराए गए।


बरसात के दिनों में सड़कों पर पानी ऊपर तक उबलने लगता है और लोगों के घरों में भर जाता है। इससे जबरदस्त समस्या खड़ी हो जाती है। अवध सिंह चौहान





वीरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में कई माह से सफाई कर्मी के न आने से नालियां व नाले गंदगी से बजबजा रहे हैं। सड़ांध के चलते लोगों को घरों के बाहर बैठना तक दूभर है। ग्राम प्रधान से शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं है। शिकायत के बावजूद प्रशासन से भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। वीरेंद्र सिंह





मोनू शुक्ला का कहना है कि जब से सुभाष कुमार प्रधान बने हैं, तब से गांव का बेड़ा गर्क हो गया है। न पेयजल की सुविधा और न ही साफ-सफाई पर गौर किया जाता है।



ग्रामीणों को आज भी 18वीं सदी की तरह रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं गांव की सरकार सचिव के साथ मिलकर विकास के नाम पर सिर्फ कागजों में लीक पीट रही है। शासन से विकास के नाम पर मुहैया कराया जाने वाला बजट, ऊपर ही ऊपर नदारत हो रहा है। मोनू शुक्ला

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