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दिन भर चलीं बर्फीली हवाएं, होती रही रिमझिम बारिश

Sun, 11 Feb 2018 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Sun, 11 Feb 2018 10:28 PM IST
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Throughout the day, snowy winds, raining rain
दिन भर छाई रही बदली। - फोटो : amarujala

औरैया। एक हफ्ते से दिन में ठंड से राहत महसूूस कर रहे लोगों को रविवार को बर्फीली हवाएं व रिमझिम बारिश ने एक बार फिर सर्दी का एहसास करा दिया। वहीं, बारिश से दलहनी व आलू की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। हालांकि गेहूं की फसल के लिए ये पानी फायदमंद बताया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिक ने सोमवार को भी सात मिली तक बारिश के संभावना जताई है।

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ठंड ने एक बार फिर वापसी की है। एक हफ्ते से तेज धूप निकलने से लोग कयास लगा रहे थे कि कड़ाके की सर्दी के दिन खत्म हो गए हैं, लेकिन रविवार को बारिश हुुई तो तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। एक बार फिर कंपन भर्री सर्दी का एहसास  हो गया। मौसम विभाग की मानें तो का 11 फरवरी को छिटपुट बारिश की संभावना थी, जो सच साबित हुई।
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यदि 12 फरवरी को तेज हवाए चलीं तो सात मिलीलीटर तक बारिश होने की संभावना है। मौसम वैैज्ञानिक डॉ. सदीप सिंह का कहना है कि रविवार को नौ से 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। यदि इससे अधिक तेज हवाएं चलेंगी तभी बारिश की संभावना है। साथ ही अगले दो दिन तक बादल छाए रहने का अनुमान है।
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बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
अचानक मौसम में आए परिवर्तन ने अन्नदाता की परेशानियां बढ़ा दी हैं। रविवार को हुई रिमझिम बारिश से दलहनी फसलों को खासा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इस समय अरहर, चना, सरसों, मंसूर  आदि की फसल पकने की कगार पर है। अधिकांश स्थानों पर सरसों की फसल पककर तैयार हो चुकी है। ऐसे में बारिश होने से पक्की खड़ी फसल के दाने गिरने की आशंका बढ़ गई है।

यदि सोमवार को तेज बारिश हुई तो 30 फीसदी तक फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उधर, आलू की फसल पहले से ही झुलसा रोग की चपेट में है। ऐसे में बारिश ने कोढ़ में खाज का काम किया है। इस बार लाभ को ध्यान में रखकर फसल से उम्मीद लगाए बैठे किसानों को फिर मायूसी नजर आ रही है।

गेहूं की फसल को फायदा
दलहनी फसलें भले ही बारिश से प्रभावित हैं, लेकिन गेहूं के लिए यह पानी फायदेमंद साबित होगा। जिन किसानों ने नवंबर के पहले सप्ताह में फसलें बोई हैं। उनमें दाने आने शुरू हो गए हैं, ऐसे में खेतों में नमी की जरूरत है। ऐसे में यह बारिश गेहूं की फसल को फायदा पहुंचाएगा।

बर्फीली हवा व बारिश से आम में खर्रा रोग का खतरा  
औरैया। अचानक मौसम में आए बदलाव से आम को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। नमी के इस मौसम में आम के पेड़ पर भुनगा एवं मिज कीट लगने से खर्रा रोग का प्रकोप हो जाता है। इससे बौर में कमी आती है और आम का उत्पादन गिर जाता है।
कृषि विशेषज्ञ आईपी सिंह ने बताया कि आम के पेड़ की फसल में लगने वाले भुनगा कीट आम की बौर, कोमल पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसकर हानि पहुंचाते हैं। इससे बौर, पत्ती और फल टूटकर गिर जाते हैं। यह कीट शहद की तरह पदार्थ विसर्जित करता है। जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है।


आम के गुणवत्ता उत्पादन के लिए समय से ही कीट और रोगों द्वारा उचित प्रबंधन बहुत जरूरी है। आम कारोबारी शरीफ ने बताया कि उनके पास इस पांच बीघे से अधिक आम के बाग हैं। जिनमें अभी बौर आना शुरू हुई है। कुछ पेड़ों पर खुर्रा रोग के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन इससे बचाव के लिए दवा के छिड़काव के साथ-साथ बाग में सफाई कराई गई है। सहायक उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र ने बताया कि प्राय: समय से पूर्व ही बाग की निराई-गुड़ाई और साफ की जाए तो भुनगा और मिज कीट की आशंका कम रह जाती है। ब्यूरो

 

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