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साहब कोरोना तो नहीं मुझे और मेरे बच्चे को
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औरैया। कोरोना संक्रमण को लेकर हर किसी में दहशत है। कहीं हमें और गर्भ में पलने वाले बच्चे को कोरोना तो नहीं हो जाएगा। अगर मुझे मुझे संक्रमण हुआ तो बच्चे को दूध पिलाने में उसे भी संक्रमण हो सकता है। इस समय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाली अधिकांश गर्भवती महिलाएं चिकित्सकों से ऐसे ही सवाल कर रहीं हैं। इस पर चिकित्सकों का कहना है कि परिजनों को गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान देने की जरूरत है। घर में उन्हें सकारात्मक माहौल देने की कोशिश करें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को महामारी घोषित किया है। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि कोरोना पेट में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है लेकिन इमरजेंसी हालात में अस्पताल जाना पड़ सकता है, जो गर्भवती को संक्रमण कर सकता है। गर्भ के दौरान महिला के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो होती है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। जिला अस्पताल की महिला वार्ड की एएनएम आशा वर्मा ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वालीं अधिकांश गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों संक्रमण को लेकर तमाम सवाल कर रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहली अप्रैल से 30 अप्रैल तक जिले के अस्पतालों में 699 गर्भवती महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है। हालांकि गनीमत है कि अभी तक किसी में कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं। उधर, डा.अमित पोरवाल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। खून की कमी न होने पाए, इसके लिए चेन और गुड़ का सेवन करें। परिजन उनका ध्यान रखें और आवश्यक तैयारियों को पूरा करें। गर्भवती महिलाएं चेहरे को हाथ लगाने से पहले हाथों को जरूर धोएं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को महामारी घोषित किया है। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि कोरोना पेट में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है लेकिन इमरजेंसी हालात में अस्पताल जाना पड़ सकता है, जो गर्भवती को संक्रमण कर सकता है। गर्भ के दौरान महिला के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो होती है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। जिला अस्पताल की महिला वार्ड की एएनएम आशा वर्मा ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वालीं अधिकांश गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों संक्रमण को लेकर तमाम सवाल कर रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहली अप्रैल से 30 अप्रैल तक जिले के अस्पतालों में 699 गर्भवती महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है। हालांकि गनीमत है कि अभी तक किसी में कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं। उधर, डा.अमित पोरवाल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। खून की कमी न होने पाए, इसके लिए चेन और गुड़ का सेवन करें। परिजन उनका ध्यान रखें और आवश्यक तैयारियों को पूरा करें। गर्भवती महिलाएं चेहरे को हाथ लगाने से पहले हाथों को जरूर धोएं।
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