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मुल्क की हिफाजत ही था रामवीर का सपना
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Fri, 13 Nov 2015 11:15 PM IST
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मुल्क की हिफाजत करते समय लेह में शहीद हुए सैनिक रामवीर यादव का शव पैतृक घर गुरुवार की भोर ही पहुंच गया। शव के साथ सेना की टुकड़ी शहीद सैनिक के घर जैसीराम नगला जैसे ही पहुंची, गांव में कोहराम मचा रहा। जब पूरा देश दीपक और झालरों की रोशनी में जगमगा रहा था। उस समय अछल्दा के नगला जैसीराम गांव में अंधेरा छाया था।
बुधवार को दीपावली पर दीपक जलाने और झालरों से घरों को रोशन करने की तैयारी गांव में हर घर में थी। गांव के बच्चे भी भारी मात्रा में पटाखा और फुलझड़ी खरीदकर लाए थे। लेकिन कश्मीर के लेह से आई एक खबर को सुन पूरे गांव में अंधेरा छा गया। घरों को रोशन करने के लिए लगी झालरें उतार ली गई। रोशनी से नहाने की उत्सुकता पाले यह गांव घोर अंधेरे के आगोश में चला गया। तेज आवाज वाले पटाखे भी खामोश हो गए।
देश की हिफाजत के लिए लेह में तैनात गांव नगला जैसीराम का सपूत रामवीर यादव दीपावली के दिन ही शहीद हो गया था। वतन के लिए मर मिटने की कसम खाकर सेना में भर्ती हुआ रामवीर ने अपनी ड्यूटी तो पूरी कर दी, लेकिन अपने बच्चे को अनाथ कर दिया। वहीं जिन माता-पिता ने अपने पुत्र रामवीर के हाथों सेवा करवाने की आस लगा रखी थी। उनकी मंशा भी अधूरी रह गई। उनके बुढ़ापे का सहारा भगवान ने छीन लिया। शहीद पुत्र रामवीर यादव का शव देखकर माता-पिता बार-बार बेसुध होकर जमीन पर गिर रहे थे।
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बुधवार को दीपावली पर दीपक जलाने और झालरों से घरों को रोशन करने की तैयारी गांव में हर घर में थी। गांव के बच्चे भी भारी मात्रा में पटाखा और फुलझड़ी खरीदकर लाए थे। लेकिन कश्मीर के लेह से आई एक खबर को सुन पूरे गांव में अंधेरा छा गया। घरों को रोशन करने के लिए लगी झालरें उतार ली गई। रोशनी से नहाने की उत्सुकता पाले यह गांव घोर अंधेरे के आगोश में चला गया। तेज आवाज वाले पटाखे भी खामोश हो गए।
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देश की हिफाजत के लिए लेह में तैनात गांव नगला जैसीराम का सपूत रामवीर यादव दीपावली के दिन ही शहीद हो गया था। वतन के लिए मर मिटने की कसम खाकर सेना में भर्ती हुआ रामवीर ने अपनी ड्यूटी तो पूरी कर दी, लेकिन अपने बच्चे को अनाथ कर दिया। वहीं जिन माता-पिता ने अपने पुत्र रामवीर के हाथों सेवा करवाने की आस लगा रखी थी। उनकी मंशा भी अधूरी रह गई। उनके बुढ़ापे का सहारा भगवान ने छीन लिया। शहीद पुत्र रामवीर यादव का शव देखकर माता-पिता बार-बार बेसुध होकर जमीन पर गिर रहे थे।
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