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न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन के साथ सस्ती बिजली उत्पादन करने की ओर एनटीपीसी ने बढ़ाए कदम
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दिबियापुर। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दिबियापुर स्थित एनटीपीसी में भी न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन करते हुए सस्ती बिजली का उत्पादन हो सकेगा। सोमवार को एनटीपीसी लिमिटेड, जापान की मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज और एमपीआई लिमिटेड ने औरैया गैस विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को.फायरिंग के प्रदर्शन के लिए दिल्ली में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
एनटीपीसी दिबियापुर में इस समय 664 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संयंत्र लगा है। इसमें प्रारंभिक ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस और गैस की अनुपलब्धता पर नेफ्था का प्रयोग होता है। अधिकारियों के अनुसार प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन नहीं होता है। जबकि गैस टरबाइन में हाइड्रोजन को.फायरिंग, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सोमवार को हुए समझौता के तहत दोनों कंपनियां अध्ययन करने के लिए सहभागिता करेंगी। एमओयू पर एनटीपीसी लिमिटेड के निदेशक परियोजना उज्ज्वल कांति भट्टाचार्य, मित्सुबिशी पावर इंडिया के सीएमडी तात्सुतो नगायासु और मित्सुबिशी पावर इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट हिरोयुकी शिनोहारा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
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इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों कंपनियां एनटीपीसी औरैया गैस आधारित संयुक्त चक्रीय विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को-फायरिंग शुरू करने को लेकर अध्ययन करने और प्रमुख कार्यों को चिहिन्त करने के लिए सहभागिता करेंगी। यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों जैसे कि पांच फीसदी, 15 फीसदी, 30 फीसदी, 50 फीसदी और 100 फीसदी के संबंध में को-फायरिंग के लिए महत्वपूर्ण कार्यों को चिहिन्त करेगा।
एनटीपीसी इस परियोजना के लिए जरूरी हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगी। यहां बता दें कि अभी यहां से उत्पादित बिजली लगभग 20 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है। इसके चलते अपेक्षा से काफी कम खरीदार मिलते हैं।
बिजली उत्पादन के लिए गैस टरबाइन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। प्राकृतिक गैस की कीमतें अत्यधिक होने के कारण उत्पादित होने वाली बिजली काफी महंगी होती है। हाइड्रोजन पानी से मिल जाता है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन को विभिन्न मात्रा में मिलाकर टरबाइन चलाने से बिजली की उत्पादन लागत कम आएगी और हमें सस्ती बिजली मिल सकेगी। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी न्यूनतम हो जाएगा। इससे देश में वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लक्ष्य को भी आसानी से पाया जा सकेगा।
संजय बाल्यान, अपर महाप्रबंधक एनटीपीसी
ऊर्जा रुपांतरण की महत्वपूर्ण पहल
एनटीपीसी लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक मनीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि देश शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ रहा है। इसे देखते हुए एनटीपीसी भारत की ऊर्जा रूपांतरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा विश्वास है कि एमएचआई लिमिटेड, जिसके पास इस तकनीक में वैश्विक विशेषज्ञता है। उसके साथ साझेदारी करने से हमें राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
कार्बन उत्सर्जन पर लगेगी रोक
मित्सुबिशी पावर इंडिया के सीएमडी तात्सुतो नगायासु ने कहा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर काफी महत्वपूर्ण है। जो एनटीपीसी व मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज की ओर से विद्युत उत्पादन क्षेत्र के डी-कार्बोनाइजेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के ज्वलंत मुद्दे को संबोधित करने को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दिखाती है।
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एनटीपीसी दिबियापुर में इस समय 664 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संयंत्र लगा है। इसमें प्रारंभिक ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस और गैस की अनुपलब्धता पर नेफ्था का प्रयोग होता है। अधिकारियों के अनुसार प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन नहीं होता है। जबकि गैस टरबाइन में हाइड्रोजन को.फायरिंग, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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सोमवार को हुए समझौता के तहत दोनों कंपनियां अध्ययन करने के लिए सहभागिता करेंगी। एमओयू पर एनटीपीसी लिमिटेड के निदेशक परियोजना उज्ज्वल कांति भट्टाचार्य, मित्सुबिशी पावर इंडिया के सीएमडी तात्सुतो नगायासु और मित्सुबिशी पावर इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट हिरोयुकी शिनोहारा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
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इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों कंपनियां एनटीपीसी औरैया गैस आधारित संयुक्त चक्रीय विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को-फायरिंग शुरू करने को लेकर अध्ययन करने और प्रमुख कार्यों को चिहिन्त करने के लिए सहभागिता करेंगी। यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों जैसे कि पांच फीसदी, 15 फीसदी, 30 फीसदी, 50 फीसदी और 100 फीसदी के संबंध में को-फायरिंग के लिए महत्वपूर्ण कार्यों को चिहिन्त करेगा।
एनटीपीसी इस परियोजना के लिए जरूरी हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगी। यहां बता दें कि अभी यहां से उत्पादित बिजली लगभग 20 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है। इसके चलते अपेक्षा से काफी कम खरीदार मिलते हैं।
बिजली उत्पादन के लिए गैस टरबाइन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। प्राकृतिक गैस की कीमतें अत्यधिक होने के कारण उत्पादित होने वाली बिजली काफी महंगी होती है। हाइड्रोजन पानी से मिल जाता है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन को विभिन्न मात्रा में मिलाकर टरबाइन चलाने से बिजली की उत्पादन लागत कम आएगी और हमें सस्ती बिजली मिल सकेगी। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी न्यूनतम हो जाएगा। इससे देश में वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लक्ष्य को भी आसानी से पाया जा सकेगा।
संजय बाल्यान, अपर महाप्रबंधक एनटीपीसी
ऊर्जा रुपांतरण की महत्वपूर्ण पहल
एनटीपीसी लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक मनीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि देश शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ रहा है। इसे देखते हुए एनटीपीसी भारत की ऊर्जा रूपांतरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा विश्वास है कि एमएचआई लिमिटेड, जिसके पास इस तकनीक में वैश्विक विशेषज्ञता है। उसके साथ साझेदारी करने से हमें राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
कार्बन उत्सर्जन पर लगेगी रोक
मित्सुबिशी पावर इंडिया के सीएमडी तात्सुतो नगायासु ने कहा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर काफी महत्वपूर्ण है। जो एनटीपीसी व मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज की ओर से विद्युत उत्पादन क्षेत्र के डी-कार्बोनाइजेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के ज्वलंत मुद्दे को संबोधित करने को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दिखाती है।