{"_id":"9f209bf684b910d96243011c44fb6b8c","slug":"opd-400-cross-found-treatment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओपीडी 400 पार, नहीं मिला उपचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओपीडी 400 पार, नहीं मिला उपचार
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Mon, 11 Jan 2016 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल के नए भवन में पहले दिन इलाज के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही। दोपहर एक बजे तक ओपीडी 400 मरीज पार कर गई। लेकिन अस्पताल में बिजली, पानी और स्टाफ की समस्या के कारण मरीज परेशान रहे। किसी को भी सही से उपचार नहीं मिला पाया। कोई दवाओं के लिए भटकता रहा तो कोई जांच के लिए। हालांकि स्टाफ सही समय पर पहुंचा। लेकिन बैठने का उचित प्रबंध न होेने के कारण डाक्टरों को भी परेशान होना पड़ा।
बिजली गुल, नहीं हो पाए एक्सरे
औरैया। जिला अस्पताल में पहले दिन ही मरीजों को एक्सरे के लिए भटकना पड़ा। बिजली न आने से मरीज सुबह 10 से दो बजे तक बैठे रहे। ओपीडी खत्म होने पर डाक्टर और टेक्नीशियन को जाता देख निराश मरीज भी वापस लौट गए। अपनी मां कुसमा देवी के हाथ टूटी हड्डी दिखाने पहुंचे शिव कुमार ने बताया कि पर्चा बनवाने के बाद डाक्टर ने एक्स-रे लिख दिया है। वह10 बजे से बैठा है। बिजली न आने से एक्सरे नहीं हो पाया। दर्द से क राह रही गंगा देवी के जब हाथ का दर्द असहनीय हो गया तो वह फर्श पर बैठ गईं। गंगा देवी ने बताया कि गिरने के कारण उसका हाथ टूट गया है। वह जिला अस्पताल में डाक्टर को दिखाने आई थी। लेकिन एक्सरे के कारण उन्हें दोपहर तक इंतजार करना पड़ा।
इलाज को तीन दिन से भटक रहा सुदामा
हाथ-पैरों में अकड़न और जलन की समस्या से जूझ रहा सुदामा तीन दिन से इलाज को भटक रहा है। चिचौली जिला अस्पताल में डाक्टर के कक्ष के बाहर खड़े सुदामा की आंखों में आसू भरे थे। उसने बताया कि उसके दोनों हाथों और पैर में जलन और दर्द है। हाथ काम नहीं कर रहे हैं। पिछले 15 दिन से बेकार है। रविवार को वह सीएचसी आया था। यहां डाक्टरों ने छुट्टी होने की बात कह वापस लौटा दिया। सोमवार को उसे सीएचसी से जिला अस्पताल के नए भवन में भेज दिया गया। वह 11 बजे से जिला अस्पताल में है। घंटों इंतजार के बाद एक डाक्टर ने पर्चे में खून और पेशाब की जांच लिखी।
विज्ञापन
ड्यूटी टाइम है डाक्टर साहब...
जिला अस्पताल में ओपीडी के समय डाक्टर और फार्मासिस्ट धूप सेंकते नजर आए। वहीं नए अस्पताल में कक्षों की जानकारी के लिए मरीज भटकते दिखाई दिए। दयालपुर से आए सर्वेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में डाक्टर दिखाई नहीं दे रहे हैं। कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। वह दो घंटे से डाक्टर को दिखाने के लिए भटक रहा है। तभी कैमरे का फ्लैश चमकता देख एक फार्मासिस्ट मरीज को अपने साथ नीचे ले गया और धूप का आनंद ले रहे डाक्टर साहब के सामने खड़ा कर दिया।
मरीजों को नहीं मिली चादर
औरैया। जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती मरीजों को चादर तक मुहैया नहीं कराई गई। महिला मरीज के तीमारदार संतोष ने बताया कि मरीज के लिए वह घर से बिस्तर लेकर आए हैं। यहां सिर्फ बेड मिला है। आप खुद ही देख लो.. खिड़कियां बंद नहीं होती है। इससे रात में हवा आती है। रविवार रात बिजली न आने के कारण वार्ड में सारी रात अंधेरा रहा है।
शाम ढलते ही वाहनों का टोटा
औरैया। शहर और दिबियापुर के बीच स्थित जिला अस्पताल पहुंचना मरीजों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। अस्पताल सूनसान क्षेत्र में स्थित होने के कारण शाम ढलते ही वाहनों का आवागमन बंद हो जाता है। जिला अस्पताल पहुंचने के लिए दिबियापुर या औरैया की ओर आने जाने वाले वाहनों का प्रयोग किया जा सकता है। इस रूट पर सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक वाहन चलते हैं। वाहन चालक सीधे दिबियापुर की सवारी भरते है। इससे अस्पताल के लिए वाहन का इंतजार कर रहे लोगों को परेशानी होती है। मैजिक चालक पप्पू शुक्ला ने बताया कि चिचौली के लिए सवारी बैठा ले तो फिर दिबियापुर तक खाली जाना पड़ता है। मजबूरी में उन्हें सवारी छोड़नी पड़ती है।
जिला अस्पताल के नए भवन में में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। व्यवस्थाएं चल रही हैं। कुछ नए डाक्टरों की तैनाती भी की गई है। शीघ्र ही सभी जांचे व यूनिट चालू हो जाएंगी।
-एन के मिश्रा (सीएमएस, जिला अस्पताल)
सीएचसी की सुविधाएं ठप
जिला अस्पताल नए भवन में शिफ्ट हो जाने के बाद सोमवार को सीएचसी (पुराना जिला अस्पताल) में सारी सुविधाएं ठप नजर आईं। सप्ताह भर पहले यहां मरीजों की लाइनें लगी रहती थी। अस्पताल में सात-आठ डाक्टर मरीजों का उपचार करते थे। लेकिन यहां का स्टाफ नए भवन चिलौली में शिफ्ट हो जाने से सीएचसी में सभी सुविधाएं खत्म हो गई हैं।
सोमवार को सीएचसी खुलते ही मरीजों का आना शुरू हो गया। दोपहर तक अस्पताल में 400 से अधिक मरीज पहुंचे, लेकिन मात्र एक डाक्टर के होने के कारण सैकड़ा भर से अधिक मरीज बिना उपचार के लौट गए। वहीं अस्पताल में मरीजों को दिखाने के लिए पर्चे तक नहीं बने। दवाओं को रखने के लिए अलमारी भी नए अस्पताल में शिफ्ट कर दी गई। इससे दवाएं जमीन पर पड़ी नजर आईं। अस्पताल में डाक्टरों के केबिन में ताला लटका मिला।
विज्ञापन
बिजली गुल, नहीं हो पाए एक्सरे
औरैया। जिला अस्पताल में पहले दिन ही मरीजों को एक्सरे के लिए भटकना पड़ा। बिजली न आने से मरीज सुबह 10 से दो बजे तक बैठे रहे। ओपीडी खत्म होने पर डाक्टर और टेक्नीशियन को जाता देख निराश मरीज भी वापस लौट गए। अपनी मां कुसमा देवी के हाथ टूटी हड्डी दिखाने पहुंचे शिव कुमार ने बताया कि पर्चा बनवाने के बाद डाक्टर ने एक्स-रे लिख दिया है। वह10 बजे से बैठा है। बिजली न आने से एक्सरे नहीं हो पाया। दर्द से क राह रही गंगा देवी के जब हाथ का दर्द असहनीय हो गया तो वह फर्श पर बैठ गईं। गंगा देवी ने बताया कि गिरने के कारण उसका हाथ टूट गया है। वह जिला अस्पताल में डाक्टर को दिखाने आई थी। लेकिन एक्सरे के कारण उन्हें दोपहर तक इंतजार करना पड़ा।
विज्ञापन
इलाज को तीन दिन से भटक रहा सुदामा
हाथ-पैरों में अकड़न और जलन की समस्या से जूझ रहा सुदामा तीन दिन से इलाज को भटक रहा है। चिचौली जिला अस्पताल में डाक्टर के कक्ष के बाहर खड़े सुदामा की आंखों में आसू भरे थे। उसने बताया कि उसके दोनों हाथों और पैर में जलन और दर्द है। हाथ काम नहीं कर रहे हैं। पिछले 15 दिन से बेकार है। रविवार को वह सीएचसी आया था। यहां डाक्टरों ने छुट्टी होने की बात कह वापस लौटा दिया। सोमवार को उसे सीएचसी से जिला अस्पताल के नए भवन में भेज दिया गया। वह 11 बजे से जिला अस्पताल में है। घंटों इंतजार के बाद एक डाक्टर ने पर्चे में खून और पेशाब की जांच लिखी।
विज्ञापन
ड्यूटी टाइम है डाक्टर साहब...
जिला अस्पताल में ओपीडी के समय डाक्टर और फार्मासिस्ट धूप सेंकते नजर आए। वहीं नए अस्पताल में कक्षों की जानकारी के लिए मरीज भटकते दिखाई दिए। दयालपुर से आए सर्वेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में डाक्टर दिखाई नहीं दे रहे हैं। कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। वह दो घंटे से डाक्टर को दिखाने के लिए भटक रहा है। तभी कैमरे का फ्लैश चमकता देख एक फार्मासिस्ट मरीज को अपने साथ नीचे ले गया और धूप का आनंद ले रहे डाक्टर साहब के सामने खड़ा कर दिया।
मरीजों को नहीं मिली चादर
औरैया। जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती मरीजों को चादर तक मुहैया नहीं कराई गई। महिला मरीज के तीमारदार संतोष ने बताया कि मरीज के लिए वह घर से बिस्तर लेकर आए हैं। यहां सिर्फ बेड मिला है। आप खुद ही देख लो.. खिड़कियां बंद नहीं होती है। इससे रात में हवा आती है। रविवार रात बिजली न आने के कारण वार्ड में सारी रात अंधेरा रहा है।
शाम ढलते ही वाहनों का टोटा
औरैया। शहर और दिबियापुर के बीच स्थित जिला अस्पताल पहुंचना मरीजों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। अस्पताल सूनसान क्षेत्र में स्थित होने के कारण शाम ढलते ही वाहनों का आवागमन बंद हो जाता है। जिला अस्पताल पहुंचने के लिए दिबियापुर या औरैया की ओर आने जाने वाले वाहनों का प्रयोग किया जा सकता है। इस रूट पर सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक वाहन चलते हैं। वाहन चालक सीधे दिबियापुर की सवारी भरते है। इससे अस्पताल के लिए वाहन का इंतजार कर रहे लोगों को परेशानी होती है। मैजिक चालक पप्पू शुक्ला ने बताया कि चिचौली के लिए सवारी बैठा ले तो फिर दिबियापुर तक खाली जाना पड़ता है। मजबूरी में उन्हें सवारी छोड़नी पड़ती है।
जिला अस्पताल के नए भवन में में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। व्यवस्थाएं चल रही हैं। कुछ नए डाक्टरों की तैनाती भी की गई है। शीघ्र ही सभी जांचे व यूनिट चालू हो जाएंगी।
-एन के मिश्रा (सीएमएस, जिला अस्पताल)
सीएचसी की सुविधाएं ठप
जिला अस्पताल नए भवन में शिफ्ट हो जाने के बाद सोमवार को सीएचसी (पुराना जिला अस्पताल) में सारी सुविधाएं ठप नजर आईं। सप्ताह भर पहले यहां मरीजों की लाइनें लगी रहती थी। अस्पताल में सात-आठ डाक्टर मरीजों का उपचार करते थे। लेकिन यहां का स्टाफ नए भवन चिलौली में शिफ्ट हो जाने से सीएचसी में सभी सुविधाएं खत्म हो गई हैं।
सोमवार को सीएचसी खुलते ही मरीजों का आना शुरू हो गया। दोपहर तक अस्पताल में 400 से अधिक मरीज पहुंचे, लेकिन मात्र एक डाक्टर के होने के कारण सैकड़ा भर से अधिक मरीज बिना उपचार के लौट गए। वहीं अस्पताल में मरीजों को दिखाने के लिए पर्चे तक नहीं बने। दवाओं को रखने के लिए अलमारी भी नए अस्पताल में शिफ्ट कर दी गई। इससे दवाएं जमीन पर पड़ी नजर आईं। अस्पताल में डाक्टरों के केबिन में ताला लटका मिला।