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लाखों बच्चों को नहीं मिली %दो बूंद जिंदगी की
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बेला (औरैया)। कोरोना काल में पल्स पोलियो अभियान पूरी तरह से ठप रहा है। छह महीने से पांच साल तक के दो लाख पचपन हजार बच्चों को दो बूंद जिंदगी की नहीं मिल पाई है।
डोर टू डोर पोलियो ड्रॉप पिलाने का काम आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करती हैं। वह कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में जुटी हैं। इसके कारण अभियान बंद पड़ा है। तीसरी लहर में विशेषज्ञ बच्चों को ज्यादा खतरा बता रहे हैं। लेकिन इस बीच पल्स पोलियो अभियान बंद होना भी चिंता का विषय है। सीएचसी, पीएचसी व सरकारी अस्पतालों में भी पल्स पोलियो ड्रॉप नहीं पिलाई जा रही है।
टीकाकरण भी प्रभावित
बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ है। पहली लहर में एक माह के लिए टीकाकरण बंद हुआ था। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण में एक दो सप्ताह या फिर एक माह की देरी से ज्यादा दिक्कत नहीं होती है लेकिन टीकाकरण बेहद जरूरी है।
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ये टीके हैं बेहद जरूरी
जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी
जन्म से छह सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
जन्म से 10 सप्ताह पर - पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2
14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
नौ से 12 महीने पर- मीजेल्स-रुबैला-1, पीसीवी-बूस्टर डोज और जपानी इंसेफेलाइटिस-1
14 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रुबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1 और जापानी इंसेफेलाइटिस-2
बच्चों का टीकाकरण अभियान पूरी तरह से चलता रहा है। इसे एक भी दिन बंद नहीं किया गया है। पल्स पोलियो अभियान कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहा है। इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। - डॉ. वीपी शाक्य सीएचसी अधीक्षक बिधूना
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डोर टू डोर पोलियो ड्रॉप पिलाने का काम आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करती हैं। वह कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में जुटी हैं। इसके कारण अभियान बंद पड़ा है। तीसरी लहर में विशेषज्ञ बच्चों को ज्यादा खतरा बता रहे हैं। लेकिन इस बीच पल्स पोलियो अभियान बंद होना भी चिंता का विषय है। सीएचसी, पीएचसी व सरकारी अस्पतालों में भी पल्स पोलियो ड्रॉप नहीं पिलाई जा रही है।
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टीकाकरण भी प्रभावित
बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ है। पहली लहर में एक माह के लिए टीकाकरण बंद हुआ था। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण में एक दो सप्ताह या फिर एक माह की देरी से ज्यादा दिक्कत नहीं होती है लेकिन टीकाकरण बेहद जरूरी है।
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ये टीके हैं बेहद जरूरी
जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी
जन्म से छह सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
जन्म से 10 सप्ताह पर - पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2
14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
नौ से 12 महीने पर- मीजेल्स-रुबैला-1, पीसीवी-बूस्टर डोज और जपानी इंसेफेलाइटिस-1
14 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रुबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1 और जापानी इंसेफेलाइटिस-2
बच्चों का टीकाकरण अभियान पूरी तरह से चलता रहा है। इसे एक भी दिन बंद नहीं किया गया है। पल्स पोलियो अभियान कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहा है। इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। - डॉ. वीपी शाक्य सीएचसी अधीक्षक बिधूना