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प्लास्टिक सिटी में फैक्टरी नहीं, हो रही खेती
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05एयूआरपी11- प्लास्टिक सिटी में हो रही खेती और टूटी बाउंड्री।
- फोटो : AURAIYA
औरैया। प्लास्टिक सिटी में उद्योग लगाने की उम्मीद कहीं दिखाई नहीं दे रही। यहां पर किसान खेती कर रहे हैं। बाउंड्री भी तोड़ डाली है। उचित मुआवजा न मिलने पर किसानों ने कोर्ट में मुकदमा भी दायर कर रखा है। वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में निवेशक भी इस मामले में रुचि नहीं दिखा रहे। जिन आठ गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई है। उनमें चमरौआ, उसरारी, डेरा बंजारन, कढ़ोरे का पुरवा, लखनपुर, लुखरपुरवा, सुजानपुर, हंसे का पुरवा शामिल हैं।
जिले के विकास के लिए सरकार ने प्लास्टिक सिटी बनाने के लिए 2003 में जमीन अधिगृहीत की थी। आठ किसानों की लगभग आठ किमी के दायरे में जमीन ली गई। इसकी बाउंड्री, पोल आदि लगाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन इसके बाद काम आगे न बढ़ सका। दूसरी ओर किसान उचित मुआवजा न मिलने का आरोप लगाकर विरोध कर रहे हैं। वे यहां खेती कर रहे हैं। बताते हैं कि यहां पराली भी जलाई गई है। यहां पर पराली और राख पड़ी है।
मामले में डीएम से भी कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन आज तक नतीजा नहीं निकला। वहीं, किसानों के विरोध को देखते हुए निवेशक भी रुचि नहीं दिखा रहे। सात साल बीत चुके हैं लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले दो-तीन लोगों को कब्जा लेने आना था, लेकिन वे भी नहीं आएं।
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दूसरी ओर रघुवीर सिंह यादव, सुदामा प्रसाद, ओम प्रकाश सिंह, गेंदा लाल आदि किसानों ने बताया कि मुख्य मार्ग, आज के रेट से जमीन का चार गुना मुआवजा, एक परिवार के एक सदस्य को नौकरी व आसपास के गांवों के विकास का वादा किया गया था। ये वादे पूरे नहीं किए गए हैं। इससे आक्रोशित किसान कोर्ट चले गए।
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमकार सिंह राजपूत ने बताया कि किसानों को उचित मुआवजा की मांग को लेकर आंदोलित हैं। 18 बार अनशन कर चुके हैं। अखिलेश सरकार में रिकार्ड 35 दिन अनशन किया था। डीएम से कई बार वार्ता हुई। लेकिन निष्कर्ष नहीं निकला। 618 किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई। इसमें से114 लोग मुआवजे के लिए मुकदमा लड़ रहे हैं। वहीं, 135 किसान भूमिहीन हो गए हैं।
उधर, जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों को उचित मुआवजा दे दिया गया है। वे कब्जा लेने में रोड़ा अटका रहे हैं। वहां पर ख्ेाती भी कर रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों को कब्जा लेने आना था, लेकिन अभी नहीं आए।
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जिले के विकास के लिए सरकार ने प्लास्टिक सिटी बनाने के लिए 2003 में जमीन अधिगृहीत की थी। आठ किसानों की लगभग आठ किमी के दायरे में जमीन ली गई। इसकी बाउंड्री, पोल आदि लगाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन इसके बाद काम आगे न बढ़ सका। दूसरी ओर किसान उचित मुआवजा न मिलने का आरोप लगाकर विरोध कर रहे हैं। वे यहां खेती कर रहे हैं। बताते हैं कि यहां पराली भी जलाई गई है। यहां पर पराली और राख पड़ी है।
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मामले में डीएम से भी कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन आज तक नतीजा नहीं निकला। वहीं, किसानों के विरोध को देखते हुए निवेशक भी रुचि नहीं दिखा रहे। सात साल बीत चुके हैं लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले दो-तीन लोगों को कब्जा लेने आना था, लेकिन वे भी नहीं आएं।
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दूसरी ओर रघुवीर सिंह यादव, सुदामा प्रसाद, ओम प्रकाश सिंह, गेंदा लाल आदि किसानों ने बताया कि मुख्य मार्ग, आज के रेट से जमीन का चार गुना मुआवजा, एक परिवार के एक सदस्य को नौकरी व आसपास के गांवों के विकास का वादा किया गया था। ये वादे पूरे नहीं किए गए हैं। इससे आक्रोशित किसान कोर्ट चले गए।
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमकार सिंह राजपूत ने बताया कि किसानों को उचित मुआवजा की मांग को लेकर आंदोलित हैं। 18 बार अनशन कर चुके हैं। अखिलेश सरकार में रिकार्ड 35 दिन अनशन किया था। डीएम से कई बार वार्ता हुई। लेकिन निष्कर्ष नहीं निकला। 618 किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई। इसमें से114 लोग मुआवजे के लिए मुकदमा लड़ रहे हैं। वहीं, 135 किसान भूमिहीन हो गए हैं।
उधर, जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों को उचित मुआवजा दे दिया गया है। वे कब्जा लेने में रोड़ा अटका रहे हैं। वहां पर ख्ेाती भी कर रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों को कब्जा लेने आना था, लेकिन अभी नहीं आए।