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गलती लेखपाल की, खामियाजा भुगत रहे किसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया
Updated Thu, 23 Apr 2015 11:55 PM IST
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लेखपाल की गलती का खामियाजा छोटे-छोटे किसान भुगत रहे
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हैं। राशनकार्डों के सर्वे में लेखपाल ने दिबियापुर क्षेत्र के ग्राम
कन्हई का पुर्वा गांव के दर्जन भर से अधिक उन किसानों को भी पांच-पांच एकड़
भूमि का मालिक दर्शा दिया, जिसके पास सिर्फ पांच से दस डेसीमल जमीन है।
किसानों को यह बात तब पता चली जब वे राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने गए। जमीन अधिक होने के कारण किसान बीपीएल और अंत्योदय कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पाए। परेशान किसानों ने अफसरों से गुहार लगाई, किंतु उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। किसानाें का आरोप है कि लेखपाल ने जानबूझ कर उनके साथ ऐसा किया है।
ग्राम कन्हई का पुर्वा के लोगों का राशनकार्ड बनवाने के लिए लेखपाल वीरेंद्र प्रजापति ने सर्वे किया था। किसानों का आरोप है कि लेखपाल ने घर-घर न जाकर एक जगह बैठक कर ही सर्वे कर लिया। लेखपाल ने सर्वे में जमकर मनमानी की है। गांव के सहदेव सिंह के पास गांव में मात्र 10 डेसीमल जमीन है। इनका आरोप है कि लेखपाल वीरेंद्र प्रजापति ने मनमानी की है।
बताया कि सर्वे रिपोर्ट में उनके नाम पांच एकड़ जमीन दिखा दी। इस कारण अब वह बीपीएल राशनकार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पा रहा है। यहीं के किसान सहदेव सिंह का कहना है कि उनके पास सिर्फ 65 डेसीमल जमीन है, जिस पर वे खेती करते हैं।
लेखपाल ने राशनकार्ड की सर्वे रिपोर्ट में पांच एकड़ जमीन दिखा दी। इस कारण पात्र होने के बाद भी उनका नाम बीपीएल सूची में दर्ज नहीं हो सकेगा। किसान आत्माराम ने बताया कि उसके पास 30 डेसीमल पुश्तैनी जमीन है।
लेखपाल ने सरकारी दस्तावेजाें में पांच एकड़ की जमीन का मालिक बना दिया है। अब वे गरीबी रेखा से नीचे के राशन कार्ड का आनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
यही स्थिति किसान राजेंद्र सिंह की है। इनका आरोप है कि लेखपाल ने जानबूझकर सरकारी अभिलेखों में 24 डेसीमल जमीन को पांच एकड़ दर्ज कर दी। बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाकर दर्ज गलत भूमि को ठीक कराने की गुहार लगाई लेकिन अभी तक समस्या दूर नहीं हुई। इस कारण वे अपना राशनकार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं।
राशनकार्डों के सर्वे में हुई धांधली संबंधी उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है। इस संबंध में जानकारी की जाएगी अगर लेखपाल की गलती पाई गई तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी।
-रामनयन, तहसीलदार, सदर।
किसानों को यह बात तब पता चली जब वे राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने गए। जमीन अधिक होने के कारण किसान बीपीएल और अंत्योदय कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पाए। परेशान किसानों ने अफसरों से गुहार लगाई, किंतु उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। किसानाें का आरोप है कि लेखपाल ने जानबूझ कर उनके साथ ऐसा किया है।
ग्राम कन्हई का पुर्वा के लोगों का राशनकार्ड बनवाने के लिए लेखपाल वीरेंद्र प्रजापति ने सर्वे किया था। किसानों का आरोप है कि लेखपाल ने घर-घर न जाकर एक जगह बैठक कर ही सर्वे कर लिया। लेखपाल ने सर्वे में जमकर मनमानी की है। गांव के सहदेव सिंह के पास गांव में मात्र 10 डेसीमल जमीन है। इनका आरोप है कि लेखपाल वीरेंद्र प्रजापति ने मनमानी की है।
बताया कि सर्वे रिपोर्ट में उनके नाम पांच एकड़ जमीन दिखा दी। इस कारण अब वह बीपीएल राशनकार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पा रहा है। यहीं के किसान सहदेव सिंह का कहना है कि उनके पास सिर्फ 65 डेसीमल जमीन है, जिस पर वे खेती करते हैं।
लेखपाल ने राशनकार्ड की सर्वे रिपोर्ट में पांच एकड़ जमीन दिखा दी। इस कारण पात्र होने के बाद भी उनका नाम बीपीएल सूची में दर्ज नहीं हो सकेगा। किसान आत्माराम ने बताया कि उसके पास 30 डेसीमल पुश्तैनी जमीन है।
लेखपाल ने सरकारी दस्तावेजाें में पांच एकड़ की जमीन का मालिक बना दिया है। अब वे गरीबी रेखा से नीचे के राशन कार्ड का आनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
यही स्थिति किसान राजेंद्र सिंह की है। इनका आरोप है कि लेखपाल ने जानबूझकर सरकारी अभिलेखों में 24 डेसीमल जमीन को पांच एकड़ दर्ज कर दी। बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाकर दर्ज गलत भूमि को ठीक कराने की गुहार लगाई लेकिन अभी तक समस्या दूर नहीं हुई। इस कारण वे अपना राशनकार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं।
राशनकार्डों के सर्वे में हुई धांधली संबंधी उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है। इस संबंध में जानकारी की जाएगी अगर लेखपाल की गलती पाई गई तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी।
-रामनयन, तहसीलदार, सदर।