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टीबी रोगियों के खाते में नहीं पहुंच रहे रुपये
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औरैया। खाता संख्या व आधार कार्ड मिसमेच होने से टीबी रोगियों को शासन से मिलने वाली आथिर्क सहायता नहीं मिल पा रही हैं। सीएमओ ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को भी निर्देशित किया है कि वह टीबी रोग पीड़ित की जानकारी मिलने पर विभाग को अवगत कराएं। ऐसे रोगी क्षय रोग विभाग में जाकर संपर्क करें।
जिले में टीबी के 1150 रोगी हैं। इन सभी रोगियों को शासन द्वारा निशुल्क दवाओं के साथ ही 500 रुपये प्रतिमाह इलाज के दौरान दिए जाते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जानकारी मिली है कि कई टीबी रोगी खाताधारकों के खातों में शासन की आर्थिक मदद राशि नहीं पहुंच रही है। कारण खाता संख्या व आधार नंबर का मिसमेच होना है। बताया कि जिन टीबी रोगियों के खाते में धनराशि नहीं पहुंच रही है वह क्षय रोग कार्यालय में बैंक की पासबुक व आधार कार्ड के साथ संपर्क करें। जिससे कि 16 सितंबर तक डीबीटी के माध्यम से सभी का भुगतान किया जा सके और वह नि:क्षय पोषण योजना का लाभ ले सकें।
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी प्राइवेट प्रैक्टिसनर, नर्सिंगहोम, कारपोरेट हॉस्पिटल एवं पैथौलॉजी द्वारा उपचारित किए जा रहे व खोजे गए मरीजों का भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में टीबी नोटीफिकेशन कराना अनिवार्य है। यदि इसमें लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनके संस्थान का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। जिले में संचालित सभी दवा विक्रेताओं के द्वारा शेड्यूल एच-वन के तहत टीबी दवाईयों का ब्योरा रखना एवं इसकी जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय में देना अनिवार्य है।
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जिले में टीबी के 1150 रोगी हैं। इन सभी रोगियों को शासन द्वारा निशुल्क दवाओं के साथ ही 500 रुपये प्रतिमाह इलाज के दौरान दिए जाते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जानकारी मिली है कि कई टीबी रोगी खाताधारकों के खातों में शासन की आर्थिक मदद राशि नहीं पहुंच रही है। कारण खाता संख्या व आधार नंबर का मिसमेच होना है। बताया कि जिन टीबी रोगियों के खाते में धनराशि नहीं पहुंच रही है वह क्षय रोग कार्यालय में बैंक की पासबुक व आधार कार्ड के साथ संपर्क करें। जिससे कि 16 सितंबर तक डीबीटी के माध्यम से सभी का भुगतान किया जा सके और वह नि:क्षय पोषण योजना का लाभ ले सकें।
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सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी प्राइवेट प्रैक्टिसनर, नर्सिंगहोम, कारपोरेट हॉस्पिटल एवं पैथौलॉजी द्वारा उपचारित किए जा रहे व खोजे गए मरीजों का भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में टीबी नोटीफिकेशन कराना अनिवार्य है। यदि इसमें लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनके संस्थान का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। जिले में संचालित सभी दवा विक्रेताओं के द्वारा शेड्यूल एच-वन के तहत टीबी दवाईयों का ब्योरा रखना एवं इसकी जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय में देना अनिवार्य है।
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