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जिले में बढ़ रही हाइपरटेंशन व पीलिया के मरीजों की संख्या
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औरैया। 50 शैय्या युक्त जिला अस्पताल में इन दिनों लगातार हाईपरटेंशन के मरीजों के साथ एनीमिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का समय से इलाज नहीं कराया तो जानलेवा भी हो सकता है।
अचानक मौसम में बदलाव और दूषित पेयजल का सेवन करने से इन दिनों बड़ी संख्या में पीलिया से ग्रस्त लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। आने वाले मरीजों में एक दिन में पीलिया के तीस मरीज मिल रहे हैं तो वहीं हाईपरटेंशन के मरीजों की संख्या 50 पहुंच रही है। चिकित्सकों ने बताया कि इन बीमारियों के साथ एनीमिया के मरीज भी बढ़े हैै। डॉ. अमित पोरवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि पीलिया के रोग में मरीज की आंखों का रंग पीला हो जाता है और भोजन को देखने व सूंघने से उल्टी आने लगती है। बुधवार को आने वाले मरीजों में एक को एडमिट करना पड़ा है जिसका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि पीलिया से बचाव के लिए पीने एवं खाना पकाने के लिए सुरक्षित और साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए। कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डालना चाहिए। पानी को पीने से पहले उबाल लेना चाहिए। बताया कि हाइपरटेंशन के मरीजों में 80 फीसदी लोग पैदल नहीं चल रहे हैं। बीपी के मरीजों में सर्वाधिक युवाओं की संख्या रहती है। स्मार्ट फोन इस तरह के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। अनावश्यक तनाव कारण हाईपरटेंशन की चपेट में आ रहे हैं। जंक फूड व मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से अचानक फैट बनने के साथ बीपी की समस्या हो रही है। एनीमिया के विषय में कहा कि यह रक्त में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन नहीं होता है उसे एनीमिया कहते है। इसका मुख्य लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना व हाथों और पैरों का ठंडा होना है। इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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डॉ. मो. जाहिद खान ने बताया कि एनीमिया की शिकायत बवासीर, एस्पिरिन और इबूप्रोफेन का इस्तेमाल करने व महिलाओं में मासिक धर्म और प्रसव के समय होता है। इससे बचाव के लिए आयरन युक्त स्वास्थ आहार का सेवन चाय व काफी का सेवन करना चाहिए। विटामिन सी का सेवन ज्यादा करे। इसका परीक्षण कंप्लीट ब्लड काउंटिंग से होता है। इसमें हीमोंग्लोबिन चेक किया जाता है। विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड का सेवन करें व जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह ले।
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अचानक मौसम में बदलाव और दूषित पेयजल का सेवन करने से इन दिनों बड़ी संख्या में पीलिया से ग्रस्त लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। आने वाले मरीजों में एक दिन में पीलिया के तीस मरीज मिल रहे हैं तो वहीं हाईपरटेंशन के मरीजों की संख्या 50 पहुंच रही है। चिकित्सकों ने बताया कि इन बीमारियों के साथ एनीमिया के मरीज भी बढ़े हैै। डॉ. अमित पोरवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि पीलिया के रोग में मरीज की आंखों का रंग पीला हो जाता है और भोजन को देखने व सूंघने से उल्टी आने लगती है। बुधवार को आने वाले मरीजों में एक को एडमिट करना पड़ा है जिसका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि पीलिया से बचाव के लिए पीने एवं खाना पकाने के लिए सुरक्षित और साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए। कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डालना चाहिए। पानी को पीने से पहले उबाल लेना चाहिए। बताया कि हाइपरटेंशन के मरीजों में 80 फीसदी लोग पैदल नहीं चल रहे हैं। बीपी के मरीजों में सर्वाधिक युवाओं की संख्या रहती है। स्मार्ट फोन इस तरह के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। अनावश्यक तनाव कारण हाईपरटेंशन की चपेट में आ रहे हैं। जंक फूड व मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से अचानक फैट बनने के साथ बीपी की समस्या हो रही है। एनीमिया के विषय में कहा कि यह रक्त में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन नहीं होता है उसे एनीमिया कहते है। इसका मुख्य लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना व हाथों और पैरों का ठंडा होना है। इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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डॉ. मो. जाहिद खान ने बताया कि एनीमिया की शिकायत बवासीर, एस्पिरिन और इबूप्रोफेन का इस्तेमाल करने व महिलाओं में मासिक धर्म और प्रसव के समय होता है। इससे बचाव के लिए आयरन युक्त स्वास्थ आहार का सेवन चाय व काफी का सेवन करना चाहिए। विटामिन सी का सेवन ज्यादा करे। इसका परीक्षण कंप्लीट ब्लड काउंटिंग से होता है। इसमें हीमोंग्लोबिन चेक किया जाता है। विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड का सेवन करें व जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह ले।