फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Every facility in NRC ward, yet only 27 children admitted in five months

एनआरसी वार्ड में हर सुविधा, फिर भी पांच माह में भर्ती हुए सिर्फ 27 बच्चे

Mon, 06 Jun 2022 01:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 01:15 AM IST
विज्ञापन
Every facility in NRC ward, yet only 27 children admitted in five months
बच्चे को झूला झुलाती महिला। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। सरकार कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की योजना चला रही है, पर जमीनी हकीकत में जिम्मेदार कुपोषित बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे है। यह अव्यवस्था तब है, जब एनआरसी वार्ड में सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया हैं।
विज्ञापन

जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित तो किया जा रहा है, पर उनका विकास हो और वह सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ रहें। इसके लिए उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी ) पहुंचाने में जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। चिचौली स्थित 100 शैया युक्त जिला चिकित्सालय में बने एनआरसी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पांच माह में सिर्फ 27 बच्चे ही भर्ती हुए हैं और दिखाने 100 से अधिक बच्चे आ चुके हैं।
विज्ञापन

जबकि जिले में कुपोषित 4,632 और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 485 है। वर्तमान स्थिति में एनआरसी वार्ड में कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर बच्चे की नियमित जांच, वजन की तौल, हर दो घंटे में पौष्टिक आहार व खेलने के लिए झूले की भी व्यवस्था है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता बच्चों को कुपोषित से पोषित बनाने में बाधा बन रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चे को भर्ती कराने की जिम्मेदारी आशा व आंगनबाड़ी की
शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार बच्चे के जन्म लेने के बाद उन्हें टीके के साथ ही पौष्टिक आहार आंगनबाड़ी और आशा के माध्यम से पहुंचा रही है। जिससे बच्चे की सेहत अच्छी रहे। अगर कोई बच्चा उम्र के हिसाब से कमजोर है। जांच में कुपोषित और अति कुपोषित मिलता है तो उसकी सेहत सुधारने के लिए आशा व आंगनबाड़ी उनकी की खून जांच कराती हैं। वह सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ हो सके, इसके लिए उन्हें एनआरसी में भर्ती कराना आशा व आंगनबाड़ी की जिम्मेदारी है। एनआरसी में बच्चे को 14 दिनों तक रखा जाता है।

100 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने कहा कि कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को गांव-गांव जाकर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चिह्नित करती हैं। एनआरसी में बेड खाली हैं और इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उच्चाधिकारियों को भी इस संबंध में पत्र लिखा जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed