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दीप खुद बन जाइये, रात गहरी जगमगाए साथ मिलकर आइए
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औरैया। हिंदी प्रोत्साहन निधि के बैनर तले निधि कार्यालय पर काव्य पाठ का आयोजन किया गया। रचनाकारों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कवियों की पुस्तिकाओं का विमोचन भी हुआ।
मुख्य अतिथि विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।
काव्य पाठ की शुरूआत डॉ. गुरुप्रताप वर्मा की सरस्वती वंदना राष्ट्र प्रेम उर में इतना भर, वंदेमातरम के निकलें स्वर से हुई। इसके बाद ओज के कवि गोपाल पांडेय ने अपनी रचना ‘आए थे कहां से वो साथ किसके थे, तिरंगे को झुकाने वाले वो हाथ किसके थे’ सुनाकर श्रोताओं में देश भक्ति का राग भर दिया। कवि अभिषेक तिवारी ने ‘जीवन के स्वर्णिम पथ पर खुद को ही बढ़ना पड़ता है’ रचना सुनाई।
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पंथ नारायण पांडेय ने ‘ हे हमारे देश के नेता किसी दिन गांव आओ’ कविता सुनाई। कवि डॉ. गोविंद द्विवेदी ने ‘छोड़िए निंदा तमस की, दीप खुद बन जाइये, रात गहरी जगमगाए साथ मिलकर आइए,’ सुकवि हरिशंकर मिश्र ने ‘अर्थहीन हो गए पुराने मुहावरों को नई तरह से लिखा जाए’।
कवि सुरेश चतुर्वेदी ने ‘इस बदले हुए जमाने के हम प्रहरी हो गए’। पीयूषमणि मिश्रा ने ‘ओम’ नाम आदर्श है, ‘नारायण’ आधार चतुर्वेदी ने निलय सुभग, मंजुल सत-शिव सार। देवी चरन वर्मा दिव्यांशु ‘जैसे-जैसे जीवन बीता उलझे माया जाल में’। गीता चतुर्वेदी ने ‘शंकर-शंकर है शिव शंकर है अभयंकर हे शुभकारी’।
डॉ. अजय शुक्ल अंजाम ने मां ने जो बताई उस राह पे चलेंगे आप सुनाई।
इसी क्रम में अनिरुद्ध त्रिपाठी ने ‘तुम न रूप की धूप समेटो आंगन से’ कविता सुनाकर तालियां बटोरी। इस दौरान साहित्यकार पं.ओम नारायण चतुर्वेदी की तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राम स्वरूप दीक्षित ने की। संचालन गीतकार अनिरूद्ध त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर बृजेश बंधु, आशीष मिश्रा, डॉ. प्रभा चतुर्वेदी, प्रद्युम्न चतुर्वेदी, अंजनी चतुर्वेदी आदि लोग उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।
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काव्य पाठ की शुरूआत डॉ. गुरुप्रताप वर्मा की सरस्वती वंदना राष्ट्र प्रेम उर में इतना भर, वंदेमातरम के निकलें स्वर से हुई। इसके बाद ओज के कवि गोपाल पांडेय ने अपनी रचना ‘आए थे कहां से वो साथ किसके थे, तिरंगे को झुकाने वाले वो हाथ किसके थे’ सुनाकर श्रोताओं में देश भक्ति का राग भर दिया। कवि अभिषेक तिवारी ने ‘जीवन के स्वर्णिम पथ पर खुद को ही बढ़ना पड़ता है’ रचना सुनाई।
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पंथ नारायण पांडेय ने ‘ हे हमारे देश के नेता किसी दिन गांव आओ’ कविता सुनाई। कवि डॉ. गोविंद द्विवेदी ने ‘छोड़िए निंदा तमस की, दीप खुद बन जाइये, रात गहरी जगमगाए साथ मिलकर आइए,’ सुकवि हरिशंकर मिश्र ने ‘अर्थहीन हो गए पुराने मुहावरों को नई तरह से लिखा जाए’।
कवि सुरेश चतुर्वेदी ने ‘इस बदले हुए जमाने के हम प्रहरी हो गए’। पीयूषमणि मिश्रा ने ‘ओम’ नाम आदर्श है, ‘नारायण’ आधार चतुर्वेदी ने निलय सुभग, मंजुल सत-शिव सार। देवी चरन वर्मा दिव्यांशु ‘जैसे-जैसे जीवन बीता उलझे माया जाल में’। गीता चतुर्वेदी ने ‘शंकर-शंकर है शिव शंकर है अभयंकर हे शुभकारी’।
डॉ. अजय शुक्ल अंजाम ने मां ने जो बताई उस राह पे चलेंगे आप सुनाई।
इसी क्रम में अनिरुद्ध त्रिपाठी ने ‘तुम न रूप की धूप समेटो आंगन से’ कविता सुनाकर तालियां बटोरी। इस दौरान साहित्यकार पं.ओम नारायण चतुर्वेदी की तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राम स्वरूप दीक्षित ने की। संचालन गीतकार अनिरूद्ध त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर बृजेश बंधु, आशीष मिश्रा, डॉ. प्रभा चतुर्वेदी, प्रद्युम्न चतुर्वेदी, अंजनी चतुर्वेदी आदि लोग उपस्थित रहे।