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नहाय खाय के साथ शुरू हुई छठ पूजा
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औरैया। आरोग्य, सौभाग्य और सर्व सुख प्रदाता सूर्य की उपासना का महापर्व छठ पूजा सोमवार को नहाय व खाय के साथ शुरू हुई। बतादें कि 11 नवंबर को छठ पर्व शहर में दिबियापुर रोड पर मनाया जाएगा। नहर में गंदगी होने के चलते लोगों से सफाई की मांग की है।
दिवाली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज के बाद सोमवार को बाजारों में छठ पर्व की तैयारियों को लेकर भीड़ रही। दिबियापुर रोड पर नहर किनारे रहने वाले लोगों ने यह पर्व धूमधाम से मनाया। नहर में गंदगी के कारण लोगों ने कृत्रिम तालाब बनाकर 11 नवंबर को छठ पूजा मनाए जाने की बात कही है। इधर कुछ लोग ने स्थानीय प्रशासन से नहर घाट किनारे सफाई कराए जाने की मांग की है। सोमवार को नहाय-खाय के साथ पर्व की शुरुआत हुई। पहले दिन सोमवार को व्रती ने स्नान कर नए वस्त्र धारण कर पूजा के बाद दाल, कद्दू की सब्जी और चावल प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया।
राजेश यादव ने बताया कि छठ पूजा के दूसरे दिन मंगलवार को खरना होगा। इस दिन पूजा में महिलाएं शाम के समय मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाती हैं। महिलाओं को 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही छटी मइया का घर में आगमन होता है। बताया कि तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। नहर में गंदगी के चलते एक घर की छत पर कृत्रिम तालाब बनाया जाएगा। बताया कि तीसरे दिन व्रती महिलाएं उपवास रखतीं हैं।
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साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करतीं हैं। शाम के समय नए वस्त्र पहनकर परिवार के साथ कृत्रिम तालाब में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्ध्य देंगी। तीसरे दिन का निर्जला उपवास रातभर जारी रहता है। चौथे दिन उगले सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। अर्ध्य देने के बाद व्रती महिलाएं सात या 11 बार परिक्रमा लगाती हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। 36 घंटे का व्रत सूर्य को अर्ध्य देने के बाद तोड़ा जाता है।
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दिवाली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज के बाद सोमवार को बाजारों में छठ पर्व की तैयारियों को लेकर भीड़ रही। दिबियापुर रोड पर नहर किनारे रहने वाले लोगों ने यह पर्व धूमधाम से मनाया। नहर में गंदगी के कारण लोगों ने कृत्रिम तालाब बनाकर 11 नवंबर को छठ पूजा मनाए जाने की बात कही है। इधर कुछ लोग ने स्थानीय प्रशासन से नहर घाट किनारे सफाई कराए जाने की मांग की है। सोमवार को नहाय-खाय के साथ पर्व की शुरुआत हुई। पहले दिन सोमवार को व्रती ने स्नान कर नए वस्त्र धारण कर पूजा के बाद दाल, कद्दू की सब्जी और चावल प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया।
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राजेश यादव ने बताया कि छठ पूजा के दूसरे दिन मंगलवार को खरना होगा। इस दिन पूजा में महिलाएं शाम के समय मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाती हैं। महिलाओं को 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही छटी मइया का घर में आगमन होता है। बताया कि तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। नहर में गंदगी के चलते एक घर की छत पर कृत्रिम तालाब बनाया जाएगा। बताया कि तीसरे दिन व्रती महिलाएं उपवास रखतीं हैं।
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साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करतीं हैं। शाम के समय नए वस्त्र पहनकर परिवार के साथ कृत्रिम तालाब में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्ध्य देंगी। तीसरे दिन का निर्जला उपवास रातभर जारी रहता है। चौथे दिन उगले सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। अर्ध्य देने के बाद व्रती महिलाएं सात या 11 बार परिक्रमा लगाती हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। 36 घंटे का व्रत सूर्य को अर्ध्य देने के बाद तोड़ा जाता है।