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एक साथ उठी मां-बेटे की अर्थियां तो नम हुई आंखें
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Tue, 27 Feb 2018 11:50 PM IST
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एक साथ मां बेटे की अर्थियां ले जाते परिजन
- फोटो : amarujala
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दिबियापुर(औरैया)। कानपुर के कलक्टरगंज थाने में तैनात हेड कांस्टेबल सुनीता शुक्ला एवं उसके बेटे अग्निवेश शुक्ला का शव मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद दिबियापुर स्थित आवास पर पहुंचा। इसके बाद दोनों को पैतृक गांव बेला के पिपरौली शिव ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार हुआ। वह दिबियापुर सीएचसी के पीछे पथवरिया देवी मंदिर के पास स्थित मकान में करीब 18 साल से रहती थीं।
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पहले जताई हमदर्दी, फिर ले ली जान
महिला कांस्टेबल सुनीता शुक्ला एवं अग्निवेश शुक्ला की हत्या करने वाला विवेक अपने पिता अवधेश से लड़ाई का स्वांग कर दिबियापुर में ही पुरानी सेंट्रल बैंक के पीछे वाली गली में विनोद पांडेय के मकान में रह रहा था। विवेक की पत्नी कहती थी कि उसकी सास से नहीं बनती। विवेक ने नौकरी लगवाने के लिए कहा कि उसके ताई के बेटे अग्निवेश ने ही विवेक की नौकरी गेल पाता प्लांट में लोडिंग में संविदा पर लगवा दी थी। आसपास के लोग बताते हैं कि अग्निवेश के घर पर आकर विवेक एवं उसकी पत्नी, मां बेटे से हमदर्दी जताता था। ग्रामीणों के अनुसार इसी वर्ष शिवरात्रि के आसपास न्यायालय का निर्णय आया था। इसके बाद विवेक अपनी ताई को भरोसा दिलाता था कि वह जमीन पर कब्जा लेने में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा और वह अपने पिता को भी इसके लिए राजी कर लेगा। लेकिन इसी विवेक व उसके पिता ने सोमवार को सुनीता व उसके बेटे की जान ले ली।
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अपने से बड़ी उम्र के लोगों से मामा कहकर अग्निवेश करता था मजाक
अरियारी में मायका एवं दिबियापुर में दो बहनें रहने के कारण सुनीता शुक्ला को ज्यादातर लोग जानते थे। इसी वजह से अग्निवेश अपने से बड़ी उम्र के लोगों को मामा कहकर बुलाता था। जबकि महिलाओं को मौसी कहता था। संगीता शुक्ला की एक बहन पुराने पेट्रोल पंप के पास कुसुमलता उर्फ गुलाब देवी मिश्रा एवं दूसरी बहन विकास नगर में ममता दुबे रहतीं हैं। जबकि एक बहन मनोरमा पुखरायां में रहती हैं।
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मां-बेटे के हत्यारोपियों पर लगेगा रासुका
औरैया। बेला थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरौली शिव में सोमवार शाम महिला हेड कांस्टेबल व उसके बेटे की गोली मार कर हत्या करने के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें मृतका के देवर, देवरानी, देवर का बेटा व बटाईदार शामिल है। इन सभी के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह रिपोर्ट मृतका के भाई की तहरीर पर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि हत्यारोपियों को बटाईदार ने ही तमंचा उपलब्ध कराया था। इस हत्याकांड को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। इनकी गिरफ्तारी के लिए सीओ के नेतृत्व में चार टीमें लगी हैं। सोमवार देर रात अवधेश की तलाश में पुलिस उसके घर मे ंघुसी। इस दौरान तोड़फोड़ की, लेकिन मंगलवार देर शाम तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। हालांकि पुलिस कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
दिबियापुर निवासी सुनीता शुक्ला कानपुर के कलक्टरगंज थाने में हेड कांस्टेबिल थीं। उन्होंने अग्निवेश (22) को गोद ले रखा था। सुनीता के पति की मौत के बाद उनके देवर अवधेश शुक्ला से पैतृक जमीन को लेकर विवाद हुआ। कोर्ट से सुनीता मुकदमा जीत गईं। सोमवार को वह अपने बेटे अग्निवेश के साथ खेत जुतवाने गई थी। इस दौरानउनके देवर अवधेश व देवर के बेटे विवेक ने तमंचे से मां-बेटे की गोली मार कर हत्या कर दी। सुनीता के भाई अरियारी निवासी राकेश तिवारी ने अवधेश शुक्ला, भतीजे गोलू उर्फ विवेक, देवरानी सरिता व गांव के ही बटाईदार सर्वेश यादव पुत्र विजय बहादुर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। मंगलवार को हत्यारोपियों की तलाश में पिपरौली शिव पहुंची पुलिस ने अवधेश शुक्ला के घर की तलाशी ली। आरोप है कि यहां किसी के नहीं मिलने पर पुलिस ने तोड़फोड़ की। इसके बाद पिपरौली शिव में मौजूद हत्यारोपी अवधेश की पुत्री के घर भी दबिश दी, लेकिन वहां पर ताला लगा देखकर लौट गई। पुलिस ने दिबियापुर में भी विवेक की त लाश में छापेमारी की। यहां वह पत्नी के साथ किराये पर रहता है। मकान मालिक के बेटे ने बताया कि विवेक पड़ोसी को घर की चाभी देकर कहीं चला गया।
सीओ के नेतृत्व में लगीं चार टीमें
बेला। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए सीओ के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गई है। टीम ने मृतका के भतीजे विवेक की जलालपुर स्थित ससुराल पहुंचकर उसके ससुराल पक्ष के दो लोगों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
झगड़ालू किस्म का है पूरा परिवार
वहीं ग्रामीणों के अनुसार अवधेश शुक्ला और उनकी पत्नी सरिता शुक्ला तथा उनकी चारों लड़कियां घटना के समय घर में ही मौजूद थे। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनका पूरा परिवार झगड़ालू किस्म का है और गांव में इनकी किसी से नहीं बनती। हत्यारोपी की एक बेटी का मंगलवार को इंटरमीडिएट का पेपर था, लेकिन वह परीक्षा देने नहीं पहुंची।
बुलेट ढूढ़ने के चलते हुई पोस्टमार्टम में देरी
मंगलवार को महिला कांस्टेबल के शव का पोस्टमार्टम कराने में काफी देरी हुई। थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार का कहना है कि शव के अंदर कितनी गोलियां कहां-कहां लगी हैं इसको डाक्टर नहीं खोज पा रहा था। इस वजह से पोस्टमार्टम में देरी हुई। हालांकि शाम चार बजे पोस्टमार्टम कराया गया।
चौकी इंचार्ज की ही थी लापरवाही
पुलिस कप्तान ने इस मामले में चौकी इंचार्ज रमाकांत मिश्रा को निलंबित कर दिया। मृतका एक दिन पहले सुरक्षा की मांग करने गई थी। मगर चौकी इंचार्ज ने विवाद को देखते न सुरक्षा दी और ही दोनों को पाबंद किया। जिससे इतनी बढ़ी घटना हुई।
पुलिस टीमें गिरफ्तारी के लिए लगी है। गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सीओ बिधूना को दी गई है। जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी। सोचे समझे प्लान के तहत हत्या हुई है। इसलिए रासुका तामील की भी कार्रवाई की जाएगी।
- संजीव त्यागी, पुलिस अधीक्षक