फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Rupees drawn by the fourth grade employee and his family

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं उसके परिजनों के खाते में डालकर निकाले गए रुपये

Sun, 11 Feb 2018 10:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Sun, 11 Feb 2018 10:31 PM IST
विज्ञापन
Rupees drawn by the fourth grade employee and his family
मोहित कुमार - फोटो : amarujala

दिबियापुर(औरैया)।  एनटीपीसी के उपडाकघर में 13 लाख रुपये गबन के मामले में लाखों रुपये चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, उसके भाई एवं मां के खातों में डालकर निकाले गए। हालांकि रिपोर्ट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नाम न होने से उच्चाधिकारियों की कर्मचारी से मिलीभगत की बू नजर आ रही है। डाक निरीक्षक का कहना है कि उन्होंने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। उसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नाम शामिल करना या न करने का निर्णय उच्चाधिकारी लेंगे।

विज्ञापन


गौरतलब है कि 4 अगस्त 2014 को एमआईएस खाता धारक राजकुमार के दो खाते बंद हो चुके थे। उपडाकपाल विवेक कुमार ने 12 दिसंबर 2015 को सीबीएस माइग्रेशन के दौरान इन्हीं खातों को ज्योति प्रकाश के नाम से एमआईएस स्कीम में माइग्रेट करके दो बार में 108108 रुपये का भुगतान ज्योति प्रकाश के सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। ज्योति प्रकाश उपडाकघर में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहित का भाई है।
विज्ञापन


13 सितंबर को पूरन सिंह ने 10 रुपये से आरडी खाता खोला। सीबीएस माइग्रेशन के दौरान यह खाता राजेश कुमार के फर्जी नाम से 10 हजार रुपये मूल्यवर्ग पर माइग्रेट किया गया। 20 नवंबर 2015 को 44833 रुपए राजेश कुमार के एसबी खाता में ट्रांसफर कर दिए गए। जबकि 23 नवंबर को ही खाता धारक ने 44500 रुपए की निकासी कर ली। राजेश कुमार ने अपने बयान में उसका कोई खाता ही संचालित न होने की जानकारी दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामला खुलने के बाद रुपये डाकघर में जमा करा दिए गए। इससे  माना जा रहा है कि यह खाता भी मोहित द्वारा ही फर्जी कागजातों के आधार पर संचालित किया गया। इसके बाद 3 अप्रैल 2010 को अर्नव राय एवं अयान राय के नाम से खाते खोले गए। दोनों खातों का स्थानांतरण 1 अक्टूबर 2014 को आनंद विहार दिल्ली के लिए किया गया। लेकिन खातों को एनटीपीसी दिबियापुर में ही सीबीएस के दौरान माइग्रेट किया गया।

दोनों खातों को बंद कर मोहित कुमार पुत्र मिथलेश कुमार एवं आदेश कुमारी पत्नी मिथलेश कुमार के एसबी ज्वाइंट खाते में 90339 रुपए ट्रांसफर भी किए गए। 28 नवंबर 2015 को विवेक कुमार के अवकाश पर जाने पर दिबियापुर मुख्य डाकघर पर तैनात जयप्रकाश द्वारा एनटीपीसी उपडाकघर में काम किया गया। 25 जुलाई 2015 को आदेश कुमारी एवं मोहित कुमार के दिबियापुर संयुक्त खातों में 9 लाख रुपयों की फर्जी इंट्री उपडाकघर दिबियापुर में की गई थी।

इस इंट्री को डाकघर लेखा के हिसाब में नहीं लिया गया था। जयप्रकाश ने इस खाते में आदेश कुमारी के नाम से 28 नवंबर 2015 को एक वर्षीय टीडी खाता उपडाकघर एनटीपीसी में खोला गया। खाते के एक वर्ष की मियाद पूरी होने से पहले ही 28 अक्टूबर 2016 को यह खाता जयप्रकाश ने बंद भी कर दिया। इसकी रकम 933000 रुपए संबंधित खाताधारक के बचत खाते में स्थानांतरित भी कर दिए गए।

इसमें साफ है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहित ने ही फर्जी अकाउंट खोलकर 933000 रुपये निकाल लिए। डाक निरीक्षक योगेश कुमार का कहना है कि उन्होंने जांच रिपोर्ट में मोहित का भी नाम शामिल किया था। रिपोर्ट में किसका नाम शामिल करना है। यह निर्णय उच्चाधिकारियों के हाथ में होता है। इससे अधिक जानकारी देने से उन्होंने इनकार कर दिया।

पिता की मौत के बाद उनके स्थान पर मोहित को मिली थी तैनाती
नौली निवासी मिथलेश कुमार दिबियापुर डाकघर में अघारा डाक ले जाने का काम करते थे। उनकी मृत्यु हुई तो उनके स्थान पर मिथलेश के बेटे मोहित की नियुक्ति ग्रामीण डाक सेवक के रूप मे हुई। इसके बाद विभागीय एक्जाम पास कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के रूप में एनटीपीसी उपडाकघर में तैनाती मिल गई। डाकघर कर्मचारी बताते हैं कि मोहित इस समय रामबाग आगरा में तैनात है।

केवाईसी पूरी करने के बाद ऐसे खाते शुरू करा सकते हैं
दिबियापुर मुख्य डाकघर के साथ एनटीपीसी एवं मंडी पोस्ट आफिस में लगभग 80 हजार खाते हैं। पोस्टमास्टर अखिलेश अवस्थी के अनुसार हजारों की संख्या में ऐसे खाता धारक हैं जिन्होंने चार वर्षों से खाते का संचालन ही नहीं किया। इसके चलते ऐसे खाते ऑटोमेटिक बंद हो गए हैं। उनका कहना है कि ऐसे खातों की संख्या 10 हजार से अधिक हो सकती है। बताया कि ऐसे खाताधारक अब केवाईसी पूरी करने के बाद ही खाता चालू करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, पते का प्रमाण लाना आवश्यक है।


लंबे समय से खातों को अपडेट न करने वाले उपभोक्ता हो सकते परेशान
डाकघर एवं उपडाकघर में अधिकतर खाते ऐजेंटों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। खाते खोलने के बाद यदि उपभोक्ता लंबे समय तक अपने खाते अपडेट नहीं कराते। ऐसे में उनके खाते बंद हो जाते हैं। डाकघर कर्मी बताते हैं कि उपभोक्ता यदि समय से ऐजेंटों को जमा करने के लिए रुपये नहीं देते हैं तो ऐजेंट खाते अपडेट भी नहीं कराते। ऐसी दशा में कई खाते बंद हो जाते हैं। डाकघर कर्मियों का कहना है कि सभी खाता धारकों को अपने खाते समय समय पर अपडेट कराते रहना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed