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डॉक्टर संग बीएसएफ जवानों ने की हाथापाई
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:17 AM IST
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उरई। बच्चे को लगी चोट दिखाने जिला अस्पताल की ओपीडी पहुंचे बीएसएफ के जवानों की डॉक्टर से किसी बात पर कहासुनी हो गई। मामला बढ़ने पर डॉक्टर और जवानों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। इससे ओपीडी में मौजूद मरीजों और तीमारदारों के बीच अफरातफरी मच गई। सूचना पाकर पहुंची पुलिस आरोपी जवानों को लेकर कोतवाली आ गई। डॉक्टर के मुताबिक जवान शराब के नशे में थे। पुलिस के मुताबिक डॉक्टर की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मारपीट व एससीएसटी एक्ट का मामला दर्ज किया गया है। बीएसएफ के दोनों जवान सगे भाई भी हैं।
जिला अस्पताल के ओपीडी में सर्जन डॉ. बसंत लाल मंगलवार की सुबह लगभग दस बजे मरीजों को देख रहे थे। तभी वहां बीएसएफ जवान राजेश कुमार यादव अपने बेटे हर्षित व अपने भाई जवान नरेश सिंह के साथ पहुंचे। राजेश ने डॉ. बसंत से बेटे हर्षित के हाथ अंगूठे में लगी चोट देखने के लिए कहा। इस पर डॉक्टर ने उनसे कहा कि वह सर्जन हैं हड्डी विशेषज्ञ को दिखाओ।
इस पर जवानों व डॉक्टर के बीच धक्का मुक्की शुरू हो गई। डॉक्टर का आरोप है कि जवानों ने उन्हें न सिर्फ उनके कमरे से खींच लिया बल्कि उनके साथ जमकर हाथापाई की। यह देखकर अन्य डॉक्टर व कर्मचारी मौके पर आ गए और अभद्रता कर रहे जवानों को रोकने की कोशिश करने लगे। जिससे अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई और वहां मौजूद अन्य मरीज भागने लगे।
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सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों जवानों को लेकर कोतवाली आ गई। दूसरी ओर घटना से गुस्साए डॉक्टरों ने काम काज बंद कर दिया। जिससे जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को उपचार नहीं मिल सका। कार्यवाहक कोतवाली प्रभारी जगदंबा दुबे ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मारपीट व एससीएसटी में मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद डाक्टरों ने कामकाज शुरू कर दिया।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र के किसबाखेड़ा गांव के निवासी हैं। वह अपने परिवार के साथ उरई में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आए थे। डॉक्टर के आरोप निराधार हैं। डॉक्टर बेटे का इलाज नहीं कर रहा था। जिस पर विवाद बढ़ा था। इसके बाद डॉक्टर और कर्मचारियों ने उन दोनों के साथ भी मारपीट की। जवानों के मुताबिक उनकी चोटों का मेडिकल भी नहीं कराया गया। फिर भी पुलिस उनकी कोई सुनवाई नहीं कर ही है।
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जिला अस्पताल के ओपीडी में सर्जन डॉ. बसंत लाल मंगलवार की सुबह लगभग दस बजे मरीजों को देख रहे थे। तभी वहां बीएसएफ जवान राजेश कुमार यादव अपने बेटे हर्षित व अपने भाई जवान नरेश सिंह के साथ पहुंचे। राजेश ने डॉ. बसंत से बेटे हर्षित के हाथ अंगूठे में लगी चोट देखने के लिए कहा। इस पर डॉक्टर ने उनसे कहा कि वह सर्जन हैं हड्डी विशेषज्ञ को दिखाओ।
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इस पर जवानों व डॉक्टर के बीच धक्का मुक्की शुरू हो गई। डॉक्टर का आरोप है कि जवानों ने उन्हें न सिर्फ उनके कमरे से खींच लिया बल्कि उनके साथ जमकर हाथापाई की। यह देखकर अन्य डॉक्टर व कर्मचारी मौके पर आ गए और अभद्रता कर रहे जवानों को रोकने की कोशिश करने लगे। जिससे अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई और वहां मौजूद अन्य मरीज भागने लगे।
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सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों जवानों को लेकर कोतवाली आ गई। दूसरी ओर घटना से गुस्साए डॉक्टरों ने काम काज बंद कर दिया। जिससे जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को उपचार नहीं मिल सका। कार्यवाहक कोतवाली प्रभारी जगदंबा दुबे ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मारपीट व एससीएसटी में मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद डाक्टरों ने कामकाज शुरू कर दिया।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र के किसबाखेड़ा गांव के निवासी हैं। वह अपने परिवार के साथ उरई में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आए थे। डॉक्टर के आरोप निराधार हैं। डॉक्टर बेटे का इलाज नहीं कर रहा था। जिस पर विवाद बढ़ा था। इसके बाद डॉक्टर और कर्मचारियों ने उन दोनों के साथ भी मारपीट की। जवानों के मुताबिक उनकी चोटों का मेडिकल भी नहीं कराया गया। फिर भी पुलिस उनकी कोई सुनवाई नहीं कर ही है।