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समय से करें आलू की बुआई

Mon, 11 Oct 2021 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 11:33 PM IST
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औरैया। आलू की उन्नत खेती कर किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि वैज्ञानिक विधि से किसान आलू की खेती कर आय दोगुनी कर सकते हैं।
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किसानों को जानकारी देते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि आलू की अच्छी खेती के लिए फसल अवधि के दौरान दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस व रात का तापमान चार से 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। फसल में कंद बनाते समय 18 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम होता है। आलू की फसल विभिन्न प्रकार की भूमि जिसका पीएच मान छह से आठ के मध्य हो, उगाई जा सकती है।
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अगेती फसल की बुआई मध्य सितंबर से अक्तूबर के मध्य होता है। मुख्य फसल की बुआई मध्य अक्तूबर के बाद होनी चाहिए। खरीफ, मक्का, अगेती धान की खेती से खाली किए गए खेत में की जा सकती है। बुआई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। प्रति कंद दस ग्राम से 30 ग्राम तक वजन वाले आलू की रोपाई कर प्रति हेक्टेयर दस से 30 क्विंटल तक आलू के कंद की आवश्यकता होती है।
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आलू की बुआई करने से पहले बीज को कोल्ड स्टोरेज से निकालकर 10-15 दिन तक छायादार जगह पर रखें। खेत में उर्वरकों के इस्तेमाल के बाद ऊपरी सतह को खोदकर उसमें बीज डालें और उसके ऊपर भूरभूरी मिट्टी डाल दें। लाइनों की दूरी 50 से 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

सिंचाई और खुदाई
आलू की फसल में उर्वरक का प्रयोग अधिक होने से इसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसकी रोपाई के दस दिन बाद प्रथम सिंचाई करनी चाहिए। ऐसा करने से अंकुरण शीघ्र होगा। प्रति पौधा कंद की संख्या बढ़ जाएगी। इससे उपज में दोगुनी वृद्धि हो जाती है। खुदाई के दस दिन पूर्व सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। ऐसा करने से खुदाई के समय कंद स्वच्छ निकलेंगे। बाजार भाव व आवश्यकता को देखते हुए रोपनी के 60 दिन बाद आलू की खुदाई की जाती है। यदि भंडारण के लिए आलू रखना हो तो कंद की परिपक्वता की जांच के बाद ही खोदाई करनी चाहिए। कंद को खुले धूप में न रखकर छायादार जगह में रखा जाता है। धूप में रखने पर भंडारण क्षमता घट जाती है।
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