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पारा लुढ़कने से पाला का खतरा बढ़ा, किसान परेशान
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औरैया। बर्फीली पछुआ हवाओं ने ठंड में और इजाफा किया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अभी कुछ दिनों तक ठंड में और वृद्धि होगी। उधर, अगले 36 घंटे में पाला पड़ने की संभावना भी जताई गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
तापमान गिरने से आलू, मटर, अरहर जैसी फसलों और सब्जियों में नुकसान की आशंका जताई गई है। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के प्रभारी व मौसम वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि किसानों को फसलों को पाला से बचाने के लिए उपाय करने चाहिए। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सात डिग्री व अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दो दिनों में तापमान गिरने की संभावना है। 28 से 30 दिसंबर के बीच जिले में हल्की बारिश का भी अनुमान है।
क्या है पाला
सदी के मौसम में पानी में जमाव हो जाता है। इससे पत्तियों की कोशिकाएं फट जाती हैं और सूख जाती हैं। परिणाम स्वरूप फसलों में भारी क्षति हो जाती है। पाला से पौधों तथा फसलों पर प्रभाव पड़ता है। पौधों की कोशिकाओं में जल संचार प्रभावित होता है। प्रभावित फसल अथवा पौधे का बहुभाग सूख जाता है। जिससे रोग व कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। पाले के प्रभाव से फल और फूल नष्ट हो जाते हैं।
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पाला से ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिक अंकुर झा का कहना है कि किसानों को पाला से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पर्याप्त नमी होने से फसलों में नुकसान की संभावना कम होती है। पाला होने की स्थिति में शाम के समय खेत की मेड़ पर धुआं करें। शाम और रात के समय सिंचाई करें। इसके अलावा सल्फर की दो मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। पाला लगने के तुरंत बाद यानी अगले दिन सुबह के समय ग्लूकोन-डी 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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तापमान गिरने से आलू, मटर, अरहर जैसी फसलों और सब्जियों में नुकसान की आशंका जताई गई है। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के प्रभारी व मौसम वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि किसानों को फसलों को पाला से बचाने के लिए उपाय करने चाहिए। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सात डिग्री व अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दो दिनों में तापमान गिरने की संभावना है। 28 से 30 दिसंबर के बीच जिले में हल्की बारिश का भी अनुमान है।
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क्या है पाला
सदी के मौसम में पानी में जमाव हो जाता है। इससे पत्तियों की कोशिकाएं फट जाती हैं और सूख जाती हैं। परिणाम स्वरूप फसलों में भारी क्षति हो जाती है। पाला से पौधों तथा फसलों पर प्रभाव पड़ता है। पौधों की कोशिकाओं में जल संचार प्रभावित होता है। प्रभावित फसल अथवा पौधे का बहुभाग सूख जाता है। जिससे रोग व कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। पाले के प्रभाव से फल और फूल नष्ट हो जाते हैं।
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पाला से ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिक अंकुर झा का कहना है कि किसानों को पाला से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पर्याप्त नमी होने से फसलों में नुकसान की संभावना कम होती है। पाला होने की स्थिति में शाम के समय खेत की मेड़ पर धुआं करें। शाम और रात के समय सिंचाई करें। इसके अलावा सल्फर की दो मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। पाला लगने के तुरंत बाद यानी अगले दिन सुबह के समय ग्लूकोन-डी 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।