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रैन बसेरों में बदइंतजामी, ठिठुर रहे लोग
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फोटो-08एयूआरपी-25- नगर पालिका औरैया द्वारा बस स्टैंड पर बना रैन बसेरा। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। एक सप्ताह से सर्द के मौसम का असर नजर आने लगा है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में सर्दी से बचाव के आधे-अधूरे इंतजाम किए गए हैं। अधिकांश रैन बसेरों में न तो पलंग है और न ही रजाई। ऐसे में जरूरतमंद व बेसहारा लोग सड़कों पर रात गुजार कर ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने के आदेश भी कागजों तक सीमित है।
सर्द मौसम में ठिठुरन से बचाने के लिए नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वह रैन बसेरा संचालित कर उनमें पलंग, रजाई, गद्दे और कंबल का इंतजाम करें। लेकिन वर्तमान में कई रैन बसेरा बदइंतजामी का शिकार बने हुए हैं। ऐसे में लोगों को ठंड से बचने के लिए रैन बसेरों की बजाय सड़कों पर ठिठुरते हुए रात गुजारनी पड़ रही है।
सीन-1
यह तस्वीर शहर के सुभाष चौक की है, यहां पर दिल्ली से लौटे हमीरपुर के राकेश व उसके साथ रात 11 बजे तक बस के इंतजार में भटकते रहे। कोई वाहन न मिलने पर उन्हें रात गुजारने के लिए ठौर ढूंढना मुश्किल नजर आ रहा था। इस पर एक दुकान के बाहर पड़े बेंच पर पास में रखा कंबल निकाल कर लेट गए। रैन बसेरा में जाने की बात कही गई तो बताया कि कई लोगों से पूछा, कोई पता नहीं बता सका।
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सीन-2
यह नजारा शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहा खानपुर का है। यहां पर फुटपाथ पर सो रहे लोग भले ही मुसाफिर न हो, लेकिन इनकी रातें अक्सर खुले आसमान में ठिठुरते हुए कटती हैं। यहां तमाम लोग ऐसे हैं जो दिन में रेहड़ी लगाने के बाद फुटपाथ को ही आशियाना बना लेते हैं। वहीं, कुछ ऐसे यात्री भी नजर आए जिन्हें वाहन न मिलने पर इधर बैठ कर रात गुजारते रहे।
सार्वजनिक स्थानों पर नहीं जल रहे अलाव
सुबह और शाम तो शीत लहर चलने के साथ ही ठिठुरन भरी ठंड हो रही है। इसके बाद भी जिले के किसी भी स्थानों पर अलाव नहीं जल रहे हैं। सुबह और शाम चौक-चौराहों से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर लोग ठिठुरते नजर आ रहे हैं।
प्रचार-प्रसार न होने से भटकते जरूरतमंद
नगरीय क्षेत्रों में जिन स्थानों पर रैन बसेरा बनाए गए हैं, उनकी जानकारी का अभाव है। सार्वजनिक स्थानों के साथ ही बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल आदि में रैन बसेरा कहां स्थापित है, इसकी जानकारी हो तो लोग रात में न भटकें। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में भटकते नजर आ रहे हैं।
जमीन पर गद्दे बिछा कर ली इतिश्री
नगरीय क्षेत्र के नगर पंचायत व पालिकाओं द्वारा काजगी कार्रवाई पूरी करते हुए रैनबसेरा बना लिए गए हैं। इनमें महिला व पुरुष के अलग-अलग ठहरने की व्यवस्था बताई जा रही है। जिसमें से कुछ ने जमीन पर गद्दे व रजाई रख खानापूरी कर ली है। शहर के बस स्टैंड पर बना रैन बसेरा रोडवेज के टिनशेड के नीचे बनाया गया है। जिसे चारो तरफ से ढकने के लिए टेंट लगाया गया है। इसी तरह दिबियापुर, अजीतमल, फफूंद आदि स्थानों में भी जमीन पर लेटने की व्यवस्था की गई है।
बोले जिम्मेदार...
जिले में 28 रैन बसेरा बनाए गए हैं। जिसमें बेड, रजाई, गद्दा, कंबल के साथ कर्मचारी तैनात रखने और अलाव जलाने के निर्देश है। इसके साथ ही सर्दी को देखते हुए अलाव जलाने के लिए तीनों तहसीलों को 50-50 हजार रुपये जारी किए गए हैं। पांच हजार कंबल खरीदने की तैयारी चल रही है। - रेखा एस चौहान, एडीएम प्रशासन
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सर्द मौसम में ठिठुरन से बचाने के लिए नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वह रैन बसेरा संचालित कर उनमें पलंग, रजाई, गद्दे और कंबल का इंतजाम करें। लेकिन वर्तमान में कई रैन बसेरा बदइंतजामी का शिकार बने हुए हैं। ऐसे में लोगों को ठंड से बचने के लिए रैन बसेरों की बजाय सड़कों पर ठिठुरते हुए रात गुजारनी पड़ रही है।
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सीन-1
यह तस्वीर शहर के सुभाष चौक की है, यहां पर दिल्ली से लौटे हमीरपुर के राकेश व उसके साथ रात 11 बजे तक बस के इंतजार में भटकते रहे। कोई वाहन न मिलने पर उन्हें रात गुजारने के लिए ठौर ढूंढना मुश्किल नजर आ रहा था। इस पर एक दुकान के बाहर पड़े बेंच पर पास में रखा कंबल निकाल कर लेट गए। रैन बसेरा में जाने की बात कही गई तो बताया कि कई लोगों से पूछा, कोई पता नहीं बता सका।
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सीन-2
यह नजारा शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहा खानपुर का है। यहां पर फुटपाथ पर सो रहे लोग भले ही मुसाफिर न हो, लेकिन इनकी रातें अक्सर खुले आसमान में ठिठुरते हुए कटती हैं। यहां तमाम लोग ऐसे हैं जो दिन में रेहड़ी लगाने के बाद फुटपाथ को ही आशियाना बना लेते हैं। वहीं, कुछ ऐसे यात्री भी नजर आए जिन्हें वाहन न मिलने पर इधर बैठ कर रात गुजारते रहे।
सार्वजनिक स्थानों पर नहीं जल रहे अलाव
सुबह और शाम तो शीत लहर चलने के साथ ही ठिठुरन भरी ठंड हो रही है। इसके बाद भी जिले के किसी भी स्थानों पर अलाव नहीं जल रहे हैं। सुबह और शाम चौक-चौराहों से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर लोग ठिठुरते नजर आ रहे हैं।
प्रचार-प्रसार न होने से भटकते जरूरतमंद
नगरीय क्षेत्रों में जिन स्थानों पर रैन बसेरा बनाए गए हैं, उनकी जानकारी का अभाव है। सार्वजनिक स्थानों के साथ ही बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल आदि में रैन बसेरा कहां स्थापित है, इसकी जानकारी हो तो लोग रात में न भटकें। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में भटकते नजर आ रहे हैं।
जमीन पर गद्दे बिछा कर ली इतिश्री
नगरीय क्षेत्र के नगर पंचायत व पालिकाओं द्वारा काजगी कार्रवाई पूरी करते हुए रैनबसेरा बना लिए गए हैं। इनमें महिला व पुरुष के अलग-अलग ठहरने की व्यवस्था बताई जा रही है। जिसमें से कुछ ने जमीन पर गद्दे व रजाई रख खानापूरी कर ली है। शहर के बस स्टैंड पर बना रैन बसेरा रोडवेज के टिनशेड के नीचे बनाया गया है। जिसे चारो तरफ से ढकने के लिए टेंट लगाया गया है। इसी तरह दिबियापुर, अजीतमल, फफूंद आदि स्थानों में भी जमीन पर लेटने की व्यवस्था की गई है।
बोले जिम्मेदार...
जिले में 28 रैन बसेरा बनाए गए हैं। जिसमें बेड, रजाई, गद्दा, कंबल के साथ कर्मचारी तैनात रखने और अलाव जलाने के निर्देश है। इसके साथ ही सर्दी को देखते हुए अलाव जलाने के लिए तीनों तहसीलों को 50-50 हजार रुपये जारी किए गए हैं। पांच हजार कंबल खरीदने की तैयारी चल रही है। - रेखा एस चौहान, एडीएम प्रशासन