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केंद्रीय विद्यालय को सुचारू रूप से संचालित करने का मुद्दा राज्यसभा में उठाया
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फोटो 18एयूआरपी50- राज्यसभा में बोलतीं राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य
- फोटो : AURAIYA
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दिबियापुर (औरैया)। एनटीपीसी परिसर में संचालित केंद्रीय विद्यालय को सुचारू रूप से चलाने का मुद्दा अब राज्यसभा सांसद गीता शाक्य ने राज्यसभा में उठाया है।
गुरुवार को सांसद गीता शाक्य ने कहा कि एनटीपीसी व गेल की स्थापना के समय किसानों की जमीन अधिग्रहीत के बदले स्थायी नौकरी का आश्वासन दिया गया था। क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्लांट परिसर में खुलने वाले विद्यालयों में शिक्षा के अवसर प्रदान करने का वायदा किया गया था। दिबियापुर एवं आसपास क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता कराने का वायदा किया गया था। लेकिन उन्होंने वायदा पूरा नहीं किया। प्लांट स्थापित हुए 30 वर्षों से अधित समय हो गया है। परंतु अभी तक अधिकांश लोगों को स्थायी नौकरी नहीं मिली। ऐसे श्रमिकों को स्थायी नौकरी दी जाए। अधिगृहीत भूमि का शेष भुगतान किया जाए। जिले के एक मात्र केंद्रीय विद्यालय एनटीपीसी परिसर में स्थित है। विद्यालय को एनटीपीसी प्रशासन द्वारा बंद किए जाने की बात की जा रही है। मांग की कि भूविस्थापित लोगों को रोजगार, केंद्रीय विद्यालय की स्थिति सुधारने की योजना बनाई जाए। स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
बता दें कि पिछले दिनों लोकसभा सांसद डॉ.रामशंकर कठेरिया भी केंद्रीय विद्यालय को सुचारू रूप से संचालित किए जाने की मांग को लोकसभा में उठा चुके हैं। गत चार मार्च को अमर उजाला ने केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश पर संकट के बादल हेडिंग से खबर प्रकाशित की थी।
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गुरुवार को सांसद गीता शाक्य ने कहा कि एनटीपीसी व गेल की स्थापना के समय किसानों की जमीन अधिग्रहीत के बदले स्थायी नौकरी का आश्वासन दिया गया था। क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्लांट परिसर में खुलने वाले विद्यालयों में शिक्षा के अवसर प्रदान करने का वायदा किया गया था। दिबियापुर एवं आसपास क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता कराने का वायदा किया गया था। लेकिन उन्होंने वायदा पूरा नहीं किया। प्लांट स्थापित हुए 30 वर्षों से अधित समय हो गया है। परंतु अभी तक अधिकांश लोगों को स्थायी नौकरी नहीं मिली। ऐसे श्रमिकों को स्थायी नौकरी दी जाए। अधिगृहीत भूमि का शेष भुगतान किया जाए। जिले के एक मात्र केंद्रीय विद्यालय एनटीपीसी परिसर में स्थित है। विद्यालय को एनटीपीसी प्रशासन द्वारा बंद किए जाने की बात की जा रही है। मांग की कि भूविस्थापित लोगों को रोजगार, केंद्रीय विद्यालय की स्थिति सुधारने की योजना बनाई जाए। स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
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बता दें कि पिछले दिनों लोकसभा सांसद डॉ.रामशंकर कठेरिया भी केंद्रीय विद्यालय को सुचारू रूप से संचालित किए जाने की मांग को लोकसभा में उठा चुके हैं। गत चार मार्च को अमर उजाला ने केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश पर संकट के बादल हेडिंग से खबर प्रकाशित की थी।
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