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पूनम और सपना की मौत के बाद डेरे में छाया मातम
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फोटो-46 व 47- घर के बाहर गमगीन बैठे परिजन व डेरे के लोग। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। ढिकियापुर कंचौसी डेरा की रहने वाली पूनम और सपना की मौत के बाद से डेरे में मातम छाया रहा। हर कोई दोनों बहनों की मेहनत, मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभालने की चर्चा करता नजर आया। वहीं घर पर बिखरा पड़ा सामान घर की हालत और परिवार की बेबसी बयां करता रहा।
बीमार मां नीलम घर के बाहर एक झोपड़ी के पास दोनों बेटियों के शव रखे देख सिसकियां भर रही थी। पास में ही उसका बेटा बीमार मां को डेरे के लोगों के साथ ढांढस बंधा रहा था।
पड़ोसियों ने बताया कि पति की मौत के बाद कुछ दिन तक नीलम ने परिवार को संभाला। जब वह बीमार हो गई तो बेटियों पर ही जिम्मेदारी थी।
आसपास के गांवों में मजदूरी व खेतों से फसल की कटाई कर परिवार संभाल रही थीं। इस घटना के बाद कई घरों में शाम को चू्ल्हे तक नहीं जले। देर शाम परिवार के लोगों ने गांव के बाहर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया।
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क्षय रोगी है मां नीलम
डेरे में मौजूद परिवार के लोगों ने बताया कि नीलम पिछले कई महीनों से क्षय रोग से ग्रसित है। घर की स्थिति ठीक न होने पर वह ठीक से इलाज नहीं करा पा रही है। सरकारी दवाओं का ही सहारा है।
कच्चे मकान में परिवार कर रहा गुजर बसर
अशोक नाथ की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था। परिजनों ने बताया कि अशोक नागिन बैंड में काम कर परिवार का गुजर बसर कर रहा था। कई बार प्रशासन से पक्के मकान के लिए गुहार लगाई, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। इस पर डेरे में ही कच्ची दीवारें व फूस की झोपड़ी रख कर परिवार रह रहा था।
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बीमार मां नीलम घर के बाहर एक झोपड़ी के पास दोनों बेटियों के शव रखे देख सिसकियां भर रही थी। पास में ही उसका बेटा बीमार मां को डेरे के लोगों के साथ ढांढस बंधा रहा था।
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पड़ोसियों ने बताया कि पति की मौत के बाद कुछ दिन तक नीलम ने परिवार को संभाला। जब वह बीमार हो गई तो बेटियों पर ही जिम्मेदारी थी।
आसपास के गांवों में मजदूरी व खेतों से फसल की कटाई कर परिवार संभाल रही थीं। इस घटना के बाद कई घरों में शाम को चू्ल्हे तक नहीं जले। देर शाम परिवार के लोगों ने गांव के बाहर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया।
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क्षय रोगी है मां नीलम
डेरे में मौजूद परिवार के लोगों ने बताया कि नीलम पिछले कई महीनों से क्षय रोग से ग्रसित है। घर की स्थिति ठीक न होने पर वह ठीक से इलाज नहीं करा पा रही है। सरकारी दवाओं का ही सहारा है।
कच्चे मकान में परिवार कर रहा गुजर बसर
अशोक नाथ की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था। परिजनों ने बताया कि अशोक नागिन बैंड में काम कर परिवार का गुजर बसर कर रहा था। कई बार प्रशासन से पक्के मकान के लिए गुहार लगाई, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। इस पर डेरे में ही कच्ची दीवारें व फूस की झोपड़ी रख कर परिवार रह रहा था।