{"_id":"5e556b4c8ebc3ef3b625cf74","slug":"anna-cattle-auraiya-news-knp5469446119","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली की आग से होने वाले नुकसान से क्षति पर मुआवजा नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली की आग से होने वाले नुकसान से क्षति पर मुआवजा नहीं
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औरैया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अन्ना मवेशियों और खेतों से गुजर रही बिजली के तारों से निकली चिंगारी से फसलों के नष्ट होने पर नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि जिले में किसानों के सामने यह दोनों बड़ी समस्या हैं। किसानों का कहना है कि फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने तक ही सीमित रह गई हैं।
दो दशक से ज्यादा समय से अन्ना मवेशी किसानों के लिए मुसीबत बने हैं। इधर दो साल में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है। अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में खड़ी फसल रौंदकर नष्ट कर देते हैं। ऐसे में किसान रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करने के लिए मजबूर हैं। जरा सी चूक होने पर अन्ना पशुओं को झुंड पलक झपकते ही फसल बर्बाद कर देते हैं।
फसल बीमा योजना में किसानों के इस नुकसान की भरपाई इस योजना में नहीं है। इसी तरह बिजली के तारों के टूटने या चिंगारी से लगने वाली आग से फसल के नुकसान की भरपाई भी इस योजना में नहीं है। जिले में गर्मी के दिनों में अक्सर खेतों से निकली हाईटेंशन लाइन तथा बिजली के पोलों से निकले तारों में फाल्ट से अक्सर लोगों को कई एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है, जिससे हजारों रुपये की लागत से बोई की फसल बर्बाद हो जाती है।
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किसानों का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर बैंक फसल का बीमा भी कर देती थी। मजबूर किसान बैंक को भी मना नहीं कर पाता था कि वह फसल का बीमा नहीं कराएगा। उसे डर था कि कहीं अधिकारी केसीसी पास ही न करें। इससे वह चुपचाप रहता था। उन्हें तो मुआवजा कभी नहीं मिला। जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने भी स्वीकार किया कि इन दोनों परिस्थितियों में बीमा योजना में किसानों को मदद नहीं मिल सकती।
औरैया। जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, बिधूना व सहार ब्लॉक में करीब 110 बीघा फसल जलकर राख हो गई थी। इसमें बमुश्किल 30 से 40 फीसदी किसानों को ही तहसील प्रशासन से मुआवजा मिल सका था। बीमा योजना में प्रावधान न होने से किसानों को खासा नुकसान हुआ।
औरैया। जिला प्रशासन ने अन्ना पशुओं से निजात के लिए जिला प्रशासन ने अस्थायी 43 गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। जिनमें करीब साढ़े सात हजार अन्ना पशु बंद हैं। इसके बाद भी इससे अधिक संख्या में अन्ना पशु जिले के ग्रामीण व शहरीय अंचल में अभी भी उत्पात मचा रहे हैं। इस समय प्राकृतिक आपदा से कहीं ज्यादा अन्ना पशु किसानों के नुकसान की बड़ी वजह बन गए हैं। किसान लंबे समय से शासन और प्रशासन से क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं।
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दो दशक से ज्यादा समय से अन्ना मवेशी किसानों के लिए मुसीबत बने हैं। इधर दो साल में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है। अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में खड़ी फसल रौंदकर नष्ट कर देते हैं। ऐसे में किसान रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करने के लिए मजबूर हैं। जरा सी चूक होने पर अन्ना पशुओं को झुंड पलक झपकते ही फसल बर्बाद कर देते हैं।
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फसल बीमा योजना में किसानों के इस नुकसान की भरपाई इस योजना में नहीं है। इसी तरह बिजली के तारों के टूटने या चिंगारी से लगने वाली आग से फसल के नुकसान की भरपाई भी इस योजना में नहीं है। जिले में गर्मी के दिनों में अक्सर खेतों से निकली हाईटेंशन लाइन तथा बिजली के पोलों से निकले तारों में फाल्ट से अक्सर लोगों को कई एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है, जिससे हजारों रुपये की लागत से बोई की फसल बर्बाद हो जाती है।
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किसानों का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर बैंक फसल का बीमा भी कर देती थी। मजबूर किसान बैंक को भी मना नहीं कर पाता था कि वह फसल का बीमा नहीं कराएगा। उसे डर था कि कहीं अधिकारी केसीसी पास ही न करें। इससे वह चुपचाप रहता था। उन्हें तो मुआवजा कभी नहीं मिला। जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने भी स्वीकार किया कि इन दोनों परिस्थितियों में बीमा योजना में किसानों को मदद नहीं मिल सकती।
औरैया। जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, बिधूना व सहार ब्लॉक में करीब 110 बीघा फसल जलकर राख हो गई थी। इसमें बमुश्किल 30 से 40 फीसदी किसानों को ही तहसील प्रशासन से मुआवजा मिल सका था। बीमा योजना में प्रावधान न होने से किसानों को खासा नुकसान हुआ।
औरैया। जिला प्रशासन ने अन्ना पशुओं से निजात के लिए जिला प्रशासन ने अस्थायी 43 गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। जिनमें करीब साढ़े सात हजार अन्ना पशु बंद हैं। इसके बाद भी इससे अधिक संख्या में अन्ना पशु जिले के ग्रामीण व शहरीय अंचल में अभी भी उत्पात मचा रहे हैं। इस समय प्राकृतिक आपदा से कहीं ज्यादा अन्ना पशु किसानों के नुकसान की बड़ी वजह बन गए हैं। किसान लंबे समय से शासन और प्रशासन से क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं।