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वोट किसे दें, यह बताना उलमा का काम नहीं

Mon, 21 Feb 2022 12:14 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 12:14 AM IST
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After voting, the candidates reconciled
शहर के सैनिक कालोनी में वोट डालने पहुंचीं मुस्लिम महिलाएं। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। मुस्लिम मतदाताओं पर इस बार किसी उलमा या कथित रहनुमाओं की अपील का असर नहीं दिखा। पोलिंग बूथों पर कतारों में खड़े कई मुस्लिम मतदाताओं ने कहा कि वे अपने दिल की आवाज पर मतदान करेंगे। यह बताना उलमा का काम नहीं है कि वे किसे वोट दें।
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मुस्लिम मतदाताओं ने नाम न छापने की गुजारिश के साथ स्वीकार किया कि वे पहले उलेमा के कहने पर वोट देते रहे हैं लेकिन अब यह मानसिकता बदलने लगी है। आम मुसलमान भी यह मानने लगे हैं कि उलमा का मान-सम्मान अपनी जगह है।
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मजहबी कामों में उनकी हिदायत मंजूर है लेकिन सियासी मामलों में उन्हें अपनी राय थोपने का हक नहीं है। मुस्लिम अब खुद समझने लगा है कि उसके लिए क्या ठीक है और क्या नहीं। उन्होंने कहा कि उनका किसी पार्टी से बैर भी नहीं है। इतना जरूर चाहते हैं कि ऐसी सरकार आए जो सबको साथ लेकर देश-प्रदेश का विकास करे। सबके हाथ में काम हो और महंगाई पर लगाम रहे। (संवाद)
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