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परिवार में अखिलेश रह गया अकेला
Auraiya
Updated Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
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औरैया। बेला के हिम्मतपुर में घर का मुखिया अखिलेश सोमवार की रात अपने परिवारीजनों के साथ जब खाना खाने के बाद सोया तब उसने कल्पना भी नहीं की थी कि उसके परिवार के लोग अगली सुबह नहीं देख पाएंगे। लेकिन होनी को काई नहीं टाल सकता अखिलेश के साथ ऐसा ही हुआ। पूरा घर तो तहस नहस हुआ ही साथ ही परिवारीजन भी उसका साथ छोड़कर चले गए।
सोमवार की रात जब हिम्मतपुर निवासी अखिलेश अपने बच्चों व पत्नी के साथ हंसी खुशी खाना खा रहा था। तब शायद उसे मालूम भी नहीं था कि आज वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ आखिरी रात बिताने वाला है। फैक्ट्री विस्फोट मामले में सबसे गहरा असर अखिलेश पर पड़ा है। अखिलेश के अनुसार सोमवार की रात वह बच्चों को सुलाने के बाद वह स्वयं लेटने जा रहा था। तभी अचानक विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद इतना भी समय उसको नहीं मिला कि वह कुछ समझ पाता। धमाके के साथ उसका मकान पलक झपकते ही ढह गया। जिसे कमरे में लेटी उसकी पत्नी नन्नीदेवी और बच्चे दब गए। वह बाहरी कमरे था। जिस कारण बच गया। पत्नी व बच्चों के शवों को देख अखिलेश के आखें आंसूओं थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अब वह अपने परिवार का अकेला सदस्य बचा है। इस धमाके का असर स्व. रामऔतार के पुत्री को भी लील गई है। रामऔतार का निधन आज से एक माह पहले हुआ था। रामऔतार के निधन पर उसकी पुत्री खुशबू अपनी ससुराल से मायके आई थी। खुशबू एक दिन पहले ही अपने मायके पहुंची। पटाखे के विस्फोट ने मायके आई खुशबू के जीवन को समाप्त कर दिया। इस दौरान घर में मौजूद अन्य लोग चुटहित भी हुए हैं।
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सोमवार की रात जब हिम्मतपुर निवासी अखिलेश अपने बच्चों व पत्नी के साथ हंसी खुशी खाना खा रहा था। तब शायद उसे मालूम भी नहीं था कि आज वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ आखिरी रात बिताने वाला है। फैक्ट्री विस्फोट मामले में सबसे गहरा असर अखिलेश पर पड़ा है। अखिलेश के अनुसार सोमवार की रात वह बच्चों को सुलाने के बाद वह स्वयं लेटने जा रहा था। तभी अचानक विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद इतना भी समय उसको नहीं मिला कि वह कुछ समझ पाता। धमाके के साथ उसका मकान पलक झपकते ही ढह गया। जिसे कमरे में लेटी उसकी पत्नी नन्नीदेवी और बच्चे दब गए। वह बाहरी कमरे था। जिस कारण बच गया। पत्नी व बच्चों के शवों को देख अखिलेश के आखें आंसूओं थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अब वह अपने परिवार का अकेला सदस्य बचा है। इस धमाके का असर स्व. रामऔतार के पुत्री को भी लील गई है। रामऔतार का निधन आज से एक माह पहले हुआ था। रामऔतार के निधन पर उसकी पुत्री खुशबू अपनी ससुराल से मायके आई थी। खुशबू एक दिन पहले ही अपने मायके पहुंची। पटाखे के विस्फोट ने मायके आई खुशबू के जीवन को समाप्त कर दिया। इस दौरान घर में मौजूद अन्य लोग चुटहित भी हुए हैं।
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