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हादसों को दावत दे रहीं औरैया डिपो की पुरानी गाडिय़ां
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औरैया। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन सुहाने सफर का वादा कर रहा है लेकिन औरैया डिपो की बसें इस सफर को खतरे का सफर बना रहा है। डिपो की 50 फीसदी बसों में सफर करना अपनी जान खतरे में डालना है।जर्जर झूलते तारों से निकलने वाली चिंगारी से बस में कभी आग सकती है तो इधर बसों में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं। अधिकारी नजरअंदाज किए हुए हैं। इसी का ही परिणाम है कि कानपुर देहात में एक बस में शार्ट सर्किट से आग लगी।
औरैया डिपो में यूं तो बसों की संख्या अब 94 हो चुकी है। 16 नई शटल बसें शामिल हैं। डिपो में अभी भी पुुरानी 74 गाड़ियों से काम लिया जा रहा है। 55 कंडम स्थिति में हैं। इनमें न तो आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम हैं और न बेहतर बनाने का प्रयास विभागीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। आलम यह है कि चालक की सीट के पास तारों का मकड़जाल कभी भी देखा जा सकता है। ये तार काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इन तारों के अक्सर जलने से बस में दुर्गंध फैल जाती है, जिसको चालक नजरअंदाज कर देते हैं। सोमवार को कानपुर देहात में औरैया डिपो की बस में फैले तारों से आग लग गई। किसी तरह चालक ने गाड़ी रोककर यात्रियों को उतारा। बस में लग रही आग को शांत करने के लिए चालक व परिचालक को दमकल कर्मियों का सहारा लेना पड़ा।
बसों में आग बुझाने के उपकरण तो नहीं देखने को मिल रहे हैं तो वही सबसे बड़ी बात यह भी है कि जिन चालकों और परिचालकों के भरोसे चलाई जा रही है और उनमें गैस सिलेंडर रखे हैं पर चालकों और परिचालकों को आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। डिपो में चालक शैलैंद्र, कल्लू यादव ने बताया कि आग लगने पर वे सवारियों को बचाने का प्रयास करेंगे। आगे कैसे बुझाई जाएगी, यह वह नहीं जानते।
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एआरएम राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जितनी भी नई गाड़ियां है, सभी में सिलिंडर हैं। पुरानी बसों में सिलिंडर नहीं हैं। वहीं झूलते तारों के संबंध में उन्होंने बताया कि शीघ्र इन तारों को दुरुस्त कराया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है।
- डिपो की 50 फीसदी बसों में झूलते तारों में अक्सर होते हैं हादसे
- कानपुर देहात में शार्ट सर्किट से एक बस में लगी आग, नहीं चेते अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
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औरैया डिपो में यूं तो बसों की संख्या अब 94 हो चुकी है। 16 नई शटल बसें शामिल हैं। डिपो में अभी भी पुुरानी 74 गाड़ियों से काम लिया जा रहा है। 55 कंडम स्थिति में हैं। इनमें न तो आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम हैं और न बेहतर बनाने का प्रयास विभागीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। आलम यह है कि चालक की सीट के पास तारों का मकड़जाल कभी भी देखा जा सकता है। ये तार काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इन तारों के अक्सर जलने से बस में दुर्गंध फैल जाती है, जिसको चालक नजरअंदाज कर देते हैं। सोमवार को कानपुर देहात में औरैया डिपो की बस में फैले तारों से आग लग गई। किसी तरह चालक ने गाड़ी रोककर यात्रियों को उतारा। बस में लग रही आग को शांत करने के लिए चालक व परिचालक को दमकल कर्मियों का सहारा लेना पड़ा।
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बसों में आग बुझाने के उपकरण तो नहीं देखने को मिल रहे हैं तो वही सबसे बड़ी बात यह भी है कि जिन चालकों और परिचालकों के भरोसे चलाई जा रही है और उनमें गैस सिलेंडर रखे हैं पर चालकों और परिचालकों को आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। डिपो में चालक शैलैंद्र, कल्लू यादव ने बताया कि आग लगने पर वे सवारियों को बचाने का प्रयास करेंगे। आगे कैसे बुझाई जाएगी, यह वह नहीं जानते।
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एआरएम राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जितनी भी नई गाड़ियां है, सभी में सिलिंडर हैं। पुरानी बसों में सिलिंडर नहीं हैं। वहीं झूलते तारों के संबंध में उन्होंने बताया कि शीघ्र इन तारों को दुरुस्त कराया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है।
- डिपो की 50 फीसदी बसों में झूलते तारों में अक्सर होते हैं हादसे
- कानपुर देहात में शार्ट सर्किट से एक बस में लगी आग, नहीं चेते अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो