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चुनाव में दिग्गजों के साथ मुद्दे भी हुए हवा
Updated Sun, 12 Nov 2017 12:02 AM IST
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उरई। नगर पालिका चुनाव में इस बार विकास की बातें ही नहीं बल्कि दिग्गज नेता भी देखने को नहीं मिल रहे हैं। पार्टी कार्यालयों में कार्यकर्ताओं की तो भीड़ रहती है, लेकिन उनके बीच गिने चुने ही बड़े नेता देखने को मिलते हैं। इससे भी ज्यादा ताज्जुब की बात है कि अध्यक्ष पद के किसी भी दावेदार ने नामांकन से लेकर नाम वापसी होने के बाद भी अपना कोई चुनावी एजेंडा नहीं तैयार किया। बैनर, पर्चों पर भी सिर्फ नारों के बूते ही वोट मांगे जा रहे हैं। यही हाल सभासद पद के दावेदारों का भी है। प्रत्याशी सड़कें तो नाप रहे हैं, लेकिन वोटरों से रूबरू नहीं हो रहे हैं। दूर से ही भइया, दादा कहकर हाथ जोड़ते हुए निकल रहे हैं।
हाल में ही विधानसभा चुनाव होने के बाद लग रहा था कि नगर पालिका चुनाव में भी दिग्गज चेहरे जनता के बीच नजर आएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। चारों नगर पालिकाओं और छह नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के अधिकांश दावेदारों के चुनाव का तंबू सिर्फ और सिर्फ जाति समीकरण के बंबू पर टिका नजर आ रहा है।
स्थिति यह है कि दावेदार जेब में वोटर लिस्ट डाल कर घूम रहे हैं और जहां मौका मिलता है वहीं पर जाति समीकरण का गुणाभाग करने लगते हैं। कोई बिरादरी की ताकत दिखा कर मैदान जीतने की बात कर रहा है तो कोई समाज के लोगों की ताकत का अहसास करा कर जीते भले न, लेकिन विरोधियों को हराने का दम भर रहा है। विकास से किसी को दूर-दूर तक का वास्ता नहीं है।
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विकास की बात की तरह ही भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस के बड़े नेता चुनाव की पिक्चर से नदारत हैं। इक्का दुक्का नेता ही अपने ठेकों पर भीड़ लगाए बैठे नजर आते हैं, जनता के बीच बड़े चेहरे कम ही दिखाई दे रहे हैं।
500 से अधिक सड़कें आज भी कच्ची
उरई, कोंच, कालपी, जालौन नगर पालिकाओं में आज भी 500 से अधिक सड़कें ऐसी हैं जहां गिट्टी डामर तो दूर खड़ंजा तक देखने को नहीं मिलेगा। कच्ची सड़कों पर मामूली सी बारिश भी जलभराव की शक्ल में नजर आने लगतीं हैं।
हजारों जानवर अन्ना, कांजी हाउस लापता
जनपद की कोई भी नगर पालिका हो या पंचायत किसी का भी चौराहा ऐसा नहीं है जहां रात दिन आवारा जानवरों का जमघट न लगता हो। आंकड़ों की मानें तो करीब 50 हजार आवारा जानवर आबादी के बीच हैं। फिर भी उरई शहर को छोड़ दें तो कहीं भी कैटिल कैचिंग दस्ता नहीं है। कांजी हाउस तो जनपद भर में नहीं है।
2228 हैंडपंप छोड़ चुके पानी
जल संस्थान व निगम के आंकड़ों के अनुसार जनपद भर में दो हजार से अधिक हैंडपंपों ने पानी का साथ छोड़ दिया है। गर्मी के मौसम में पानी लिए हाय तौबा मची रही। स्थिति यह रही कि सर्दियों में भी ठूंठ खड़े हैंडपंप पब्लिक की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
जनपद में सिर्फ 21 किमी सीवर लाइन
सीवर लाइन की स्थिति यह है कि कोंच और उरई में सिर्फ 21 किमी सीवर लाइन है। उससे भी बड़ी हैरत की बात यह है कि आजादी के बाद से ही इन सीवर लाइनों की ओर किसी ने देखा नहीं। लिहाजा बारिश के दिनों में चोक लाइनें उफनाकर घरों के भीतर रहना भी दूभर कर देती हैं।
-जाति समीकरणों पर टिकी अध्यक्ष पद के दावेदारों की गणित
-सभासद पद के प्रत्याशी भी भइया, दादा कर मांग रहे वोट
अमर उजाला ब्यूरो
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हाल में ही विधानसभा चुनाव होने के बाद लग रहा था कि नगर पालिका चुनाव में भी दिग्गज चेहरे जनता के बीच नजर आएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। चारों नगर पालिकाओं और छह नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के अधिकांश दावेदारों के चुनाव का तंबू सिर्फ और सिर्फ जाति समीकरण के बंबू पर टिका नजर आ रहा है।
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स्थिति यह है कि दावेदार जेब में वोटर लिस्ट डाल कर घूम रहे हैं और जहां मौका मिलता है वहीं पर जाति समीकरण का गुणाभाग करने लगते हैं। कोई बिरादरी की ताकत दिखा कर मैदान जीतने की बात कर रहा है तो कोई समाज के लोगों की ताकत का अहसास करा कर जीते भले न, लेकिन विरोधियों को हराने का दम भर रहा है। विकास से किसी को दूर-दूर तक का वास्ता नहीं है।
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विकास की बात की तरह ही भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस के बड़े नेता चुनाव की पिक्चर से नदारत हैं। इक्का दुक्का नेता ही अपने ठेकों पर भीड़ लगाए बैठे नजर आते हैं, जनता के बीच बड़े चेहरे कम ही दिखाई दे रहे हैं।
500 से अधिक सड़कें आज भी कच्ची
उरई, कोंच, कालपी, जालौन नगर पालिकाओं में आज भी 500 से अधिक सड़कें ऐसी हैं जहां गिट्टी डामर तो दूर खड़ंजा तक देखने को नहीं मिलेगा। कच्ची सड़कों पर मामूली सी बारिश भी जलभराव की शक्ल में नजर आने लगतीं हैं।
हजारों जानवर अन्ना, कांजी हाउस लापता
जनपद की कोई भी नगर पालिका हो या पंचायत किसी का भी चौराहा ऐसा नहीं है जहां रात दिन आवारा जानवरों का जमघट न लगता हो। आंकड़ों की मानें तो करीब 50 हजार आवारा जानवर आबादी के बीच हैं। फिर भी उरई शहर को छोड़ दें तो कहीं भी कैटिल कैचिंग दस्ता नहीं है। कांजी हाउस तो जनपद भर में नहीं है।
2228 हैंडपंप छोड़ चुके पानी
जल संस्थान व निगम के आंकड़ों के अनुसार जनपद भर में दो हजार से अधिक हैंडपंपों ने पानी का साथ छोड़ दिया है। गर्मी के मौसम में पानी लिए हाय तौबा मची रही। स्थिति यह रही कि सर्दियों में भी ठूंठ खड़े हैंडपंप पब्लिक की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
जनपद में सिर्फ 21 किमी सीवर लाइन
सीवर लाइन की स्थिति यह है कि कोंच और उरई में सिर्फ 21 किमी सीवर लाइन है। उससे भी बड़ी हैरत की बात यह है कि आजादी के बाद से ही इन सीवर लाइनों की ओर किसी ने देखा नहीं। लिहाजा बारिश के दिनों में चोक लाइनें उफनाकर घरों के भीतर रहना भी दूभर कर देती हैं।
-जाति समीकरणों पर टिकी अध्यक्ष पद के दावेदारों की गणित
-सभासद पद के प्रत्याशी भी भइया, दादा कर मांग रहे वोट
अमर उजाला ब्यूरो