21 साल पुराने मामले में न्यायालय ने गो-तस्करी के तीन दोषियों को दो-दो साल की सजा सुनाई है। साथ ही 9150 रुपये का जुर्माना लगाया है।
ये मामला डिडौली कोतवाली से जुड़ा है। 4 मार्च 2001 को तत्कालीन इंस्पेक्टर सुखपाल सिंह अन्य पुलिस टीम के साथ गश्त कर रहे थे। उन्हें सूचना मिली कि जोया की ओर से दो कैंटर गाड़ी आने वाली हैं जो संभल को जाएंगी। कैंटरों में गोवंश है जिन्हें वध करने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने घेराबंदी दोनों गाड़ियों को पकड़ कर चार को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव ढकिया चमन निवासी नवाब, कनपुरा गांव निवासी तहसीन अहमद, संभल के मोहल्ला शहवाजपुरा निवासी आसकार और खग्गू सराय निवासी मोहम्मद नूर के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम, गोवध निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मुकदमा सुनवाई के दौरान मोहम्मद नूर की मौत हो गई है। यह मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कमलापति की अदालत में विचाराधीन था। सोमवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी कृष्ण प्रताप यादव ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर गो तस्कर नवाब, तहसीन, और आसकार को दो-दो साल की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर तीन हजार एक सौ पचास-तीन हजार एक सौ पचास रुपये का जुर्माना लगाया है।