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Amroha News: अनूठी बगिया...जहां लहलहा रही ग्रह-नक्षत्रों को शांत करने की फसल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 02:05 AM IST
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A unique garden... where the crop to pacify the planets and constellations is flourishing.
गजरौला (विकल सिंह)। अगर आपको किसी खास पूजन के लिए पुरोहित ने विशेष तरह के फूल, पौधे या पत्ते जुटाने के लिए कहा है तो आपको जगह-जगह भटकने की जरूरत नहीं। आप गजरौला के आसपास हैं तो आपको लक्ष्मी नारायण गर्ग की बगिया का रुख कर लेना चाहिए। आपको वहां वह हर पौधा या पुष्प मिल जाएगा जो ग्रह-नक्षत्र अनुकूल करने की नीयत से की जाने वाली उपासना में जरूरी होते हैं। यही नहीं, पूजन को अधिक फलदायी बनाने के लिए राशि के आधार पर निर्धारित फूल-पत्ती भी इस बाग में हैं। पेड़-पौधों से लगाव की ललक ने लक्ष्मी नारायण को इस अनूठी बगिया का रचनाकार बना दिया। जहां से जरूरतमंद विशेष पूजा-अनुष्ठान के लिए सहज उपलब्ध न होने वाले पुष्प, पत्ते, टहनियां ले जाते हैं।
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सलेमपुर गौसाईं गांव निवासी लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि किसी विशेष पूजन के समय पंडित-पुरोहित अक्सर खास तरह के फूल-पत्तियां जरूरी बताते हैं। इनमें से कई पौधों की आम आदमी खासकर नई पीढ़ी को पहचान तक नहीं होती। इसके अलावा हर पौधा हर जगह उपलब्ध हो यह जरूरी नहीं। इस लिहाज से उन्होंने अपनी अनूठी बागवानी का मन बनाया। साल 2021 में धनौरा मार्ग पर 50 बीघा जमीन खरीदी और उसमें दुर्लभ प्रजाति के पौधे लगाने शुरू कर दिए। वह बताते हैं कि इस अनूठी बगिया में 2500 के आसपास पेड़-पौधे हैं। आम के भी 500 पेड़ हैं, जिनमें 30 प्रजाति हैं। आम की इस बागवानी से होने वाली आमदनी से दुर्लभ पुष्प और पौधों की बगिया को संवारने और रखरखाव में लगाते हैं।
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वह बताते हैं कि पूजन के साथ तमाम तरह के उपचार में इस्तेमाल होने वाले पौधों की वैरायटी भी उनकी बगिया में है। पूजन हो या इलाज जरूरतमंदों को पुष्प, पौधे-पत्तियां देते समय कोई कीमत नहीं वसूली जाती है। व्यावसायिक दृष्टि से कोई बात करता है तो परिस्थिति अनुसार निर्णय लेते हैं। वह बताते हैं कि कई दफा बच्चे के जन्म के समय ग्रहों की दशा के हिसाब से कहा जाता है कि नामकरण में मूल शांत कराने का पूजन भी होगा। मूलों की शांति के लिए आवश्यक 27 तरह के पौधों के साथ ही प्रत्येक राशि के नाम से जुड़े अलग-अलग 12 पौधे इस बगिया में हैं। इसके अलावा हवन में जरूरी नौ तरह के और पंचवटी के पांचों पौधे भी यहां हैं।
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इस खास पहल का कारण पूछने पर कहते हैं कि पेड़-पौधों से प्रेम बचपन से था। कुछ साल पहले मन में इस तरह की वाटिका की इच्छा जागी। दुर्लभ पौधों के लिए प्रयास शुरू किया तो धीरे-धीरे मन का भाव हकीकत बन गया। इसी लिए इन पौधों की परवरिश भी बच्चों की तरह करते हैं। दिनचर्या की शुरुआत इनकी देखरेख से ही होती है। इस बगिया से पूजन या उपचार में किसी की जरूरत पूरी होती देखकर आत्मिक तसल्ली मिलती है। (संवाद)

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जानें किस नक्षत्र के पूजन के लिए कौन सा पौधा
अनूठी बागवानी के संचालक लक्ष्मी नारायण गर्ग पुरोहितों के हवाले से बताते हैं कि 27 नक्षत्रों के पूजन के हिसाब से अलग-अलग पौधे या पुष्प हैं। इनमें अश्विनी के लिए कोचिला, भरणी के लिए आंवला, कृतिका के लिए गुड़हल, रोहिणी के लिए जामुन, मृगशिरा के लिए खैर, आद्रा के लिए शीशम, पुनर्वसु के लिए बांस, पुष्य के लिए पीपल, अश्लेषा के लिए नागकेसर, मघा के लिए वट, पूर्वा फाल्गुनी के लिए पलाश, उत्तरा फाल्गुनी के लिए पाकड़, हस्त के लिए रीठा, चित्रा के लिए बेल, स्वाति के लिए अर्जुन, विशाखा के लिए कटैया, अनुराधा के लिए मौलसरी, ज्येष्ठा के लिए चीड़, मूल के लिए साल, पूर्वाषाढ़ के लिए अशोक, उत्तराषाढ़ के लिए कटहल, श्रवण के लिए अकौन, धनिष्का (धनिष्ठा) के लिए शमी, शतभिषा के लिए कदंब, पूर्वा भाद्रपद के लिए आम, उत्तराभाद्रिपद के लिए बेल, रेवती के लिए महुआ तय हैं।

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राशि और पंचवटी के पौधे
मुरादाबाद के पंडित विवेक शास्त्री के मुताबिक मेष राशि के लिए आंवला, वृष के लिए जामुन, मिथुन के लिए चंपा, कर्क के लिए बांस, सिंह के लिए अशोक, कन्या के लिए विल्व, तुला के लिए अर्जुन, वृश्चिक के लिए नीम, धनु के लिए कनेर, मकर के लिए नारियल या शमी, कुंभ के लिए कदंब, मीन के लिए बेर से किए पूजन शुभफलदायी होते हैं। इसी तरह ग्रहों की बात करें तो सूर्य के लिए मंदार, चंद्र के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग, गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहू के लिए दूर्वा (हरी घास), केतु के लिए कुशा के साथ पूजन किया जाना चाहिए।
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कंप्यूटर में फीड दुर्लभ पौधों का ब्योरा
लक्ष्मी नारायण गर्ग का कहना है कि उनके यहां पर 125 से अधिक किस्म के पौधे हैं। इनमें दुर्लभ प्रजाति के पौधों में शामिल कल्प वृक्ष,
रुद्राक्ष, कैथ, जापानी मियां जाकी आम, स्वर्ण रेखा आम, आवाकाडो, मुरैया, अखरोट, वैजयंती माला चकोतरा के पौधे शामिल हैं। जितने भी पौधे हैं, सबका रिकॉर्ड
कंप्यूटर में फीड है। इस प्रयास में साथ दे रहे दिनेश सैनी पौधों की देखभाल करते हैं, जबकि शुभम उपाध्याय कंप्यूटर में फीडिंग।
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