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Amroha News: जिस पत्नी पर था हत्या का शक उसी की गवाही ने पति को दिलाया न्याय

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:14 AM IST
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The testimony of the wife who was suspected of murder brought justice to the husband
अमरोहा।
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जिस पत्नी के खिलाफ शक के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं, मृतक पति को न्याय दिलाने में अहम गवाह बनी। 12 गवाहों में से उसकी गवाही के कारण हत्यारों को उम्रकैद की सजा मिली। महिला को हत्यारोपियों से जान को खतरा था, लेकिन वह मजबूती के साथ अपने इरादों पर खड़ी रही। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी गवाही कराई गई। जिले में ये पहला मामला है, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही हुई और हत्यारोपियों को सजा मिली।
बिहार के बक्सर जिले में राजपुर थाना क्षेत्र के रौनी गांव निवासी अमरेंद्र कुमार गजरौला की फैक्टरी में नौकरी करते थे और यहीं पत्नी पूजा व तीन बच्चों के रहते थे। नौकरी की शुरुआती दिनों में अमरेंद्र फैक्टरी में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे। इस बीच फैक्टरी से 50 कट्टे सीमेंट के चोरी हो गए। अमरेंद्र कुमार ने ईमानदारी दिखाते हुए फैक्टरी में ही काम करने वाले अमित श्रीवास्तव के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन, घटना के बाद अमित अमरेंद्र सिंह से रंजिश रखने लगा। इस बीच अमरेंद्र का प्रमोशन सुपरवाइजर के पद पर हो गया था। घटना से दो दिन पहले ही अमरेंद्र सिंह ने ये बात पत्नी पूजा को बताई थी कि अमित मेरे साथ कोई घटना कर सकता है।
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14 अप्रैल 2011 को अमरेंद्र सिंह फैक्टरी गए, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन 15 अप्रैल की सुबह सात बजे गजरौला क्षेत्र के मुरीदपुर अटारी के रहने वाले रामसिंह के खेत में ट्यूबवेल के पास अमरेंद्र सिंह का शव पड़ा मिला था। अमरेंद्र की जेब में मिले कागजों के आधार पर उनकी पहचान हुई थी। इस मामले में खेत मालिक रामसिंह की तहरीर के आधार पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था। 16 अप्रैल को गजरौला पहुंचे अमरेंद्र के पिता हीरालाल सिंह ने पुत्रवधू पूजा पर हत्या का शक जताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया था। मुकदमे के विवेचक व थानाध्यक्ष मलिक यूनुस अली की निष्पक्ष विवेचना के चलते पूजा की नामजदगी झूठी पाई गई थी।
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पुलिस ने भी पत्नी की गवाही को आरोपपत्र में नहीं किया था शामिल
पुलिस ने पूजा से पूछताछ की तो उसने पति अमरेंद्र सिंह द्वारा अमित श्रीवास्तव से जान के खतरे वाली बात बताई। जिसके बाद पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर दिया। सबसे पहले पुलिस ने अमित को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसके ही साथ फैक्टरी में काम करने वाले चंदौली निवासी हरिशंकर को पकड़ लिया था। बाद में सरजीत, गजराज और दीपक गिरी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले में पुलिस ने मृतक अमरेंद्र सिंह की पत्नी पूजा की गवाही को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया था। लेकिन, न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की मांग पर पूजा को तलब कर लिया और उसकी गवाही कराई। इस हत्याकांड में पूजा के अलावा 11 गवाह और थे। लेकिन, पूजा की गवाही हत्यारोपियों को सजा दिलाने में अहम रही। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनपद की ये पहले गवाही थी, जिसमें दोषियों को सजा मिली है।

पूजा ने अमरोहा आकर गवाही देने पर जान को बताया था खतरा
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार वशिष्ठ ने बताया कि पूजा पति अमरेंद्र सिंह की मौत के बाद बिहार में जाकर रहने लगी थी। बार-बार अमरोहा आकर गवाही देने पर उसने हत्यारोपियों से जान को खतरा बताया। कोर्ट ने उसकी पीड़ा को समझा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने के लिए सहमति दी। इसके बाद सात मार्च 2024 को पूजा ने बिहार के बक्सर जनपद न्यायालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दी। ये गवाही अमरेंद्र के हत्यारोपियों के लिए सजा दिलाने में अहम सबूत बनी। जिसके चलते न्यायालय ने सभी पांचों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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