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Amroha News: कर लिपिक को गिरफ्तार कर ले गई मेरठ की आर्थिक अपराध संगठन की टीम
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गजरौला (अमरोहा)। बिना जांच के खनन ठेकेदार को हैसियत प्रमाण पत्र बनाकर देने के मामले में नामजद नगर पालिका के कर लिपिक को मेरठ की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। 2009 में बने हैसियत प्रमाण पत्र के बाद खनन के दौरान ढांग गिर जाने से दब कर आठ लोगों की जान चली गई थी।
मेरठ की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की सीओ सुनीता कुमारी के नेतृत्व में सोमवार को पुलिस टीम गजरौला पहुंची। यहां अपनी आमद दर्ज कराने के बाद टीम ने पालिका के कर लिपिक को गिरफ्तार कर लिया और उसे अपने साथ ले गई, लेकिन सेवानिवृत्त लेखपाल राधे श्याम हाथ नहीं लगा। उसकी भी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। नगर पालिका की ईओ गार्गी त्यागी का कहना है कि उनको यह जानकारी मिली है कि कर लिपिक अजय कुमार गोस्वामी को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। वह बाहर हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की उनको जानकारी नहीं है।
इस तरह फंसा था पालिका का कर लिपिक
गजरौला। खनन ठेकेदार राजेश अग्रवाल ने नगर पंचायत कार्यालय गजरौला में आवेदन किया। उसने आवेदन में शिवपुरी मोहल्ला स्थित मकान संख्या 116/3 का 1 /2 भाग का स्वामी बताया।कहा कि उसे मकान लक्ष्मी देवी नेविक्रय किया है। सबूत के तौर पर लक्ष्मीदेवी का शपथ पत्र भी जमा किया। जिसपर लक्ष्मी देवी के हस्ताक्षर थे, जबकि लक्ष्मी देवी ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया था। कहा था कि वह अंगूठा लगाती है। कर लिपिक अजयकुमार गोस्वामीने मौके पर जांच नहीं की। लक्ष्मी देवी के शपथ पत्र को तस्दीक नहींकिया। राजेश कुमार को मकान के आधे भाग का स्वामी दर्शा दिया। उस पर गृहकर लगाने के आदेश करा दिए। जिसके बाद उसका हैसियत प्रमाण पत्र बना और उसेखनन का पट्टा मिला। जिसके चलते कर उस पर 120 बी व 420, 467 और 468 की धारा लगाई गई।लेखपाल राधे श्याम ने भी लक्ष्मी देवी केनाम से जमा किए गए शपथ पत्र व राजेशकुमार के गृह कर रसीद की जांच नहीं कीगई। मौके पर जांच और तस्दीक किए बगैर हीअपनी संस्तुति कर दी।
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ढांग गिरने से दब कर हुई थी आठ लोगों की मौत
गजरौला। गजरौला निवासी राजेश कुमार अग्रवाल को नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के मेदूवालागांव के जंगल में खनन करने के लिए पट्टा आवंटित किया गया था। 2009 में ढांग गिर जाने से आठ लोगों की जान चली गई। तत्कालीन नायब तहसीलदार द्वारा नजीबाबाद थाने में राजेश कुमार अग्रवाल के साथ ही अनिल गुप्ता, अरविंद गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, सुनीता गुप्ता निवासी जसवंत शुगर मिल मेरठ, ब्रजभूषण लाल व संजय बिंदल निवासी मॉडर्न इंडस्ट्रीज साहिबाबाद, अजय बिंदल के खिलाफ 27 जून-2009 को गैर इरादतन हत्या/120बी, खनन अधिनियम, लोक संपत्ति निवारण अधिनियम व एससी / एसटी एक्ट मुकदमा दर्ज कराया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद 2016 में यह केस मेरठ स्थित आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को ट्रांसफर कर दिया गया।
उधर विवेचना के दौरान पूर्व सांसद हरीश नागपाल, हापुड़ जिले के सिंभावली थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी सुनील दत्त शर्मा, गजरौला के सुल्ताननगर मोहल्ला निवासी राधेश्याम, अवंतिका नगर मोहल्ला निवासी अजय कुमार गोस्वामी सहित आठ लोगों के नाम दौरान प्रकाश में आए थे। राधेश्याम सेवानिवृत्त लेखपाल है,जबकि सुनील दत्त शर्मा की देखरेख में खनन का कार्य चल रहा था। जिसकी विवेचना 16 अगस्त-22 को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की सीओ समीक्षा यादव को मिली। उनके कानपुर स्थानांतरण के बाद सीओ सुनीता कुमारी केस की विवेचक हैं।
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मेरठ की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की सीओ सुनीता कुमारी के नेतृत्व में सोमवार को पुलिस टीम गजरौला पहुंची। यहां अपनी आमद दर्ज कराने के बाद टीम ने पालिका के कर लिपिक को गिरफ्तार कर लिया और उसे अपने साथ ले गई, लेकिन सेवानिवृत्त लेखपाल राधे श्याम हाथ नहीं लगा। उसकी भी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। नगर पालिका की ईओ गार्गी त्यागी का कहना है कि उनको यह जानकारी मिली है कि कर लिपिक अजय कुमार गोस्वामी को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। वह बाहर हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की उनको जानकारी नहीं है।
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इस तरह फंसा था पालिका का कर लिपिक
गजरौला। खनन ठेकेदार राजेश अग्रवाल ने नगर पंचायत कार्यालय गजरौला में आवेदन किया। उसने आवेदन में शिवपुरी मोहल्ला स्थित मकान संख्या 116/3 का 1 /2 भाग का स्वामी बताया।कहा कि उसे मकान लक्ष्मी देवी नेविक्रय किया है। सबूत के तौर पर लक्ष्मीदेवी का शपथ पत्र भी जमा किया। जिसपर लक्ष्मी देवी के हस्ताक्षर थे, जबकि लक्ष्मी देवी ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया था। कहा था कि वह अंगूठा लगाती है। कर लिपिक अजयकुमार गोस्वामीने मौके पर जांच नहीं की। लक्ष्मी देवी के शपथ पत्र को तस्दीक नहींकिया। राजेश कुमार को मकान के आधे भाग का स्वामी दर्शा दिया। उस पर गृहकर लगाने के आदेश करा दिए। जिसके बाद उसका हैसियत प्रमाण पत्र बना और उसेखनन का पट्टा मिला। जिसके चलते कर उस पर 120 बी व 420, 467 और 468 की धारा लगाई गई।लेखपाल राधे श्याम ने भी लक्ष्मी देवी केनाम से जमा किए गए शपथ पत्र व राजेशकुमार के गृह कर रसीद की जांच नहीं कीगई। मौके पर जांच और तस्दीक किए बगैर हीअपनी संस्तुति कर दी।
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ढांग गिरने से दब कर हुई थी आठ लोगों की मौत
गजरौला। गजरौला निवासी राजेश कुमार अग्रवाल को नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के मेदूवालागांव के जंगल में खनन करने के लिए पट्टा आवंटित किया गया था। 2009 में ढांग गिर जाने से आठ लोगों की जान चली गई। तत्कालीन नायब तहसीलदार द्वारा नजीबाबाद थाने में राजेश कुमार अग्रवाल के साथ ही अनिल गुप्ता, अरविंद गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, सुनीता गुप्ता निवासी जसवंत शुगर मिल मेरठ, ब्रजभूषण लाल व संजय बिंदल निवासी मॉडर्न इंडस्ट्रीज साहिबाबाद, अजय बिंदल के खिलाफ 27 जून-2009 को गैर इरादतन हत्या/120बी, खनन अधिनियम, लोक संपत्ति निवारण अधिनियम व एससी / एसटी एक्ट मुकदमा दर्ज कराया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद 2016 में यह केस मेरठ स्थित आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को ट्रांसफर कर दिया गया।
उधर विवेचना के दौरान पूर्व सांसद हरीश नागपाल, हापुड़ जिले के सिंभावली थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी सुनील दत्त शर्मा, गजरौला के सुल्ताननगर मोहल्ला निवासी राधेश्याम, अवंतिका नगर मोहल्ला निवासी अजय कुमार गोस्वामी सहित आठ लोगों के नाम दौरान प्रकाश में आए थे। राधेश्याम सेवानिवृत्त लेखपाल है,जबकि सुनील दत्त शर्मा की देखरेख में खनन का कार्य चल रहा था। जिसकी विवेचना 16 अगस्त-22 को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की सीओ समीक्षा यादव को मिली। उनके कानपुर स्थानांतरण के बाद सीओ सुनीता कुमारी केस की विवेचक हैं।